Street Food: भरतपुर के ये 5 स्ट्रीट फूड हैं बेहद खास, घूमने आएं तो जरूर चखें, जायका कर देगा दीवाना
Bharatpur Famous Street Food: भरतपुर सिर्फ अपने ऐतिहासिक किलों, मंदिरों और पर्यटन स्थलों के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि यहां का देसी और चटपटा स्ट्रीट फूड भी लोगों को खूब आकर्षित करता है. शहर घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यहां खाने के कई ऐसे ठिकाने हैं, जहां स्थानीय स्वाद का अलग अनुभव मिलता है. शाम होते ही इन जगहों पर स्वाद के शौकीनों की भीड़ जुटने लगती है. मसालेदार, कुरकुरे और देसी स्वाद वाले ये व्यंजन भरतपुर की खान-पान की संस्कृति को अलग पहचान देते हैं. अगर आप भरतपुर घूमने जा रहे हैं और पर्यटन स्थलों के साथ स्थानीय स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो यहां के स्ट्रीट फूड को जरूर आजमा सकते हैं.
भोजन से पहले अन्न को प्रणाम करना क्यों माना जाता है जरूरी? जानें इसका धार्मिक महत्व और परंपरा
Bhojan se pahle anna pranam ka mahatva: हिंदू धर्म में भोजन ग्रहण करने से पहले अन्न को प्रणाम करने और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि अन्न को देवता का दर्जा दिया जाता है, इसी वजह से भोजन शुरू करने से पहले हाथ जोड़कर उसे प्रणाम करना और मन में आभार व्यक्त करना एक अनिवार्य परंपरा मानी जाती है। यही कारण है कि आज भी कई भारतीय घरों में भोजन से पहले यह रस्म निभाई जाती है।
अन्न को देवता क्यों माना जाता है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अन्न को देवी अन्नपूर्णा का साक्षात स्वरूप माना जाता है, जो भगवान शिव की अर्धांगिनी देवी पार्वती का ही एक रूप हैं। मान्यता है कि देवी अन्नपूर्णा संपूर्ण सृष्टि का पालन-पोषण करती हैं, और उन्हीं की कृपा से मनुष्य को भोजन प्राप्त होता है। इसी वजह से अन्न को कभी भी अनादरपूर्वक व्यर्थ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे देवी अन्नपूर्णा का अपमान माना जाता है।
कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि अन्न के प्रति सम्मान न रखने और उसे बर्बाद करने से घर में दरिद्रता का वास होता है, जबकि अन्न का सम्मान करने वाले घरों में सदैव समृद्धि बनी रहती है।
भोजन से पहले प्रणाम करने की सही विधि
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भोजन शुरू करने से पहले हाथ जोड़कर अन्न को प्रणाम करना चाहिए और मन में यह भाव रखना चाहिए कि यह भोजन भगवान की कृपा और किसान की मेहनत का परिणाम है। कुछ परंपराओं में भोजन से पहले "अन्नपूर्णे सदा पूर्णे..." जैसे श्लोकों का उच्चारण करने की भी प्रथा है, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा थाली में भोजन परोसे जाने के बाद उसका एक छोटा अंश भगवान को अर्पित करने की भी परंपरा निभाई जाती है।
अन्न बर्बाद करने को क्यों माना जाता है अशुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, थाली में भोजन जूठा छोड़ना या उसे व्यर्थ फेंकना अत्यंत अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि जितना खाया जा सके उतना ही भोजन थाली में लेना चाहिए, ताकि अन्न का अनादर न हो। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि भोजन बनाने वाले व्यक्ति और भोजन कराने वाले अन्नदाता, दोनों के प्रति आभार व्यक्त करना भी इस परंपरा का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है इसका महत्व
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ भोजन से पहले कृतज्ञता व्यक्त करने की इस परंपरा को मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि भोजन ग्रहण करने से पहले कुछ क्षण शांत मन से आभार व्यक्त करने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से कार्य करता है, और भोजन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित होता है।
आज भी कई घरों में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही जीवनशैली में कई बदलाव आए हों, लेकिन भोजन से पहले अन्न को प्रणाम करने की यह परंपरा आज भी अनेक भारतीय परिवारों में श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। बड़े-बुजुर्ग आज भी बच्चों को भोजन के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखने की सीख देते नजर आते हैं, ताकि यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहे।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
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