दिल्ली के स्कूलों में स्वाइन फ्लू को लेकर हाई अलर्ट, शिक्षा निदेशालय ने जारी की सख्त एडवाइजरी
Delhi Swine Flu Advisory: दिल्ली में बदलते मौसम के साथ मौसमी इन्फ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामलों में तेजी देखी जा रही है. इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने राजधानी के सभी स्कूलों के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए हैं. प्रशासन का मुख्य मकसद स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को संक्रमण की चपेट में आने से बचाना और परिसरों में स्वच्छता का माहौल तैयार करना है. बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी एक महत्वपूर्ण आपात बैठक बुलाई, जिसमें स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.
स्कूलों में सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी सर्कुलर दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा. सर्कुलर में स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां श्वसन स्वच्छता और बुनियादी स्वास्थ्य नियमों को कड़ाई से लागू करें. स्कूल परिसरों में लगातार सफाई अभियान चलाया जाए, जिससे बच्चों को किसी भी तरह के संक्रमण से दूर रखा जा सके. कक्षाओं के अंदर ताजी हवा के आने जाने के लिए वेंटिलेशन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके अलावा, स्कूल के उन सभी स्थानों और वस्तुओं की नियमित रूप से सफाई करने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें बच्चे या शिक्षक बार बार छूते हैं. सार्वजनिक स्थानों और स्कूल परिसर में थूकने पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए बच्चों को जागरूक करने की बात कही गई है.
लक्षण दिखने पर तुरंत सतर्क होने की सलाह
एडवाइजरी में इन्फ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू से जुड़े प्रमुख लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. इसमें बताया गया है कि गले में लगातार खराश, सूखी या बलगम वाली खांसी, सांस लेने में तकलीफ, पूरे शरीर में दर्द, तेज सिरदर्द, अत्यधिक थकान, ठंड लगना और तेज बुखार इस बीमारी के प्रमुख संकेत हो सकते हैं. यदि किसी छात्र या स्कूल कर्मचारी में इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेने की सलाह दी गई है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर ही लक्षणों की पहचान हो जाने से बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है. शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि बच्चा अस्वस्थ महसूस कर रहा हो, तो उसे स्कूल भेजने के बजाय घर पर पूरा आराम करने दें.
स्वस्थ आदतें और व्यक्तिगत बचाव के तरीके
निदेशालय ने छात्रों और शिक्षकों को अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ सरल लेकिन असरदार आदतों को शामिल करने को कहा है. बच्चों को समझाया जा रहा है कि खांसते या छींकते समय हमेशा अपने मुंह और नाक को रुमाल या टिश्यू पेपर से ढकें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत ढक्कन वाले कूड़ेदान में फेंकना जरूरी है. खाना खाने से पहले और छींकने या खांसने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके साथ ही, बच्चों को अपनी आंख, नाक और मुंह को बार बार बिना धुले हाथों से छूने से बचने की हिदायत दी गई है. जरूरत पड़ने पर बच्चों और कर्मचारियों को मास्क पहनने की छूट दी गई है. सबसे जरूरी बात यह कही गई है कि बिना किसी योग्य डॉक्टर की सलाह के कोई भी एंटीबायोटिक या अन्य दवा खुद से न लें.
जागरूकता अभियान और प्रशासनिक निगरानी
स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे सुबह की प्रार्थना सभा, कक्षाओं में शिक्षकों के संवाद, स्कूल के नोटिस बोर्ड और अभिभावकों के साथ होने वाली बैठकों के माध्यम से इस विषय पर लगातार चर्चा करें. इसके अलावा स्कूल अपने डिजिटल मंचों और मैसेजिंग ग्रुप के जरिए भी अभिभावकों तक बचाव से जुड़ी जानकारियां पहुंचाएं. बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, पौष्टिक भोजन करने और पूरी नींद लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे.
नियमों के जमीनी स्तर पर पालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों और जोन के उप शिक्षा निदेशकों को कड़ी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. सभी अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र के स्कूलों का निरीक्षण करने और पूरी रिपोर्ट तैयार करके 31 अगस्त 2026 तक शिक्षा निदेशालय की हेल्थ स्कूल ब्रांच को सौंपने का स्पष्ट आदेश दिया गया है.
Explainer: इंजरी के बाद भी कैसे क्रिकेट मैच में हिस्सा ले पाते हैं खिलाड़ी? जानिए किस चीज से मिलती है खेलने की ताकत
Cricketers Injuries : क्रिकेट का गेम कापी रोमांचक होता है. इस चाकाचौंद से भरे खेल में फैंस को काफी मजा आता है. क्रिकेटर जब मैदान पर छक्के-चौकों की बरसात करते हैं, तो फैंस को झूमने का मौका मिलता है. वहीं गेंदबाज जब विकेट चटकाकर स्टंप से गिल्लियां बिखेरते हैं तो फैंस को खुश होने का मौका मिलता है. क्रिकेट मैच में 2 टीमों के कुल 22 खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाते हैं और फैंस का खेल के द्वारा मनोरंजन करते हैं.
क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ी जब अपनी टीम को बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर जीत दिलाते हैं तो फैंस उनकी जमकर तारीफ करते हैं और उनके लिए सोशल मीडिया पर भी अच्छा-अच्छा लिखते हैं. वहीं कुछ फैंस कभी-कभी खिलाड़ियों को उनके निराशाजनक प्रदर्शन पर जमकर खरी-खोटी भी सुनाते हैं. लेकिन उन्हें नहीं पता होता है कि, वो क्रिकेटर्स किस हालात में मैदान पर खेल रहे हैं.
क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ी कभी-कभी चोट के साथ भी खेलते हैं. क्रिकेट प्लेयर इंजरी के बाद भी मैदान पर अपनी टीम को जीत दिलाने और अपने देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उतरते हैं. इस दौरान वो खिलाड़ी काफी दर्ज में होते हैं. उनकी पीढ़ा का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. लेकिन इस सबके बीच सवाल उठता है कि, आखिर इंजरी के बाद भी खिलाड़ी कैसे क्रिकेट मैच में हिस्सा ले पाते हैं. किस चीज उन्हें मैच खेलने की ताकत मिलती है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
Get well soon, Rishabh Pant ???????????? pic.twitter.com/DKViQyR4Vq
— Johns. (@CricCrazyJohns) August 25, 2026
चोट के बाद भी क्रिकेट खेलते हैं खिलाड़ी?
क्रिकेट प्लेयर्स में अपने देश के प्रति खेलने का जोश और जूनन होता है. इसके बाद ही वो खिलाड़ी इंजरी के बाद भी खेल पाते हैं. ऐसा ही कुछ भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने किया था. उन्होंने जब 2023 वनडे वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था, तब वो चोटिल थे लेकिन उन्होंने भारत के प्रति अपना कर्तव्य समझा और इंजरी के साथ वर्ल्ड कप खेला. वो उस टूर्नामेंट में 7 मैचों में 24 विकेट हासिल किए. इस दौरान शमी ने 7 विकेट सेमीफाइनल मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ चटकाए थे. इसके बाद शमी में अपनी इंजरी पर काम किया और उनकी एडी की सर्जरी हुई थी.
Mohammed Shami off the field due to injury. Hope it’s not serious or it’s over for us. pic.twitter.com/VcLaSZ2Kae
— R A T N I S H (@LoyalSachinFan) February 23, 2025
इस बात से साफ होता है कि, खिलाड़ी इंजरी के साथ भी क्रिकेट खेल सकते हैं. लेकिन इंजरी के बाद क्रिकेटर का मैच खेल पाना इस बात पर निर्भर करता है कि, चोट कितनी गंभीर है और शरीर का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है. हर चोट के बाद खिलाड़ी को मैदान पर उतरने की अनुमति नहीं मिलती. कुछ खास मौकों पर ही उन्हें चोट के साथ खेलने के लिए अनुमति मिल जाती है.
चोट के बाद कैसे खेल पाते हैं खिलाड़ी?
मेडिकल जांच : इंजरी के बाद मैच खेलने के लिए सबसे पहले खिलाड़ी की जांच होती है. उसके बाद उनकी चोट की गंभीर देखी जाती है. अगर वो चोट के साथ मैच खेल सकता है, तो उसे खेलने की अनुमति दी जाती है. टीम के डॉक्टर और फिजियो चोट का आकलन करते हैं और तय करते हैं कि खिलाड़ी खेल सकता है या नहीं.
फिजियोथेरेपी और रिहैब : चोट के अनुसार स्ट्रेचिंग, एक्सरसाइज और रिहैब से शरीर को दोबारा खेलने के लिए तैयार किया जाता है. खिलाड़ी को मैच खेलने से पहले या मैच के बाद चोल लगी है और उसे मैच से कुछ घंटों पहले ठीक किया जा सकता है तो उसे मैच खेलने की अनुमति मिल जाता है. मैच के दौरान चोटिल होने के बाद भी खिलाड़ी टेस्ट मैचों में अगले दिन या वनडे और टी20 मैचों में कुछ घंटो बाद खेलने के लिए ठीक होकर आ सकता है. ऐसा ऋषभ पंत और इंग्लैंड के क्रिस वोक्स के साथ भी हुआ था. पंत पैर में चोट के बाद खेलने आए वहीं वोक्स हाथ में चोट के बाद एक हाथ से खेलने के लिए आए.
A further assessment will take place at the end of the series ???? pic.twitter.com/9mzGbV5WSL
— England Cricket (@englandcricket) August 1, 2025
टेपिंग और सपोर्ट : खिलाड़ियों को इंजरी के बाद मैच खेलने के लिए कभी कभी टेपिंग और सपोर्ट का सहारा भी लेना पड़ जाता है. कुछ चोटों में प्रभावित हिस्से को टेप, बैंडेज या दूसरे सपोर्ट से स्थिर किया जाता है, जिससे खिलाड़ी को खेलने में मदद मिल सकती है.
दर्द और सूजन का प्रबंधन (दवा और इंजेक्शन) : खिलाड़ियों की चोट अगर ज्यादा है, और उन्हें दर्द हो रहा है तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर की निगरानी में उपचार के जरिए दर्द और सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है. इस दौरान उन्हें दवाइयां दी जा सकती है. वहीं कभी-कभी खिलाड़ी इंजेक्शन लेकर भी खेलते हैं. ये इंजेक्शन दर्द कम करने और उस एरिए को शून्न कर देता है, जहां पर चोट लगी है, जिससे कुछ समय के लिए वहां की चोट का पता नहीं चलता है लेकिन लंबे समय में इसका बड़ा नुकसान होने का खतरा होता है.
फिटनेस टेस्ट : इंजरी के बाद भी मैच खेलने से पहले खिलाड़ी को फिटनेस टेस्ट भी कभी-कभी देना पड़ता है. खिलाड़ी को दौड़ने, बल्लेबाजी, गेंदबाजी या फील्डिंग जैसी गतिविधियां करके अपनी क्षमता साबित करना पड़ जाता है. इसके साथ ही खिलाड़ी को चोट के बाद भी मानसिक मजबूत दिखानी पड़ती है.
Most 'Injury-Prone'(Najuk) Indian Cricketers:
— Musharaf ⁴⁵ (@HussainMus73296) June 13, 2026
1. Hardik Pandya
2. Jasprit Bumrah
3. KL Rahul
4. Deepak Chahar
5. Shreyas Iyer
6. Bhuvneshwar Kumar. pic.twitter.com/qfFgfffXFF
खिलाड़ी को किस चीज से मिलती है खेलने की ताकत?
इंजरी के बाद भी खिलाड़ियों को खेलने की ताकत आमतौर पर मेडिकल ट्रीटमेंट, फिजियोथेरेपी, रिहैबिलिटेशन, फिटनेस, सही पोषण और दर्द/सूजन के लिए दी जाने वाली दवाईयों और इंजेक्शन से मिलती है. अगर चोट के बावजूद खिलाड़ी मैच खेल रहा है, तो उस स्थिति उसे खलने के लिए तैयार करने कि लिए दवाईयां दी जाती है. कभी कभी खिलाड़ी दर्द कम महसूस होने के लिए दर्द निवारक इंजेक्शन लेते हैं.
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