NEET-UG छात्रों ने जांच कमेटी बदलने की मांग की:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कमेटी सीधी निगरानी में काम करेगी, याचिका पर अगले हफ्ते विचार
NEET-UG पेपर लीक के विरोध में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर पर छात्रों पर पुलिस की कथित कार्रवाई की जांच की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने कोर्ट की बनाई हाई पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) को फिर से बनानेे की मांग की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी सुप्रीम कोर्ट की ‘सीधी निगरानी’ में काम कर रही है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मामले का निपटारा नहीं हुआ है और यह अभी लंबित है। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। खबर को अपडेट किया जा रहा है।
खडगे-राहुल ने जाति जनगणना के तरीके का विरोध किया:मोदी को पत्र लिखकर जनगणना की मौजूदा प्रश्नावली बदलने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने जाति जनगणना में जातियों के नाम दर्ज करने और डेटा जुटाने के तरीके का विरोध किया है। उन्होंने पीएम मोदी को लेटर लिखकरकहा कि जाति का नाम पूछने के लिए सवाल रखने से एक ही जाति अलग-अलग नामों या उपजातियों के नाम से दर्ज हो सकती है। इससे जातियों की सही संख्या पता करना और आंकड़ों की तुलना करना मुश्किल होगा। खड़गे और राहुल ने जातियों के नाम दर्ज करने के लिए तय सूची या ड्रॉप-डाउन विकल्प देने की मांग की है। इसमें सरकारी जाति सूचियों और भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के आधार पर नाम शामिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों में भी ऐसी सूचियों का इस्तेमाल किया गया था। लेटर में कहा- गलत आंकड़ों का असर नीतियों पर पड़ेगा दोनों नेताओं ने कहा कि अगर एक ही जाति कई नामों से दर्ज हुई तो उसकी आबादी का आंकड़ा गलत हो सकता है। इसका असर पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं पर पड़ेगा। जातिगत आंकड़े शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण होते हैं। पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं होने पर भी आपत्ति राहुल गांधी ने प्रस्तावित जनगणना प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द नहीं होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इससे देश में ओबीसी आबादी का सही आंकड़ा सामने आने में परेशानी हो सकती है। नई प्रश्नावली बनाने की मांग खड़गे और राहुल ने मौजूदा प्रश्नावली रद्द कर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए। दोनों नेताओं के मुताबिक, जातियों की पहचान और संख्या दर्ज करने की प्रक्रिया एक समान होनी चाहिए, ताकि देश में सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा मिल सके। खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है।
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