बांग्लादेश: खारे पानी से बढ़ रहा दिल की बीमारी का खतरा, अध्ययन में खुलासा
ढाका, 25 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौती का सामना कर रहा है। मूसलाधार बारिश और बाढ़ से समुद्री जल रिहायशी इलाकों में घुस जाता है। फिर मजबूरी में देश के तटीय इलाकों में लोगों को खारा पानी पीना पड़ता है। ये पानी लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि पानी में सोडियम की अधिक मात्रा महिलाओं में रक्तचाप बढ़ा रही है, जिससे आगे चलकर हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
2023 से 2025 के बीच बांग्लादेश के तटीय इलाकों में की गई एक स्टडी में ये तथ्य सामने आए। ये नतीजे ढाका के मोहाखाली में आईसीडीडीआर,बी (अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी, बांग्लादेश) के सासाकावा ऑडिटोरियम में आयोजित एक हाई-लेवल पॉलिसी सेमिनार में पेश किए गए।
इम्पीरियल कॉलेज लंदन से जुड़े शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में तटीय बांग्लादेश की 740 महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि घरेलू पीने के पानी में सोडियम की औसत मात्रा ट्यूबवेल और भूजल इस्तेमाल करने वाले परिवारों में 933 मिलीग्राम प्रति लीटर थी। करीब 22 प्रतिशत महिलाएं ऐसा पानी पी रही थीं, जिससे प्रतिदिन दो लीटर पानी पीने की स्थिति में विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसित अधिकतम दैनिक सोडियम मात्रा का 94 प्रतिशत तक हिस्सा केवल पानी से मिल सकता था।
अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि जिन महिलाओं के पीने के पानी में सोडियम की मात्रा 1,000 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक थी, उनमें 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम सोडियम वाला पानी पीने वाली महिलाओं की तुलना में डायस्टोलिक यानी निचले रक्तचाप के बढ़ने की संभावना 2.3 गुना अधिक थी। हालांकि, सिस्टोलिक यानी ऊपरी रक्तचाप के साथ सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।
बांग्लादेश की समाचार एजेंसी यूएनबी ने सेमिनार में कही बातों का हवाला देते हुए कहा कि, यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। 2023 से 2025 के बीच किए गए एक अन्य आकलन में 27,697 जल स्रोतों का सर्वेक्षण किया गया। इनमें 6,703 स्रोत पीने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे। खोंइरा उपजिला में पीने के पानी के 55.3 प्रतिशत स्रोत और असासुनी में 23.3 प्रतिशत स्रोत खारे पाए गए।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक समुद्र के बढ़ते जलस्तर, चक्रवात, तूफानी लहरों और बाढ़ के कारण खारा पानी भूजल और सतही जल स्रोतों में प्रवेश कर रहा है। इससे सुरक्षित और कम-सोडियम वाले पेयजल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी लंबे समय से बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में लवणता को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में रेखांकित करता रहा है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण समस्या और गंभीर हो सकती है। यही वजह है कि तटीय क्षेत्रों में पानी की लवणता की नियमित निगरानी, कम-सोडियम वाले पेयजल स्रोतों का विस्तार, वर्षाजल संचयन और जल शोधन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि सुरक्षित पानी की नीति को केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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Cyclone Narra Alert: तेजी से बढ़ रहा चक्रवाती तूफान 'नारा' का खतरा, जानें किन इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट
Cyclone Narra Alert: देशभर में मानसून अपने शबाब पर है. वहीं विदेशों में कई जगहों पर जबरदस्त बारिश और बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं. इन सबके बीच एक चक्रवाती तूफान का खतरा मंडरा रहा है. जी हां दक्षिण-पूर्व एशिया में इस समय मौसम का खतरनाक सिस्टम सक्रिय है. ट्रॉपिकल स्टॉर्म ‘नारा’ टोंकिन की खाड़ी में बना हुआ है और इसके साथ मजबूत दक्षिण-पश्चिमी मानसून भी सक्रिय है. दोनों प्रणालियों के प्रभाव से वियतनाम, लाओस, थाईलैंड और आसपास के इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.
थाई मौसम विभाग के अनुसार, नारा का सीधा असर थाईलैंड पर पड़ने की उम्मीद नहीं है, लेकिन मजबूत मानसून के कारण वहां भी कई क्षेत्रों में भारी बारिश और अचानक बाढ़ का जोखिम बना हुआ है.
टोंकिन की खाड़ी में नारा का जोर
तूफान नारा इस समय टोंकिन की खाड़ी में सक्रिय है. 24 अगस्त को इसके केंद्र के आसपास हवाओं की रफ्तार तेज बनी हुई थी और वियतनाम के उत्तरी हिस्सों में भारी बारिश का खतरा बढ़ा हुआ था. वहीं अब इसके आगे बढ़ने और वियतनाम में इसे तूफान संख्या 4 के तौर पर भी वर्गीकृत किया गया है, जहां इसके आसपास हवा के झोंके 11वें स्तर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है.
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह सिस्टम धीरे-धीरे उत्तर-पूर्व की दिशा में बढ़ते हुए दक्षिणी चीन की ओर जा सकता है. चीन के मौसम विभाग ने भी इसके प्रभाव को देखते हुए दक्षिणी क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया था.
मानसून ने बढ़ाई मुश्किल
नारा अकेला खतरा नहीं है. इसके साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून भी काफी सक्रिय है. टोंकिन की खाड़ी तक फैली मानसूनी गतिविधि के कारण समुद्र से बड़ी मात्रा में नमी दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों तक पहुंच रही है.
जब उष्णकटिबंधीय तूफान और मजबूत मानसूनी हवाएं एक साथ सक्रिय होती हैं तो कम समय में बेहद ज्यादा बारिश हो सकती है. यही वजह है कि निचले इलाकों, नदी किनारे बसे क्षेत्रों और पहाड़ी ढलानों पर अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है.
लाओस में पहले से बिगड़े हालात
भारी बारिश और बाढ़ से लाओस के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, देश के कई प्रांतों में हजारों परिवारों पर मौसम की मार पड़ी है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की जरूरत सामने आई है.
ऐसे इलाकों में लगातार बारिश का नया दौर स्थिति को और मुश्किल बना सकता है. पहले से जलमग्न क्षेत्रों में अतिरिक्त बारिश होने पर नदियों और छोटी जलधाराओं का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है.
वियतनाम में भूस्खलन का खतरा
वियतनाम के उत्तरी हिस्सों में भी नारा के कारण भारी बारिश और तेज हवाओं का असर दिखाई दे रहा है. कई स्थानों पर जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ा है. पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने के कारण मिट्टी कमजोर पड़ने से सड़कें बाधित हो सकती हैं.
स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. समुद्री गतिविधियों पर भी मौसम के अनुसार प्रतिबंध लगाए गए हैं.
चीन की ओर बढ़ रहा तूफान
नारा के आगे बढ़ने की दिशा दक्षिणी चीन की ओर बताई जा रही है. मौसम पूर्वानुमानों में इसके गुआंगशी क्षेत्र की ओर पहुंचने की संभावना जताई गई थी. चीन ने भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया है.
रिपोर्टों के मुताबिक, गुआंगशी में बाढ़ के कारण करीब 54 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. कई इलाकों में सड़कों पर पानी भरने और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं.
थाईलैंड में भी भारी बारिश का अलर्ट
हालांकि नारा के थाईलैंड में सीधे प्रवेश करने की उम्मीद नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी मानसूनी गतिविधि के कारण देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी है. थाई मौसम विभाग ने 24 अगस्त को 17 प्रांतों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई थी.
निचले इलाकों और नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को अचानक बाढ़ और जलस्तर बढ़ने को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है. समुद्र में भी स्थिति सामान्य नहीं है. ऊपरी अंडमान सागर में लहरें 2 से 3 मीटर तक पहुंच सकती हैं और तूफानी मौसम में इससे ज्यादा ऊंची लहरों की आशंका है.
अगले कुछ दिन क्यों महत्वपूर्ण?
इस पूरे मौसम सिस्टम में सबसे बड़ी चिंता लगातार बारिश है. यदि जमीन पहले से संतृप्त है और फिर कम समय में भारी बारिश होती है, तो पानी तेजी से नदियों और नालों में पहुंचता है. इससे फ्लैश फ्लड, नदी के उफान और पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में प्रशासन लगातार मौसम की निगरानी कर रहा है.
राहत और बचाव पर बढ़ा दबाव
प्रभावित देशों में प्रशासन, बचाव दल और स्थानीय एजेंसियां संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, जरूरी सामान उपलब्ध कराना और सड़क एवं बिजली जैसी सुविधाओं को बहाल करना बड़ी चुनौती बन सकता है.
नारा के कमजोर पड़ने के बाद भी उसका बचा हुआ मौसम तंत्र कुछ समय तक भारी बारिश करा सकता है. इसलिए तूफान के कमजोर होने को खतरे के तत्काल खत्म होने के रूप में नहीं देखा जा सकता.
भारत के लिए क्या मतलब?
नारा का सीधा प्रभाव भारत पर नहीं बताया जा रहा है, लेकिन यह घटनाक्रम एशिया के मानसूनी मौसम की जटिलता को जरूर दिखाता है. बंगाल की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सक्रिय मानसूनी प्रणाली दूर-दराज के देशों के मौसम को भी प्रभावित कर सकती है.
फिलहाल सबसे ज्यादा नजर वियतनाम, दक्षिणी चीन और आसपास के इलाकों पर है. तूफान की दिशा, उसकी रफ्तार और मानसून की ताकत अगले कुछ दिनों में तय करेगी कि नारा का असर कितना व्यापक होता है.
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