एआई क्षेत्र में ऊंचे वेतन और बड़ी हिस्सेदारी के लिए कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एंथ्रोपिक ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक अलग रास्ता अपनाया है। क्लॉड एआई बनाने वाली इस कंपनी में नौकरी के प्रस्ताव पर उम्मीदवार को मिलने वाली रकम पर आम तौर पर बातचीत की गुंजाइश नहीं होती। प्रस्ताव पत्र में जो राशि दी जाती है, वही अंतिम मानी जाती है। न मोलभाव होता है और न ही प्रति-प्रस्ताव की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, एंथ्रोपिक ने साक्षात्कार और वेतन निर्धारण के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई है। कंपनी का मानना है कि सभी उम्मीदवारों के लिए समान व्यवस्था रखने से नियुक्ति प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित रहती है। ऐसे समय में जब एआई विशेषज्ञों के लिए बेहद बड़े वेतन पैकेज की खबरें सामने आती रहती हैं, एंथ्रोपिक की यह नीति काफी अलग नजर आती है।
लेकिन कंपनी की नियुक्ति प्रक्रिया में केवल तकनीकी क्षमता और वेतन ही महत्वपूर्ण नहीं है। उम्मीदवारों को एक विशेष संस्कृति संबंधी साक्षात्कार से भी गुजरना पड़ता है। यह बातचीत कंपनी के किसी कर्मचारी द्वारा ली जाती है, जिसे इस काम के लिए चुना जाता है। इसमें उम्मीदवार की सोच, नैतिक निर्णय और कंपनी के उद्देश्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को समझने की कोशिश की जाती है।
कुछ उम्मीदवारों के अनुसार, इस बातचीत में ऐसा सवाल भी पूछा गया है जिसमें कल्पना करने को कहा जाता है कि अगर सुरक्षा कारणों से एंथ्रोपिक अपने एआई संबंधी काम को बंद कर दे और कंपनी के शेयरों का मूल्य पूरी तरह खत्म हो जाए, तो वे इसे किस तरह देखेंगे। कुछ लोगों ने इस सवाल को सीधे शेयर मूल्य से जोड़कर बताया, जबकि अन्य उम्मीदवारों के मुताबिक बातचीत में सुरक्षा और कारोबार के बीच संतुलन पर चर्चा हुई।
पूर्व कर्मचारियों के हवाले से बताया गया है कि ऐसे सवाल पूरी तरह तय नहीं होते और साक्षात्कार लेने वाले कर्मचारी के अनुसार उनका स्वरूप बदल सकता है। उम्मीदवारों से उनके जीवन में सामने आए किसी नैतिक संकट और उससे निपटने के तरीके के बारे में भी पूछा जा सकता है।
गौरतलब है कि एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई ने कथित तौर पर इस बात को लेकर चिंता जताई है कि कुछ नए कर्मचारी कंपनी के उद्देश्य से अधिक वेतन को महत्व दे रहे हैं। हालांकि, यह टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि एंथ्रोपिक एआई क्षेत्र में सबसे आकर्षक वेतन देने वाली कंपनियों में गिनी जाती है।
एआई क्षेत्र में प्रतिभाओं के तेजी से एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाने का सिलसिला भी इस पूरी बहस का अहम हिस्सा है। लिलियन वेंग एंथ्रोपिक से निकलकर ओपनएआई पहुंचने वाली चर्चित प्रतिभाओं में शामिल हैं। वहीं गूगल से नोआम शाजीर ओपनएआई और नोबेल पुरस्कार विजेता जॉन जम्पर एंथ्रोपिक से जुड़े हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, संस्कृति संबंधी साक्षात्कार एंथ्रोपिक की शुरुआत से ही प्रक्रिया का हिस्सा रहा है, हालांकि शेयर मूल्य से जुड़ा सवाल बाद में शामिल किया गया माना जाता है। इसके बावजूद कंपनी में नौकरी पाने की इच्छा कम नहीं हुई है। उम्मीदवार तैयारी के लिए निजी प्रशिक्षण और अभ्यास साक्षात्कार पर हजारों डॉलर तक खर्च कर रहे हैं।
बता दें कि एंथ्रोपिक पहले भी कारोबार और अपने घोषित उद्देश्य के बीच संतुलन को लेकर फैसले ले चुकी है। कंपनी ने अमेरिकी सेना से जुड़ी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया था, जिसमें उसकी तकनीक के व्यापक सरकारी इस्तेमाल की अनुमति मिलती। कंपनी ने अपने अत्यधिक सक्षम साइबर मॉडल माइथोस की पहुंच भी सीमित रखी है। ऐसे में एंथ्रोपिक में वेतन पर बातचीत भले ही संभव नहीं हो, लेकिन कंपनी में शामिल होने वाले उम्मीदवारों से उसके उद्देश्य के प्रति विश्वास जरूर परखा जा रहा है।
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि कांगड़ा जिले में गग्गल हवाई अड्डे के आस-पास भूमि के खरीद-फरोख्त की एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की गयी पड़ताल में नौ संदिग्ध ‘बेनामी’ सौदों का पता चला है। सुक्खू ने कहा, ‘‘अब तक इन मामलों के बारे में नौ अलग-अलग स्थिति रिपोर्ट सौंपी जा चुकी हैं। जांच के दौरान चार प्रकरणों में सतर्कता विभाग के पास आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर चार अन्य मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित उपायुक्तों को निर्देश दिये गये हैं।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी जांच में सामने आए मामलों को हिमाचल प्रदेश काश्तकारी और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के तहत ज़रूरी कार्रवाई के लिए उपायुक्तों को भेज दिया गया है।
सुक्खू ने यह भी कहा कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति की राजनीतिक संबद्धता, पद या प्रभाव को ध्यान में नहीं रखा जाएगा, क्योंकि सरकार के लिए केवल तथ्य, सबूत और कानून ही सबसे महत्वपूर्ण हैं। आरोप था कि कुछ लोगों ने जमीन अधिग्रहण की स्थिति में भारी मुआवजा पाने के लिए, प्रस्तावित हवाई अड्डा इलाके और गगरेट क्षेत्र के आस-पास गरीब एवं आम परिवारों से ज़मीनें काफ़ी कम कीमत पर खरीदी थीं। एसआईटी की घोषणा 17 फरवरी को की गई थी और 18 फरवरी को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने धर्मशाला पुलिस उपमहानिरीक्षक की अध्यक्षता में चार सदस्यीय एसआईटी का गठन किया।
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