PEG Ratio कैसे शेयर की Valuation समझने में कैसे करता है मदद?
Share Market में नए निवेशकों को मुनाफा कमाने के लिए अच्छी जानकारी होनी चाहिए. अगर आप हाल ही में बाजार में आए हैं और यह जानना चाहते हैं कि किसी शेयर की कीमत सही है या ज्यादा है, तो आप कई तरह के वैल्यूएशन रेश्यो का इस्तेमाल कर सकते हैं. PEG Ratio (प्राइस/अर्निंग्स टू ग्रोथ रेश्यो) एक जरूरी पैमाना है जिससे यह पता चलता है कि शेयर की कीमत सही है या वह ओवरवैल्यूड (अपनी असल कीमत से ज्यादा महंगा) है. नीचे दी गई जानकारी बताती है कि PEG रेश्यो की मदद से आप किसी कंपनी के शेयरों की कीमत का सही अंदाजा कैसे लगा सकते हैं.
PEG Ratio क्या है?
PEG रेश्यो, कंपनी के P/E रेश्यो और कमाई में बढ़ोतरी (earnings growth) को एक साथ ध्यान में रखकर कंपनी के वैल्यूएशन का आकलन करने में मदद करता है. इसका फॉर्मूला है: PEG Ratio = P/E Ratio ÷ Expected Earnings Growth Rate है. आसान शब्दों में कहें तो यह यह तय करने में मदद करता है कि कंपनी की अनुमानित कमाई में बढ़ोतरी के मुकाबले कोई स्टॉक महंगा है या सस्ता. उदाहरण के लिए अगर किसी कंपनी का P/E रेश्यो 30 है और कमाई में बढ़ोतरी का अनुमान 15% है, तो: PEG रेश्यो = 30 ÷ 15 = 2.
PEG Ratio को कैसे समझें?
PEG < 1: स्टॉक की कीमत कम हो सकती है, इसकी ग्रोथ के हिसाब से इसे सस्ता माना जा सकता है.
PEG = 1: वैल्यूएशन और कमाई की ग्रोथ के बीच संतुलन हो सकता है.
PEG > 1: स्टॉक की ग्रोथ के हिसाब से इसकी कीमत ज्यादा हो सकती है.
हालांकि, इन्हें केवल सामान्य संकेतकों के तौर पर देखा जाना चाहिए. PEG रेश्यो का सही मतलब उस खास कंपनी, सेक्टर और इस्तेमाल किए गए ग्रोथ अनुमान पर निर्भर करता है.
P/E Ratio और PEG Ratio में क्या अंतर है?
आइए सबसे पहले एक उदाहरण से P/E रेश्यो और PEG रेश्यो के बीच का अंतर समझते हैं. हो सकता है कि दो कंपनियों का P/E रेश्यो एक जैसा यानी 30 हो. लेकिन, अगर पहली कंपनी की कमाई में 10% की ग्रोथ हो और दूसरी की 30% हो, तो सिर्फ P/E रेश्यो के आधार पर उनके वैल्यूएशन को एक जैसा मानना गलत होगा. ऐसे मामलों में, PEG रेश्यो एनालिसिस में ग्रोथ को भी शामिल करता है, जिससे कीमत का ज्यादा सही अंदाजा लगाया जा सकता है.
PEG Ratio क्यों जरूरी है?
ग्रोथ स्टॉक्स का एनालिसिस करते समय PEG रेश्यो खास तौर पर काम का हो सकता है. यह इन्वेस्टर्स को यह तय करने में मदद करता है कि क्या किसी कंपनी का हाई P/E रेश्यो उसकी तेजी से बढ़ती कमाई के हिसाब से सही है. अगर ग्रोथ का अनुमान और कैलकुलेशन के तरीके एक जैसे हों, तो यह रेश्यो एक ही सेक्टर की कंपनियों की तुलना करने के लिए भी बहुत काम का होता है.
PEG Ratio की सीमाएं क्या हैं?
PEG रेश्यो की बात करें तो यह पूरी तरह से भविष्य में होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के अनुमानों पर निर्भर करता है. अगर बढ़ोतरी का अनुमान गलत साबित होता है, तो PEG रेश्यो गुमराह करने वाला हो सकता है. इसलिए, अगर आप शेयर बाजार में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको अपना फैसला सिर्फ PEG रेश्यो के आधार पर नहीं लेना चाहिए बल्कि, आपको अलग-अलग वेबसाइट या एनालिस्ट से सलाह लेने और बढ़ोतरी की गणना करने के अलग-अलग तरीकों पर विचार करने के बाद ही निवेश करना चाहिए.
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार; 7 पर्वतीय सुरंगों में से 3 का निर्माण पूरा, 74 किलोमीटर क्षेत्र में पियर तैयार: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब तेजी से आकार ले रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को महाराष्ट्र के ठाणे और पालघर जिलों में चल रहे निर्माण कार्यों की एक झलक साझा करते हुए बताया कि देश की महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर तेज गति से कार्य जारी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो संदेश के माध्यम से केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह निर्माण कार्य ठाणे जिले के शिलफाटा से लेकर महाराष्ट्र-गुजरात सीमा पर स्थित जरोली गांव तक फैले 135.45 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का हिस्सा है।
यह सेक्शन बुलेट ट्रेन परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विविध भौगोलिक परिस्थितियों और प्राकृतिक क्षेत्रों को जोड़ते हुए भारत के पहले हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को मजबूती प्रदान करेगा। परियोजना के तहत कुल 124.027 किलोमीटर लंबे वायाडक्ट और पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे ट्रेन का संचालन निर्बाध और उच्च गति से संभव हो सकेगा।
परियोजना के तहत महाराष्ट्र में ठाणे, विरार और बोइसर में तीन आधुनिक एलिवेटेड बुलेट ट्रेन स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें ठाणे स्टेशन को विशेष पर्यावरणीय दृष्टिकोण के साथ डिजाइन किया गया है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, ठाणे स्टेशन का कॉनकोर्स स्तर प्राकृतिक भूमि स्तर से लगभग 12 मीटर ऊपर बनाया जा रहा है ताकि क्षेत्र के संवेदनशील मैंग्रोव वन सुरक्षित रह सकें और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परियोजना के निर्माण कार्य में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 100 किलोमीटर से अधिक लंबाई में पियर (पिलर) निर्माण का काम जारी है और लगभग 74 किलोमीटर क्षेत्र में पियर तैयार हो चुके हैं, जहां अब वायाडक्ट गर्डर स्थापित किए जा रहे हैं।
निर्माण कार्य को गति देने के लिए महाराष्ट्र में 9 कास्टिंग यार्ड, 7 फुल-स्पैन लॉन्चिंग गैंट्री और 8 स्पैन-बाय-स्पैन लॉन्चिंग गैंट्री सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के उपयोग से परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
बुलेट ट्रेन मार्ग में कुल 7 पर्वतीय सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिनमें से 3 सुरंगों में ब्रेकथ्रू (दोनों सिरों को जोड़ने का कार्य) पूरा हो चुका है।
इन सुरंगों में अब ड्रेनेज, वॉटरप्रूफिंग और टनल लाइनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
सरकार के अनुसार, यह परियोजना भारतीय रेलवे इतिहास की सबसे जटिल और उन्नत इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक है।
इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में कई महत्वपूर्ण नदी पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है, जिनमें उल्हास नदी पर 460 मीटर, वैतरणा नदी पर 2.32 किलोमीटर और जगानी नदी पर 510 मीटर लंबा पुल शामिल है।
इसके अलावा, परियोजना में कुल 36 पुल और क्रॉसिंग बनाई जा रही हैं, जिनमें 12 स्टील ब्रिज भी शामिल हैं, जो प्रमुख रेलवे लाइनों, उल्हास नदी, मुंबई-नासिक हाईवे और अन्य महत्वपूर्ण मार्गों को पार करेंगे।
रेल मंत्रालय के अनुसार, ठाणे और पालघर में चल रहा निर्माण कार्य भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की विशालता और इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आधुनिक भारत के विजन तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में देश में अगली पीढ़ी के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार हो रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के पूरा होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होगा, जहां अत्याधुनिक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क उपलब्ध होगा। यह परियोजना न केवल यात्रा समय को कम करेगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों, निवेश और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति प्रदान करेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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