भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से मुलाकात की। भारत में सितंबर में होने जा रहे ब्रिक्स समिट के लिए डॉ एस जयशंकर ने पुतिन को पीएम मोदी की तरफ से न्योता दिया। लेकिन यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब रूस के सबसे जादुई और रहस्यमई इलाके में अमेरिका और नाटो हमले की कोशिश कर रहे हैं। नाटो रूस के इस जादुई इलाके की फूड सप्लाई काटना चाहता है। लेकिन भारत रूस के इस इलाके को बचा सकता है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि कुछ समय पहले भारत ने रूस के इस इलाके में रहने वाले लोगों का पेट भरा था। जिसके बाद रूस ने कहा था कि दोस्त हो तो भारत जैसा। अब पुतिन और जयशंकर की मुलाकात से कुछ घंटों पहले ही रूस के इस इलाके में अमेरिका और नाटो के तीन रहस्यमई जहाजों ने चक्कर काटे। नाटो रूस के इस इलाके पर हमला करना चाहता है।
रूस के जिस इलाके की हम बात कर रहे हैं उसका नाम कलिनिन ग्राद है। कलिनिन ग्राद रूस के साथ-साथ भारत के लिए भी बेहद स्ट्रेटेजिक है। आप कलिनिन ग्राद की लोकेशन देखेंगे तो सर चकरा जाएगा। कलिनिन ग्राद रूस का है लेकिन रूस की मुख्य भूमि से कटा हुआ है। यह रूस से बहुत दूर है। आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि कलेनिन ग्राद दो नाटो देशों के बीच बैठा है। कलिनिन ग्राद नाटो सदस्य देश लिथुआ और पोलैंड के बीचोंबीच स्थित है। सोचिए पुतिन दो नाटो देशों के बीच बैठे हैं। नाटो देशों को लगता था कि कलिनिन ग्राद रूस से दूर है। ऐसे में इस इलाके के लोगों को परेशान करेंगे तो वह खुद ब खुद रूस से अलग होने की बात करेंगे। लेकिन रूस के पक्के दोस्त भारत ने कुछ समय पहले कलिनिन ग्राद में लाखों किलो चावल भेज दिया ताकि इस इलाके में रहने वाले रूसी लोग परेशान ना हो। जैसे ही भारत का 390 टन चावल कलिनिन ग्राद पहुंचा तो यहां के लोग खुशी से पागल हो गए। रूस की सरकार और मीडिया ने बोलना शुरू कर दिया कि दोस्त हो तो भारत जैसा। आपको बता दें कि नाटो देशों को लगता है कि पुतिन इस इलाके का इस्तेमाल करके यूरोप पर जब मन चाहे हमला कर सकते हैं। कुछ समय पहले अमेरिका के एक सैन्य अधिकारी जनरल क्रिस्टोफर डॉन ह्यू ने कहा था कि नाटो सेनाएं रूस के कलिनिन ग्राद पर कब्जा कर सकती हैं। लेकिन शायद नाटो देशों ने अपना मन बदल लिया है क्योंकि इस इलाके में अब भारत भी बैठा है। वैसे आपको बता दें कि कलिनिन ग्राद से भारत का एक खास रिश्ता भी है।
कालिनीन ग्राद में रूस का एक यांत्र शिपयार्ड है जिसने भारत के लिए दो स्टेल्थ ब्रिगेड भी बनाए हैं। जिनका नाम तुशील और तमाल है। इन दोनों जंगी जहाजों ने भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है। कालिनिन ग्राद से भारत के लिए दो जंगी जहाज आए तो भारत ने भी दोस्ती दिखाते हुए कालिनिन ग्राद को चावल भेज दिया। आप जानते ही हैं कि जंग की वजह से रूस में अनाज की कमी है और कालिनिन ग्राद तो वो इलाका है जो रूस से भी दूर है। ऐसे में भारत ने वहां चावल पहुंचाकर रूस की बहुत बड़ी मदद की है। रूस के लिए कलिनिन ग्राद के लोगों तक अनाज पहुंचाना काफी मुश्किल था क्योंकि यह नाटो देशों के बीच है। लेकिन भारत ने यहां चावल भेजकर ना सिर्फ दोस्ती निभाई बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक दांव भी खेल दिया। भारत ने कलिनिन ग्राद में कुछ महीनों पहले चावल उस वक्त भेजा जब अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूसी तेल के चलते भारत को खूब धमकियां दी।
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कई देशों के बीच जंगे छिड़ी हुई हैं। ठीक उसी दौरान भारत अपनी कूटनीति के जरिए हर मोर्चा पर खुद को मजबूत करने में जुटा हुआ है। भारत की तरक्की कई बड़े देशों को रास नहीं आ रही है और वह भारत पर दबाव बनाकर उसे उसके लक्ष्य से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन फिर भी भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। ट्रंप की टेरिफ धमकी के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस पहुंचे। जैसे ही जयशंकर रूस में उतरे तो उनका धमाकेदार स्वागत हुआ। इसके बाद वो रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिले। पुतिन जयशंकर का गर्मजशी के साथ स्वागत करते हुए दिखाई दिए। जयशंकर ने पुतिन से पूछा कि आशा है आप ठीक होंगे। पुतिन ने इसका जवाब मुस्कुराते हुए दिया। इसके अलावा जयशंकर ने पुतिन को पीएम मोदी का एक सीक्रेट मैसेज भी थमाया।
दरअसल जयशंकर की मुलाकात पुतिन के अगले महीने भारत दौरे से ठीक पहले हुई है। पुतिन सितंबर में ब्रिज सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। इससे पहले पुतिन ने दिसंबर 2025 को 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली का दौरा किया था। इस दौरे की तस्वीरों ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर पुतिन की एयरपोर्ट पर अगवानी की थी। दरअसल रूस पहुंचे जयशंकर की जब पुतिन से चर्चा हुई तो कई बड़ी बातें सामने आई। जयशंकर ने पुतिन से कहा कि दिल्ली ब्रिक्स समिट में आपके स्वागत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामना के साथ अपनी बात शुरू करना चाहता हूं। उन्होंने मुझे एक निजी संदेश दिया है जिसे मैं आपको सौंपना चाहता हूं। हमारी अंतर सरकारी आयोग की बैठक हुई है और मुझे लगता है कि हमारे पास आपको सौंपने के लिए एक अच्छी रिपोर्ट है। आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, फर्टिलाइजर, परमाणु और अन्य आयामों में सहयोग बढ़ा है। जिन पर मुझे विस्तार से बात करके खुशी होगी। कुल मिलाकर हमारा आर्थिक सहयोग काफी आगे बढ़ा है। जिसके बाद पुतिन ने पीएम मोदी और भारत के रिश्तों पर धमाकेदार बातें कही।
राष्ट्रपति पुतिन ने भारत और रूस व्यापार में बढ़ोतरी का श्रेय पीएम मोदी को दिया। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी पर कहा कि इसका मुख्य श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। पुतिन ने कहा कि भारत के साथ रूस के रिश्ते लगभग सभी क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जयशंकर से पीएम मोदी को अपनी शुभकामनाएं पहुंचाने की अपील की और कहा कि वह जल्द ही पीएम मोदी से मुलाकात उम्मीद कर रहे हैं। दरअसल रूस और भारत ने 2030 तक आपसी कारोबार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए भारत खासतौर पर रूस को अपनी दवाइयों, कृषि, उत्पादों, मशीनरी और दूसरे सामानों की बिक्री बढ़ाना चाहता है। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। जुलाई 2025 के मुकाबले जुलाई 2026 में रूस से भारत का तेल आयात 62.4% बढ़ा।
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