Bihar News Live: बिहार में छात्रों का प्रदर्शन | Bihar Police | BPSC Aspirants Protest | Latest News
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रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की टेक्नोलॉजी को भारतीय रक्षा कंपनियों को ट्रांसफर करने की मंज़ूरी दे दी है, ताकि देश के अंदर ही इनका उत्पादन किया जा सके। इस कदम का मकसद देश में ही मिसाइल बनाने की रफ़्तार बढ़ाना, आयात पर भारत की निर्भरता कम करना और डिफेंस सप्लाई चेन में घरेलू कंपनियों (जिनमें माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज यानी MSME भी शामिल हैं) की भूमिका को बढ़ाना है। मंत्रालय ने कहा कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से योग्य भारतीय उद्योगों को DRDO द्वारा विकसित पारंपरिक मिसाइल सिस्टम का प्रोडक्शन करने की इजाज़त मिलेगी, बशर्ते वे ज़रूरी योग्यता, सर्टिफिकेशन और रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करते हों।
'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक बड़ा कदम
इस फ़ैसले को रक्षा क्षेत्र में सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि इससे मिसाइल सिस्टम को डेवलपमेंट स्टेज से बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन (इंडस्ट्रियल-स्केल प्रोडक्शन) तक ले जाने में मदद मिलेगी और साथ ही भारत के घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार को भी मज़बूती मिलेगी। मंत्रालय ने कहा कि इसका मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाना, रक्षा औद्योगिक आधार को मज़बूत करना और सप्लाई चेन में भारतीय MSME और अन्य टेक्नोलॉजी पार्टनर की भागीदारी के लिए मौके बनाना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत के पड़ोसी देशों में मिसाइल क्षमताओं को बड़े पैमाने पर निगरानी, संचार और सटीक हमले (precision-strike) वाले नेटवर्क के साथ जोड़ा जा रहा है। 'सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़' (CAPSS) की जुलाई की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान की अंतरिक्ष क्षमताओं के तेज़ी से विस्तार पर ज़ोर दिया गया, खासकर चीन के साथ उसके सहयोग के ज़रिए। रिपोर्ट में कहा गया कि दशकों तक धीमी प्रगति के बाद, पाकिस्तान के 'स्पेस एंड अपर एटमॉस्फियर रिसर्च कमीशन' (SUPARCO) ने 16 महीनों में छह सैटेलाइट लॉन्च किए। इसमें यह भी बताया गया कि पाकिस्तान अपनी स्वतंत्र अंतरिक्ष-आधारित निगरानी क्षमताओं को मज़बूत करने और सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी को ज़मीनी संचार प्रणालियों के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान की क्षमताओं का विश्लेषण
CAPSS के विश्लेषण में कहा गया है कि पाकिस्तान की अंतरिक्ष क्षमताओं के विस्तार का भारत की रक्षा रणनीति पर असर पड़ सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि आधुनिक सैन्य अभियानों में सैटेलाइट-आधारित इंटेलिजेंस, नेविगेशन और कम्युनिकेशन बहुत महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। इसमें पाकिस्तान के सैटेलाइट लॉन्च, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग में चीन की भूमिका की ओर भी इशारा किया गया है। इस माहौल में, मिसाइल सिस्टम बनाने की भारत की घरेलू क्षमता को बढ़ाने से देश की अहम हथियारों के प्रोडक्शन को बनाए रखने और उसे बढ़ाने की क्षमता मज़बूत हो सकती है, जिससे विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम होगी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि टेक्नोलॉजी-ट्रांसफर की इस नई पहल से घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन भी बढ़ेगा और भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।
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