सोने-चांदी में मिलाजुला कारोबार: गोल्ड की कीमतों में उछाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3 महीने के उच्चतम स्तर पर
Gold And Silver: सोने और चांदी में मंगलवार के शुरुआती सत्र में मिलाजुला कारोबार देखने को मिला. इस दौरान सोने में 0.15 प्रतिशत की बढ़त और चांदी में 0.22 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दोपहर 12 बजे सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 247 रुपए या 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,63,476 रुपए प्रति 10 ग्राम था.
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,62,564 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,63,617 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ. यह दिखाता है कि सोने में सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है. सुबह यह पिछली क्लोजिंग 1,63,229 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले मामूली कमजोरी के साथ 1,63,015 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला था. वहीं, खबर लिखे जाने तक चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 542 रुपए या 0.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,43,678 रुपए प्रति किलो पर था. अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,44,420 रुपए प्रति किलो का उच्च स्तर और 2,42,299 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर छुआ.
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सुबह यह पिछली क्लोजिंग 2,44,220 रुपए प्रति किलो के मुकाबले कमजोरी के साथ 2,42,299 रुपए प्रति किलो पर खुली थी. जानकारों के मुताबिक, ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर दूसरे दर्जे के प्रतिबंध (सेकेंडरी सैंक्शन) के खतरे ने अनिश्चितता का एक नया दौर पैदा कर दिया है. इससे सोने की कीमतों में तेजी को सपोर्ट मिला है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमत फिर से 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई है, जो कि बीते तीन महीने का सबसे उच्चतम स्तर है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी के साथ और चांदी में करीब सपाट कारोबार हो रहा है. कॉमेक्स पर सोना 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,708 डॉलर प्रति औंस और चांदी सपाट कारोबार के साथ 68 डॉलर प्रति औंस पर थी.
Input: Ians
भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य, IRIGC-TEC में जयशंकर ने रखे तीन सुझाव
रूस में आईआरआईजीसी-टेक के 27वें सत्र की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टेक) के 27वें सत्र में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है. इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि हमारे पिछले सत्र के बाद से, दोनों देशों के नेताओं ने हमारी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए लगातार स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं. दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की हमारी साझा प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की गई थी.
उन्होंने कहा कि भारत और रूस की साझेदारी ने हमेशा अपनी मजबूती और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता दिखाई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद, दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है. यह हमारे साझा हितों और आपसी भरोसे को दर्शाता है, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की सबसे बड़ी ताकत है.
जयशंकर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार चार गुना से भी अधिक बढ़ा है. यह 2021-22 में लगभग 13 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025-26 में करीब 60 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है.
उन्होंने कहा कि यह हमारी आर्थिक साझेदारी की बड़ी संभावनाओं को दिखाता है. हालांकि, व्यापार में इस तेज वृद्धि के साथ व्यापार असंतुलन भी काफी बढ़ा है. यह लगभग 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है. आज इस व्यापार असंतुलन को कम करना हमारी सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक है.
विदेश मंत्री ने कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के हमारे साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाजार तक बेहतर पहुंच, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाना, भुगतान व्यवस्था को मजबूत बनाना और व्यवसायों के बीच सहयोग बढ़ाना बहुत महत्वपूर्ण होगा. आज हम भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच प्रस्तावित 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' पर हुई चर्चाओं की भी समीक्षा कर सकते हैं.
इस दौरान विदेश मंत्री ने आईआरआईजीसी-टेक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए कार्य समूहों और उप-समूहों के सह-अध्यक्षों के लिए तीन सुझाव भी रखे. इनमें क्रियान्वयन और परिणामों पर ध्यान देना, व्यापार जगत के साथ जुड़ाव और मजबूत करना और नए अवसरों की लगातार तलाश करना शामिल हैं.
स्रोत- आईएएनएस
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