लेनदेन में 13,000 गुना का ऐतिहासिक उछाल: 11 देशों में बज रहा भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का डंका
केंद्रीय मंत्रियों ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के 10 साल पूरे होने पर कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच से शुरू हुई क्रांति है और यह अब भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को दुनिया में पहुंचा रहा है और अब तक 11 देशों में ऑपरेशनल हो चुका है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ऑफिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि यूपीआई अब दुनिया के 11 देशों में ऑपरेशनल हो चुका है, जिसमें फ्रांस, सिंगापुर, यूएई, ग्रीस और मॉरिशस जैसे देशों का नाम शामिल है. पोस्ट में आगे कहा गया कि भारत में आसान पेमेंट की सुविधा देने से लेकर सीमाओं के पार डिजिटल ट्रांजैक्शन को संभव बनाने तक, यूपीआई हमारे डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को दुनिया भर में पहुंचा रहा है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर कहा कि यूपीआई, प्रधानमंत्री मोदी की सोच से शुरू हुई एक क्रांति है और 'डिजिटल इंडिया' की एक झलक है.
गोयल ने डिजिटल पेमेंट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि "क्यूआर कोड प्लीज?" अब करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन गया है. वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में आए बदलाव का श्रेय पीएम मोदी के नेतृत्व को दिया. पुरी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "पीएम नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यूपीआई भारत की डिजिटल यात्रा में एक क्रांतिकारी ताकत बन गया है." उन्होंने कहा कि यूपीआई ने पेमेंट को तेज, आसान, सुरक्षित और ज्यादा सुलभ बना दिया है, जिससे लाखों भारतीय वित्तीय भागीदारी के एक नए दौर में शामिल हो गए हैं. वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यूपीआई, इनोवेशन के जरिए भारत के बदलाव का सफर तय करने के पीएम मोदी के विजन का एक बेहतरीन उदाहरण है.
यूपीआई के 10 वर्षों के दौरान, हमारे देश ने दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम दिया है और यह साबित किया है कि 'डिजिटल इंडिया' के जरिए हम लोगों को तेज, आसान और सुरक्षित इंटरफेस देकर उन्हें सशक्त बना सकते हैं. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई पर वार्षिक लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में इनकी संख्या 1.78 करोड़ थी.
INPUT: IANS
चीन के उपराष्ट्रपति से मिले NSA अजीत डोभाल, सीमा पर शांति मजबूत करने पर की चर्चा
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने मंगलवार को चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की.
भारत-चीन सीमा मुद्दे पर भारत के विशेष प्रतिनिधि अजीत डोभाल सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे थे. यह यात्रा चीन के विदेश मंत्री और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो सदस्य वांग यी के निमंत्रण पर हुई.
चीन की ओर से सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि वांग यी और डोभाल मंगलवार को भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर की बैठक करेंगे. इस बैठक से पहले डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति से मुलाकात की और दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की.
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा, "25 अगस्त को भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति महामहिम हान झेंग से मुलाकात की. विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर से पहले, एनएसए डोभाल और उपराष्ट्रपति हान ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को मजबूत करने तथा दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुसार आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की."
इससे पहले सोमवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा था कि भारत और चीन दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति की भावना के अनुरूप सीमा मुद्दे पर गहन बातचीत जारी रखेंगे.
उन्होंने कहा कि चीन-भारत सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की बैठक दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता का मुख्य माध्यम है और आपसी चिंताओं वाले मुद्दों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच भी है.
लिन जियान ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष अगस्त में दोनों देशों ने विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की थी, जिसमें सीमा मुद्दे पर खुलकर और विस्तार से चर्चा हुई थी और कई सहमतियां बनी थीं.
उन्होंने कहा कि इस बैठक में दोनों पक्ष नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप सीमा मुद्दे पर गहन वार्ता जारी रखेंगे और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करेंगे. साथ ही दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों तथा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे.
भारत लगातार यह कहता रहा है कि सीमा क्षेत्रों की स्थिति का सीधा असर भारत-चीन के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है.
इस महीने की शुरुआत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, "भारत और चीन के सीमा क्षेत्रों से जुड़े मामलों पर हमने हमेशा चीनी पक्ष के साथ चर्चा में जोर दिया है कि हम इन मुद्दों को बेहद गंभीरता से देखते हैं और इन क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है."
दोनों देशों ने 6 अगस्त को हुई भारत-चीन सीमा मामलों पर कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 36वीं बैठक में भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास की स्थिति की समीक्षा की थी और खुलकर चर्चा की थी.
स्रोत- आईएएनएस
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