डीओई ने स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली के स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी की
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने मंगलवार को सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए एक एडवाइजरी जारी की।
एडवाइजरी में स्कूलों से कहा गया है कि वे छात्रों और स्टाफ के बीच स्वास्थ्य जागरूकता और सांस से जुड़ी साफ-सफाई की आदतों को और मजबूत करें। वहीं, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आतिशी ने नागरिकों से घबराने की अपील की।
डीओई की एडवाइजरी में कहा गया है कि बेवजह घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन समय पर जानकारी और जिम्मेदारी से बचाव के तरीके अपनाना जरूरी है, खासकर स्कूल के माहौल में।
इसमें सभी स्कूलों को हेल्दी स्कूल - हेल्दी कम्युनिटी (स्वस्थ स्कूल - स्वस्थ समुदाय) का तरीका अपनाने के लिए कहा गया है। इसके तहत सांस से जुड़ी साफ-सफाई और हाथों की साफ-सफाई को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जैसे खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को ढकना, टिश्यू को सही तरीके से फेंकना और साबुन-पानी से नियमित रूप से हाथ धोने के लिए प्रोत्साहित करना (खासकर खाना खाने से पहले और खांसने या छींकने के बाद) शामिल है।
इसमें स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सांस से जुड़ी बीमारी के लक्षण वाले लोगों से उचित दूरी बनाए रखकर संक्रमण को फैलने से रोकें। एडवाइजरी में कहा गया है, जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके अलावा, स्कूलों से कहा गया है कि वे क्लासरूम, कॉमन एरिया और बार-बार छुई जाने वाली जगहों की नियमित सफाई और जहां भी संभव हो, अच्छी हवा-रोशनी की व्यवस्था करके कुल मिलाकर साफ-सफाई को बेहतर बनाएं। इसके साथ ही, स्कूल परिसर या सार्वजनिक जगहों पर थूकने के खिलाफ जागरूकता फैलाने की बात भी कही गई है।
स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों और स्टाफ के बीच पर्याप्त पानी पीने, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और सामान्य व्यक्तिगत साफ-सफाई को बढ़ावा दें। स्टाफ को संक्रमण के जोखिम से बचने के लिए अपनी आंखों, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचने की सलाह भी दी गई है।
डीओई ने कहा, डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाएं नहीं लेनी चाहिए। इसके साथ ही स्कूलों से कहा गया है कि वे सुबह की असेंबली, क्लासरूम में बातचीत, नोटिस बोर्ड, अभिभावकों से बातचीत के जरीये और स्कूल के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस एडवाइजरी की जानकारी फैलाएं।
इसी के साथ सभी डीडीई (जिलों/जोन) को निर्देश दिया गया है कि वे एडवाइजरी के पालन पर नजर रखें और इसे सुनिश्चित करें। इसके साथ ही 31 अगस्त तक एक रिपोर्ट भेजें।
इस बीच पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री आशीष सूद ने कहा, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। देश या दिल्ली में ऐसी कोई आपातकालीन स्थिति नहीं है। हालांकि, इलाज से बेहतर बचाव है। एडवाइजरी में छोटे बच्चों और स्कूली छात्रों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, हाथ धोने, स्कूल की साफ-सफाई, क्लासरूम की साफ-सफाई और व्यक्तिगत साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया गया है। वर्ष के इस समय में ऐसी मौसमी बीमारियां होती हैं, इसलिए जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है। ये निर्देश एडवाइजरी में दिए गए हैं।
--आईएएनएस
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सचिवालय में सजे महिला समूहों के स्टाल, सीएम धामी ने खुद खरीदारी कर की वोकल फॉर लोकल की अपील
Uttarakhand News: उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून स्थित सचिवालय परिसर में मंगलवार को एक बेहद खास और प्रेरणादायक माहौल देखने को मिला. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित सशक्त बहना उत्सव के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और वहां से स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की. मुख्यमंत्री ने स्वयं आगे बढ़कर पारंपरिक और पहाड़ी उत्पादों को खरीदकर यह संदेश दिया कि अपनी जड़ों, संस्कृति और स्थानीय हुनर को बढ़ावा देना हर नागरिक का पहला दायित्व है. इस दौरान उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की कि आने वाले त्योहारों में स्थानीय स्तर पर तैयार सामानों को ही पहली पसंद बनाएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने में अपना योगदान दें.
स्थानीय उत्पादों में दिखती है पहाड़ की संस्कृति और हुनर
सचिवालय में आयोजित इस उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने स्टालों पर सजे पारंपरिक पहाड़ी अनाजों, हस्तशिल्प, सजावटी सामानों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बारीकी से जानकारी ली. उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति द्वारा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जा रहे उत्पाद सिर्फ साधारण वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि यह हमारी समृद्ध संस्कृति, पुरानी परंपरा और महिलाओं की कड़ी मेहनत की सच्ची पहचान हैं. जब कोई नागरिक इन उत्पादों को खरीदता है, तो वह केवल एक वस्तु घर नहीं ले जाता, बल्कि पहाड़ की परंपरा और महिलाओं के पसीने का सम्मान करता है.
महिलाओं की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का आधार
मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज राज्य की आर्थिकी की रीढ़ बन रही हैं. उन्होंने कहा कि जब हम अपने आसपास तैयार किए गए सामानों की खरीदारी करते हैं, तो उसका सीधा लाभ सीधे उस ग्रामीण परिवार तक पहुंचता है. इससे महिला कारीगरों को आर्थिक संबल मिलता है और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है. महिलाओं का यह सशक्तिकरण ही पूरे परिवार और समाज को मजबूत बनाता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा छोटा सा प्रयास किसी महिला के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसे स्वावलंबी बना सकता है.
त्योहारों पर अपनों को दें स्थानीय उपहार
त्योहारी सीजन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय अपनी खुशियों को अपनों के साथ बांटने का होता है. ऐसे में अगर हम उपहार देने और घरों में उपयोग होने वाली वस्तुओं के लिए स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देंगे, तो इससे हमारे स्थानीय बाजारों में नई रौनक आएगी. उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस बार दीपावली और अन्य सभी पर्वों पर केवल स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए दीये, मोमबत्तियां, सजावटी सामान, पारंपरिक मिठाइयां और हस्तशिल्प ही खरीदें. उन्होंने कहा कि हर खरीदारी से राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और धन का प्रवाह अपने ही लोगों के बीच बना रहता है.
वोकल फॉर लोकल से बनेगा आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में वोकल फॉर लोकल अभियान ने एक नई क्रांति ला दी है. पहले जिन देसी और पारंपरिक उत्पादों की अनदेखी होती थी, आज पूरा देश और दुनिया उनकी गुणवत्ता को पहचान रही है. राज्य सरकार भी महिला समूहों, छोटे कारीगरों, बुनकरों और ग्रामीण उद्यमियों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है. सरकार का प्रयास है कि गांव-गांव में तैयार होने वाले बेहतरीन उत्पादों को बड़े शहरों और राष्ट्रीय स्तर के बाजारों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और उत्पादक को पूरा लाभ मिले.
जन-अभियान बनकर उभरे स्थानीय उत्पादों को अपनाने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने राज्य के हर वर्ग से अपील की कि वे न केवल खुद स्थानीय सामान खरीदें, बल्कि अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों और मित्रों को भी इसके लिए प्रेरित करें. उन्होंने कहा कि जब हर नागरिक अपने स्तर पर यह संकल्प लेगा, तभी यह अभियान सही मायनों में एक सफल जन-आंदोलन बनेगा. स्थानीय उत्पादों को अपनी दिनचर्या और त्योहारों में शामिल करने से ही आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड और आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरी तरह साकार होगा. इस अवसर पर सचिवालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी स्टालों से जमकर खरीदारी की और महिला समूहों का उत्साह बढ़ाया.
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