7 साल में 17वीं बार जेल से बाहर राम रहीम... एक दोषी को कितनी बार मिल सकती है पैरोल और क्या हैं नियम?
Gurmeet Ram Rahim: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। उसे 21 दिन की पैरोल मंजूर हुई है. मंगलवार सुबह करीब 6:05 बजे वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला और सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम के लिए रवाना हो गया. पैरोल की अवधि वह सिरसा आश्रम में बिताएगा. इस बार पैरोल मिलने के साथ ही राम रहीम के जेल से बाहर आने की संख्या 17 हो गई है. साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी उसे दोषी ठहराया गया था. हालांकि, बाद में एक पूर्व डेरा प्रबंधक और पत्रकार की हत्या से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया था.
बार-बार पैरोल पर उठते रहे हैं सवाल
राम रहीम को पहले भी कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है. उसके लगातार जेल से बाहर आने को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं. इस बार भी उसके सिरसा आश्रम पहुंचने के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने की संभावना जताई जा रही है. प्रशासन की ओर से पैरोल की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी रखी जाएगी. होशियारपुर से विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा ने राम रहीम को मिली पैरोल पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बार-बार पैरोल दिया जाना उचित नहीं है. विधायक ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से कुछ लोगों को पैरोल और फरलो का लाभ दिया जाता है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी ऐसे मामलों का संज्ञान लेने की मांग की.
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कब-कब जेल से बाहर आया राम रहीम?
राम रहीम को पिछले कुछ वर्षों में कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है.
2020
* अक्टूबर 2020: 1 दिन की पैरोल
2021
* मई 2021: 1 दिन की पैरोल
2022
* फरवरी: 21 दिन की फरलो
* जून: 30 दिन की पैरोल
* अक्टूबर: 40 दिन की पैरोल
2023
* जनवरी: 40 दिन की पैरोल
* जुलाई: 30 दिन की पैरोल
* नवंबर: 21 दिन की पैरोल
2024
* जनवरी: 50 दिन की पैरोल
* अगस्त: 21 दिन की फरलो
* अक्टूबर: 20 दिन की पैरोल
2025
* जनवरी: 30 दिन की पैरोल
* अप्रैल: 21 दिन की फरलो
* अगस्त: 40 दिन की पैरोल
2026
* जनवरी: 40 दिन की पैरोल
* मई: 30 दिन की पैरोल
* अगस्त: 21 दिन की पैरोल
राम रहीम 26 जून 2026 को वापस जेल पहुंचा था, अब 25 अगस्त 2026 को 21 दिन की पैरोल मिलने के बाद वह 17वीं बार जेल से बाहर आया है.
जानें क्या होती है पैरोल
पैरोल का मतलब है कि किसी कैदी को अपनी सजा पूरी होने से पहले कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की इजाजत दी जाती है. यह आम तौर पर खास हालात या मानवीय आधार पर दी जाती है—जैसे परिवार के किसी सदस्य की मौत या बीमारी के कारण उनसे मिलने जाना. कैदी को तय शर्तों का पालन करना होता है और तय समय खत्म होने पर जेल वापस लौटना होता है. हरियाणा के नियमों के तहत, पैरोल सीमित समय के लिए दी जा सकती है. पैरोल पर बाहर बिताया गया समय आम तौर पर कुल सजा में नहीं जोड़ा जाता; दूसरे शब्दों में, उस समय को जेल में बिताई गई सजा नहीं माना जाता है.
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जानें क्या होती है फरलो
फरलो भी जेल से अस्थायी रिहाई का एक तरीका है, लेकिन इसका मकसद पैरोल से अलग होता है. इसे लंबी सजा काट रहे कैदियों को जेल के बाहर कुछ समय बिताने का मौका देने वाले एक तरीके के तौर पर देखा जा सकता है. दूसरे शब्दों में, लंबी सजा काट रहे कैदियों को बिना किसी खास वजह के अपने परिवार से संबंध बनाए रखने के लिए 'फ़र्लो' (छुट्टी) दी जाती है. हरियाणा के कानूनों में योग्य कैदियों के लिए फर्लो का प्रावधान है, जो तय शर्तों को पूरा करने पर दी जा सकती है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि फर्लो पर बिताया गया समय सजा की कुल अवधि में गिना जाता है; असल में, कैदी की सजा बिना किसी रुकावट के चलती रहती है.
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पैरोल को लेकर क्या हैं नियम?
कारागार नियमों के तहत पात्र दोषियों को निर्धारित शर्तों के अनुसार पैरोल और फरलो का लाभ दिया जा सकता है. पैरोल की अवधि को सजा की गणना में अलग तरीके से माना जाता है, जबकि कुछ विशेष प्रकार की छुट्टी सजा की अवधि में शामिल की जाती है. ऐसे मामलों में संबंधित प्रशासन द्वारा तय शर्तों और न्यायिक आदेशों का पालन जरूरी होता है. राम रहीम के मामले में हर बार पैरोल मिलने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो जाती है. इस बार भी उसकी 21 दिन की छुट्टी को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
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योगी सरकार किसानों के बच्चों को हर महीने देगी 5000 रुपये, जानें कौन उठा सकता है इसका लाभ
UP News: योगी सरकार किसानों से लेकर नौजवानों और छात्रों तक कई योनजाएं चला रही है. ऐसे में योगी सरकार अब ऐसे छात्रों को भी हर महीने पैसा देने जा रही है जिनके माता-पिता किसान हैं. बता दें कि केंद्र सरकार पहले से ही किसानों को पीएम किसान योजना योजना के तहत हर साल 6000 रुपये देती है.
वहीं अब योगी सरकार इन्ही किसानों और खेतिहर मजदूरों के बच्चों के लिए खास योजना लेकर आई है. जिसमें किसानों और खेतिहर मजदूरों के बच्चों को पढ़ाई के लिए मदद मिलेगी. योगी सरकार की इस योजना का नाम 'मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृति योजना' है. जिसके तहत पात्र बच्चों को हर महीने 5000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी.
छात्रों को हर महीने 5000 रुपये देगी योगी सरकार
बता दें कि योगी सरकार किसानों के बच्चों को पढ़ाई और उच्च शिक्षा में आने वाले परेशानी को देखते हुए ये योजना चला रही है. जो किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी. ऐसे में जो बच्चे पढ़ना चाहते हैं लेकिन पैसों की तंगी के चलते अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते उन्हें काफी लाभ मिलने वाला है.
क्योंकि योगी सरकार किसानों के ऐसे बच्चों को हर महीने 5000 रुपये की आर्थिक मदद देगी. हालांकि इस योजना का लाभ पाने के लिए आपको कुछ शर्तों पर खरा उतना होगा. यानी अगर इन शर्तों को पूरा नहीं किया तो आपको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. दरअसल, इस योजना का लाभ लेने के लिए बच्चों को पढ़ाई का प्रदर्शन भी दिखाना पड़ेगा.
जानें कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ?
दरअसल, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृति योजना किसानों के ऐसे बच्चों के लिए चलाई जा रही है जो मेधावी हैं यानी पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज हैं. इस योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहली शर्त ये है कि बच्चे के माता-पिता का किसान के रूप में रजिस्ट्रेशन होना चाहिए. इसके साथ ही छात्र का उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है. ये योजना सिर्फ मेधावी छात्रों के लिए है इसलिए इसमें बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन की भी शर्त रखी गई है.
योजना के लिए क्या है छात्रों के प्रदर्शन की शर्त?
इस योजना के लिए बच्चों के लिए जो शर्त रखी गई है उसके तहत छात्र ने राज्य बोर्ड से 12वीं में कम से कम 70 फीसदी अंक प्राप्त किए हों, जबकि CBSE और ICSE बोर्ड के बच्चों का 85 फीसदी अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है. जबकि जो छात्र पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं उनका ग्रेजुएशन में कम से कम 70 फीसदी अंक होना अनिवार्य है. इन सभी शर्तों को पूरा करने वाले छात्रों को ही योगी सरकार की मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृति योजना का लाभ मिल सकता है.
कैसे करें आवेदन?
इस योजना का लाभ पाने के लिए आपको ऑफलाइन आवेदन करना होगा. मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृति योजना का फॉर्म छात्रों को अपने कॉलेज या प्रशासनिक कार्यालय से मिल जाएगा. इस फॉर्म को पूरी तरह से भरने के बाद मांगे गए जरूरी दस्तावेज के साथ जमा करना होगा. योजना के लिए छात्र का आधार कार्ड, आवासीय प्रमाण पत्र, इनकम सर्टिफिकेट, पिछली क्लास की मार्कशीट, पिता के किसान होने के प्रमाण के रूप में किसान बही, खेतिहर मजदूर होने का प्रमाण या श्रम कार्ड लगाना होगा.
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साथ ही उन्हें अपने बैंक अकाउंट की डिटेल भी देनी होगी. आवेदन के साथ मांगे गए दस्तावेज कॉलेज के प्रिंसिपल या नोडल अधिकारी से प्रमाणित कराना अनिवार्य है. इसके बाद फॉर्म को क्षेत्रीय मंत्रिपरिषद कार्यालय में जमा कराना होगा. फॉर्म की जांच के बाद छात्रवृति की रकम हर महीने बैंक खाते में आना शुरू हो जाएगी.
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