उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियां भारत को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में देख रही हैं: कामी विश्वनाथन
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। वैश्विक लॉजिस्टिक्स कंपनी फेडएक्स ने भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक एकीकृत एयर कार्गो हब विकसित करने की घोषणा की है। कंपनी ने इस परियोजना के लिए लगभग 150 मिलियन डॉलर (करीब 1,250 करोड़ रुपए) के निवेश का ऐलान किया है। यह नया हब दिल्ली एयरपोर्ट के जीएमआर कार्गो सिटी में विकसित किया जाएगा और इसके जरिए भारत के उत्तरी एवं पूर्वी क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक माल की आवाजाही को अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बनाया जाएगा।
इस दौरान, न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए फेडएक्स की भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य पूर्व और अफ्रीका की अध्यक्ष कामी विश्वनाथन ने कहा कि कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट स्थित जीएमआर कार्गो सिटी में एक नया एकीकृत एयर हब विकसित कर रही है, जिसके लिए 115 मिलियन डॉलर का दीर्घकालिक निवेश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, यह हब भारत के उत्तरी और पूर्वी बाजारों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का काम करेगा। इससे हमारी इंटरनेशनल गेटवे सेवाएं और पिकअप-एंड-डिलीवरी ऑपरेशंस एक ही स्थान पर संचालित किए जा सकेंगे, जिससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी और क्षमता में भी इजाफा होगा।
उन्होंने आगे बताया कि इस हब में अत्याधुनिक ऑटोमेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसमें ऑटोमेटेड सॉर्टेशन सिस्टम और हाई-स्पीड एक्स-रे स्क्रीनिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे भारत से विदेशों और विदेशों से भारत आने वाले शिपमेंट की प्रोसेसिंग पहले से कहीं ज्यादा तेज और प्रभावी हो जाएगी।
कामी विश्वनाथन ने आईएएनएस से आगे कहा कि फेडएक्स भारत के व्यापारिक भविष्य को लेकर बेहद आशावादी है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में कंपनी ने भारत से अमेरिका और यूरोप के लिए अतिरिक्त क्षमता निर्माण, एशिया से भारत आने वाले व्यापारिक मार्गों को मजबूत करने तथा बेंगलुरु, नवी मुंबई और अब दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े निवेश किए हैं।
उन्होंने कहा, भारत वैश्विक व्यापार में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियां भारत को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में देख रही हैं। ऐसे में यह नया हब निर्यात वृद्धि को समर्थन देगा।
विश्वनाथन ने बताया कि फेडएक्स छोटे और मझोले निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए अपनी विशेषज्ञता और वैश्विक नेटवर्क का लाभ उपलब्ध करा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
कंपनी के अनुसार, लगभग 2.30 लाख वर्ग फुट में फैला यह नया एयर कार्गो हब पूरी तरह स्वचालित होगा। इसके संचालन शुरू होने के बाद पैकेज प्रोसेसिंग क्षमता वर्तमान 600 पैकेज प्रति घंटे से बढ़कर 5,000 पैकेज प्रति घंटे तक पहुंच जाएगी।
फेडएक्स ने बताया कि भविष्य में बढ़ती मांग को देखते हुए इसमें और विस्तार की भी पर्याप्त संभावना होगी। हब में नवीनतम पीढ़ी की एक्स-रे मशीनें, उन्नत सुरक्षा प्रणाली, इंटेलिजेंट पैकेज हैंडलिंग तकनीक और आधुनिक ऑटो-सॉर्टर लगाए जाएंगे।
कंपनी का मानना है कि इन सुविधाओं से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा, शिपमेंट प्रोसेसिंग में तेजी आएगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
फेडएक्स भारत सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) कार्यक्रम के साथ भी काम कर रहा है। कंपनी के अनुसार, यह पहल देश के लगभग 750 जिलों में 200 से अधिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रही है।
प्रस्तावित फेडएक्स हब जीएमआर कार्गो सिटी का हिस्सा होगा, जो दिल्ली एयरपोर्ट पर विकसित किया जा रहा एक एकीकृत कार्गो और लॉजिस्टिक्स केंद्र है। यह परियोजना लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें कुल 15 से 20 लाख वर्ग फुट विकास की क्षमता मौजूद है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
7 साल में 17वीं बार जेल से बाहर राम रहीम... एक दोषी को कितनी बार मिल सकती है पैरोल और क्या हैं नियम?
Gurmeet Ram Rahim: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। उसे 21 दिन की पैरोल मंजूर हुई है. मंगलवार सुबह करीब 6:05 बजे वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला और सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम के लिए रवाना हो गया. पैरोल की अवधि वह सिरसा आश्रम में बिताएगा. इस बार पैरोल मिलने के साथ ही राम रहीम के जेल से बाहर आने की संख्या 17 हो गई है. साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी उसे दोषी ठहराया गया था. हालांकि, बाद में एक पूर्व डेरा प्रबंधक और पत्रकार की हत्या से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया था.
बार-बार पैरोल पर उठते रहे हैं सवाल
राम रहीम को पहले भी कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है. उसके लगातार जेल से बाहर आने को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं. इस बार भी उसके सिरसा आश्रम पहुंचने के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने की संभावना जताई जा रही है. प्रशासन की ओर से पैरोल की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी रखी जाएगी. होशियारपुर से विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा ने राम रहीम को मिली पैरोल पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बार-बार पैरोल दिया जाना उचित नहीं है. विधायक ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से कुछ लोगों को पैरोल और फरलो का लाभ दिया जाता है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी ऐसे मामलों का संज्ञान लेने की मांग की.
ये भी पढ़ें: अनूप जलोटा ने आधी उम्र की हसीना को किया डेट? बिग बॉस में आए साथ नजर, अब बताया चौथी करेंगे या नहीं
कब-कब जेल से बाहर आया राम रहीम?
राम रहीम को पिछले कुछ वर्षों में कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है.
2020
* अक्टूबर 2020: 1 दिन की पैरोल
2021
* मई 2021: 1 दिन की पैरोल
2022
* फरवरी: 21 दिन की फरलो
* जून: 30 दिन की पैरोल
* अक्टूबर: 40 दिन की पैरोल
2023
* जनवरी: 40 दिन की पैरोल
* जुलाई: 30 दिन की पैरोल
* नवंबर: 21 दिन की पैरोल
2024
* जनवरी: 50 दिन की पैरोल
* अगस्त: 21 दिन की फरलो
* अक्टूबर: 20 दिन की पैरोल
2025
* जनवरी: 30 दिन की पैरोल
* अप्रैल: 21 दिन की फरलो
* अगस्त: 40 दिन की पैरोल
2026
* जनवरी: 40 दिन की पैरोल
* मई: 30 दिन की पैरोल
* अगस्त: 21 दिन की पैरोल
राम रहीम 26 जून 2026 को वापस जेल पहुंचा था, अब 25 अगस्त 2026 को 21 दिन की पैरोल मिलने के बाद वह 17वीं बार जेल से बाहर आया है.
जानें क्या होती है पैरोल
पैरोल का मतलब है कि किसी कैदी को अपनी सजा पूरी होने से पहले कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की इजाजत दी जाती है. यह आम तौर पर खास हालात या मानवीय आधार पर दी जाती है—जैसे परिवार के किसी सदस्य की मौत या बीमारी के कारण उनसे मिलने जाना. कैदी को तय शर्तों का पालन करना होता है और तय समय खत्म होने पर जेल वापस लौटना होता है. हरियाणा के नियमों के तहत, पैरोल सीमित समय के लिए दी जा सकती है. पैरोल पर बाहर बिताया गया समय आम तौर पर कुल सजा में नहीं जोड़ा जाता; दूसरे शब्दों में, उस समय को जेल में बिताई गई सजा नहीं माना जाता है.
ये भी पढ़ें: दिल्ली एयरपोर्ट पर 150 मिलियन डॉलर के निवेश से इंटीग्रेटेड एयर कार्गो हब बनाएगी फेडएक्स
जानें क्या होती है फरलो
फरलो भी जेल से अस्थायी रिहाई का एक तरीका है, लेकिन इसका मकसद पैरोल से अलग होता है. इसे लंबी सजा काट रहे कैदियों को जेल के बाहर कुछ समय बिताने का मौका देने वाले एक तरीके के तौर पर देखा जा सकता है. दूसरे शब्दों में, लंबी सजा काट रहे कैदियों को बिना किसी खास वजह के अपने परिवार से संबंध बनाए रखने के लिए 'फ़र्लो' (छुट्टी) दी जाती है. हरियाणा के कानूनों में योग्य कैदियों के लिए फर्लो का प्रावधान है, जो तय शर्तों को पूरा करने पर दी जा सकती है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि फर्लो पर बिताया गया समय सजा की कुल अवधि में गिना जाता है; असल में, कैदी की सजा बिना किसी रुकावट के चलती रहती है.
ये भी पढ़ें: रिश्वत मामले में SBI के पूर्व शाखा प्रबंधक को 4 साल की सजा, 90 हजार रुपये का जुर्माना
पैरोल को लेकर क्या हैं नियम?
कारागार नियमों के तहत पात्र दोषियों को निर्धारित शर्तों के अनुसार पैरोल और फरलो का लाभ दिया जा सकता है. पैरोल की अवधि को सजा की गणना में अलग तरीके से माना जाता है, जबकि कुछ विशेष प्रकार की छुट्टी सजा की अवधि में शामिल की जाती है. ऐसे मामलों में संबंधित प्रशासन द्वारा तय शर्तों और न्यायिक आदेशों का पालन जरूरी होता है. राम रहीम के मामले में हर बार पैरोल मिलने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो जाती है. इस बार भी उसकी 21 दिन की छुट्टी को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
ये भी पढे़ं: Jaipur News: कचरे के बीच पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, जयपुर के सरकारी स्कूल की बदहाली ने खोली व्यवस्था की पोल
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation






