IND vs SL: कोलंबो टेस्ट के तीसरे दिन का खेल खत्म, भारत का दिखा दबदबा, श्रीलंका भी लड़ रही फॉलोऑन बचाने की लड़ाई
IND vs SL: भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट मैच कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेला जा रहा है. मैच के तीसरे दिन का खेल खत्म हो गया है. भारत की पहली पारी के 503/9 रनों के जवाब में श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में 8 विकेट पर 265 रन बना लिए हैं. श्रीलंका की टीम अभी भी 238 रन पीछे है, वहीं उसे फॉलोऑन बचाने के लिए अभी भी 38 रनों की जरूरत है. अब मैच के चौथे दिन अगर श्रीलंका की टीम फॉलोऑन बचाने में कामयाब नहीं हुई, तो भारतीय टीम को (फॉलोऑन देकर) दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
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दिल्ली के स्कूलों में स्वाइन फ्लू को लेकर हाई अलर्ट, शिक्षा निदेशालय ने जारी की सख्त एडवाइजरी
Delhi Swine Flu Advisory: दिल्ली में बदलते मौसम के साथ मौसमी इन्फ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामलों में तेजी देखी जा रही है. इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने राजधानी के सभी स्कूलों के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए हैं. प्रशासन का मुख्य मकसद स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को संक्रमण की चपेट में आने से बचाना और परिसरों में स्वच्छता का माहौल तैयार करना है. बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी एक महत्वपूर्ण आपात बैठक बुलाई, जिसमें स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.
स्कूलों में सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी सर्कुलर दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा. सर्कुलर में स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां श्वसन स्वच्छता और बुनियादी स्वास्थ्य नियमों को कड़ाई से लागू करें. स्कूल परिसरों में लगातार सफाई अभियान चलाया जाए, जिससे बच्चों को किसी भी तरह के संक्रमण से दूर रखा जा सके. कक्षाओं के अंदर ताजी हवा के आने जाने के लिए वेंटिलेशन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके अलावा, स्कूल के उन सभी स्थानों और वस्तुओं की नियमित रूप से सफाई करने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें बच्चे या शिक्षक बार बार छूते हैं. सार्वजनिक स्थानों और स्कूल परिसर में थूकने पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए बच्चों को जागरूक करने की बात कही गई है.
लक्षण दिखने पर तुरंत सतर्क होने की सलाह
एडवाइजरी में इन्फ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू से जुड़े प्रमुख लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. इसमें बताया गया है कि गले में लगातार खराश, सूखी या बलगम वाली खांसी, सांस लेने में तकलीफ, पूरे शरीर में दर्द, तेज सिरदर्द, अत्यधिक थकान, ठंड लगना और तेज बुखार इस बीमारी के प्रमुख संकेत हो सकते हैं. यदि किसी छात्र या स्कूल कर्मचारी में इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेने की सलाह दी गई है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर ही लक्षणों की पहचान हो जाने से बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है. शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि बच्चा अस्वस्थ महसूस कर रहा हो, तो उसे स्कूल भेजने के बजाय घर पर पूरा आराम करने दें.
स्वस्थ आदतें और व्यक्तिगत बचाव के तरीके
निदेशालय ने छात्रों और शिक्षकों को अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ सरल लेकिन असरदार आदतों को शामिल करने को कहा है. बच्चों को समझाया जा रहा है कि खांसते या छींकते समय हमेशा अपने मुंह और नाक को रुमाल या टिश्यू पेपर से ढकें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत ढक्कन वाले कूड़ेदान में फेंकना जरूरी है. खाना खाने से पहले और छींकने या खांसने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके साथ ही, बच्चों को अपनी आंख, नाक और मुंह को बार बार बिना धुले हाथों से छूने से बचने की हिदायत दी गई है. जरूरत पड़ने पर बच्चों और कर्मचारियों को मास्क पहनने की छूट दी गई है. सबसे जरूरी बात यह कही गई है कि बिना किसी योग्य डॉक्टर की सलाह के कोई भी एंटीबायोटिक या अन्य दवा खुद से न लें.
जागरूकता अभियान और प्रशासनिक निगरानी
स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे सुबह की प्रार्थना सभा, कक्षाओं में शिक्षकों के संवाद, स्कूल के नोटिस बोर्ड और अभिभावकों के साथ होने वाली बैठकों के माध्यम से इस विषय पर लगातार चर्चा करें. इसके अलावा स्कूल अपने डिजिटल मंचों और मैसेजिंग ग्रुप के जरिए भी अभिभावकों तक बचाव से जुड़ी जानकारियां पहुंचाएं. बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, पौष्टिक भोजन करने और पूरी नींद लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे.
नियमों के जमीनी स्तर पर पालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों और जोन के उप शिक्षा निदेशकों को कड़ी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. सभी अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र के स्कूलों का निरीक्षण करने और पूरी रिपोर्ट तैयार करके 31 अगस्त 2026 तक शिक्षा निदेशालय की हेल्थ स्कूल ब्रांच को सौंपने का स्पष्ट आदेश दिया गया है.
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