Palghar के आश्रम स्कूल में 7 वर्षीय छात्र की बुखार से मौत, जांच के लिए SIT गठित
महाराष्ट्र में पालघर जिले के एक आवासीय स्कूल के सात वर्षीय छात्र की तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी के चलते मौत हो गई जबकि सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षणों वाले 30 अन्य छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। छात्र की मौत के बाद स्कूल के अधीक्षक को ड्यूटी में ‘‘गंभीर लापरवाही’’ के आरोप में निलंबित कर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने स्कूल की रसोई का निरीक्षण किया और सामान के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। इससे पहले, इस महीने की शुरुआत में गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय स्कूल के छात्रावास में फर्श पर सोई तीन आदिवासी छात्राओं की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी। पालघर के मामले में, आश्रम स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ने वाले छात्र को 22 अगस्त को तेज बुखार हुआ और इलाज के लिए उसे स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ले जाया गया।
सोमवार को जब उसका बुखार फिर से बढ़ा, तो पीएचसी के चिकित्सा अधिकारी ने उसका ऑक्सीजन स्तर गिरता हुआ पाया और उसे एंबुलेंस से मनोर के ग्रामीण अस्पताल ले जाने की सलाह दी। अधिकारी ने बताया कि बच्चे को अस्पताल ले जाने के बाद चिकित्सा अधिकारियों ने ईसीजी किया और उसे मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि मौत का सही कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद पता चलेगा।
घटना के बाद स्वास्थ्य और प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया। स्कूल के कुल 449 छात्रों में से 395 वहीं रहकर पढ़ते हैं। चिकित्सकों की एक टीम ने परिसर में सभी छात्रों की स्वास्थ्य जांच की।
अधिकारी ने बताया कि सावधानी के तौर पर सर्दी, खांसी या बुखार के हल्के लक्षण वाले 30 छात्रों को मसवन पीएचसी में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है, जिनकी हालत स्थिर बताई गई है। एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के अधिकारी विशाल खत्री ने स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया तथा अस्पताल में भर्ती छात्रों और उनके माता-पिता से मुलाकात की। खत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जिला स्वास्थ्य अधिकारी की सलाह के अनुसार, मसवन आश्रम स्कूल में दोबारा स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया।
स्कूल परिसर की सफाई और पानी को साफ करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरती जाएंगी।’’ अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि छात्र की दुखद मौत की विस्तृत जांच करने, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने के सिलसिले में विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया है। पालघर जिला प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।’’ बयान में कहा गया कि आदिवासी विकास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त के दौरे के दौरान ड्यूटी में गंभीर लापरवाही को लेकर स्कूल के अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इसके अलावा, सहायता प्राप्त स्कूल चलाने वाली संस्था आदिवासी सेवा मंडल, मुंबई के अध्यक्ष और सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। बयान में कहा गया, ‘‘प्रशासन की तत्काल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे जल्द स्वस्थ हों और ऐसी घटना दोबारा न हो। इसी उद्देश्य से पालघर के सभी स्कूलों में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जा रहे हैं और बुखार, सर्दी, खांसी आदि जैसे लक्षण वाले छात्रों को निगरानी में रखा जा रहा है।’’ इसमें कहा गया, ‘‘मसवन पीएचसी में 30 छात्र निगरानी में हैं, जिनमें 14 लड़के और 11 लड़कियां हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह पर चार लड़कियों और एक लड़के को बेहतर इलाज के लिए पालघर जिले के मनोर में ग्रामीण अस्पताल भेजा गया है। छात्रों की हालत खतरे से बाहर है। उन्हें केवल सावधानी के तौर पर निगरानी में रखा गया है।’’ बयान के अनुसार, एफडीए के अधिकारियों ने स्कूल की रसोई का भी निरीक्षण किया और खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे मसाले, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और तेल के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए।
अधिकारियों ने मौके पर कीटों से बचाव की व्यवस्था और पानी साफ करने की प्रणालियों की भी जांच की। अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में औसतन लगभग हर दिन एक छात्र की मौत हुई है। इस दौरान राज्य सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त आवासीय संस्थानों में कुल 584 छात्रों की मौत हुई।
उन्होंने कहा कि मौत के कारणों में सांप का काटना, सिकल सेल बीमारी, गंभीर बीमारियां, दुर्घटनाएं और आत्महत्या शामिल थी। गढ़चिरौली में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की हालिया मौत को लेकर भारी आलोचना का सामना करने वाली सरकार ने सुधार के कदम शुरू किए हैं, जिनमें आवासीय स्कूल का लाइसेंस रद्द करना और पूरे राज्य में ऐसी सभी संस्थाओं की व्यापक सुरक्षा जांच करना शामिल है।
PNB Scam: CBI Court ने गोकुलनाथ शेट्टी की पत्नी को राहत देने से इनकार किया
मुंबई की एक विशेष अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के उप प्रबंधक गोकुलनाथ शेट्टी की पत्नी को करोड़ों रुपये के पीएनबी घोटाले से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में आरोपमुक्त करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश एसके करहाले ने कहा कि आशालता शेट्टी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आरोप तय करने के लिए “पर्याप्त सबूत और ठोस आधार” मौजूद हैं। आशालता पीएनबी में क्लर्क के पद पर कार्यरत थीं।
उन्होंने आय से अधिक संपत्ति मामले में खुद को यह कहते हुए आरोपमुक्त करने का अनुरोध किया था कि वह मुख्य आरोपी नहीं हैं और संपत्ति से जुड़े सौदे उनके पति ने किए थे। आशालता के वकील ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल पर बैंक को अपनी संपत्ति की जानकारी देने की कोई बाध्यता नहीं थी और तीन फ्लैट खरीदने से जुड़े सौदे रद्द हो गये थे, जिसका मतलब है कि उन्होंने अपराध में कोई मदद नहीं की। सीबीआई की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक मनफूल बिश्नोई ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि आशालता एक स्वतंत्र सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्होंने संपत्ति खरीदने के लिए अपने बैंक खातों के जरिये भुगतान किया था।
अभियोजन पक्ष ने इस बात को रेखांकित किया कि जांच की अवधि के दौरान आशालता को उनके वेतन से हुई आय लगभग 22.60 लाख रुपये थी, जबकि उन्होंने 88 लाख रुपये से ज्यादा की संपत्ति अर्जित की, जिससे उनकी आय से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा हो गई। सीबीआई ने गोकुलनाथ और आशालता के खिलाफ नवंबर 2018 में एक अप्रैल 2011 और 31 मई 2017 के बीच बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्ति जुटाने के आरोप में मामला दर्ज किया था। सीबीआई के मुताबिक, जांच में पता चला कि दंपति के पास 4.28 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से 570 फीसदी से भी अधिक है।
जांच एजेंसी के अनुसार, मलाड, पनवेल और ठाणे में संपत्ति खरीदने के लिए दोनों आरोपियों के खातों से करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया था। दस्तावेजों पर गौर करने के बाद अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों आरोपियों ने करोड़ों रुपये की ऐसी संपत्ति जमा की है, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज्यादा है, लिहाजा आशालता के खिलाफ आरोप तय करने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। गोकुलनाथ करोड़ों रुपये के पीएनबी घोटाले में आरोपी हैं, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई दोनों एजेंसियां कर रही हैं।
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