इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और यूनिफॉर्म की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट ने एक मुस्लिम छात्रा द्वारा स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ हिजाब (सिर पर स्कार्फ) पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का कोई 'अनिवार्य धार्मिक अभ्यास' (Essential Religious Practice) नहीं है, और न ही याचिकाकर्ता इसे साबित करने के लिए कोई ठोस धार्मिक ग्रंथ या कानूनी आधार पेश कर सकी है। 21 अगस्त को दिए गए फैसले में, जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रही कि क्लासरूम के अंदर सिर पर स्कार्फ पहनना एक ज़रूरी धार्मिक प्रथा है। 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी कहा कि कई हाई कोर्ट्स का यह मानना रहा है कि महिलाओं के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लामी आस्था का कोई ज़रूरी हिस्सा नहीं है।
हिजाब पर कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट का वह फैसला, जिसमें शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर लगी रोक को सही ठहराया गया था, अभी भी अहम माना जा सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बंटे हुए फैसले के बाद अभी तक इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। कोर्ट ने कहा, "अलग-अलग राय होने के कारण, मामले को सही बेंच बनाने के लिए माननीय मुख्य न्यायाधीश के सामने रखने का निर्देश दिया गया था। कर्नाटक फुल बेंच के फैसले से उठे मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है। हमारी राय है कि कर्नाटक फुल बेंच का फैसला, दूसरे कोर्ट्स की तरह ही, काफी अहमियत रखता है और हमारे पास इससे अलग राय रखने की कोई वजह नहीं है।"
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि सिर पर स्कार्फ पहनना एक ज़रूरी धार्मिक प्रथा है जिसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सुरक्षा मिली हुई है। कोर्ट ने कहा, "रिकॉर्ड पर ऐसी कोई दलील या आधिकारिक धार्मिक ग्रंथ या सामग्री पेश नहीं की गई है, जो यह साबित करने के लिए काफी हो कि क्लासरूम के अंदर स्कार्फ पहनना अनिवार्य है और इसे न मानने से याचिकाकर्ता की आस्था का मूल स्वरूप बदल जाएगा।" बेंच ने कहा "संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देकर किया गया दावा सिर्फ़ कहने भर से स्वीकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके लिए ज़रूरी तथ्यात्मक और कानूनी आधार न हो।" बेंच ने कहा, "रिट याचिका को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने इस बारे में कोई दलील नहीं दी है, सिवाय इसके कि वह बचपन से ही ऐसा करती आ रही है और जब से उसने छठी कक्षा में स्कूल जॉइन किया है, तब से ऐसा कर रही है।"
स्कूल ड्रेस कोड पर कोर्ट
कोर्ट ने आगे कहा कि जहां ड्रेस कोड एक जैसा (यूनिफॉर्म), सही नीयत वाला, बिना भेदभाव वाला और अनुशासन व संस्थान की पहचान बनाए रखने के मकसद से बनाया गया हो, वहां तय यूनिफॉर्म के बारे में फैसला मुख्य रूप से स्कूल के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह याचिका प्रयागराज के अत्तारसुइया स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल की एक छात्रा ने दायर की थी। उसने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने उसे 11वीं कक्षा में दाखिला देने से मना कर दिया क्योंकि वह सिर पर स्कार्फ (हिजाब) पहनकर आई थी। छात्रा ने कहा कि वह छठी कक्षा से ही हिजाब पहनती आ रही है। हालांकि, स्कूल का कहना था कि तय यूनिफॉर्म के साथ सिर पर स्कार्फ पहनना उसके ड्रेस कोड का उल्लंघन होगा।
हाई कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि छात्रा के पहले बिना किसी आपत्ति के सिर पर स्कार्फ पहनने की वजह से उसे ऐसा करते रहने का कानूनी अधिकार मिल गया है। कोर्ट ने कहा कि पहले बिना किसी आपत्ति के सिर पर स्कार्फ पहनने की बात से ही कोई ऐसा पक्का अधिकार नहीं बन जाता जिसके लिए स्कूल को 11वीं कक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए अपनी यूनिफॉर्म पॉलिसी में बदलाव करना पड़े या उसमें ढील देनी पड़े।
Continue reading on the app
दुष्कर्म के मामले में दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह मंगलवार सुबह 21 दिन की फरलो पर रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह 17वीं बार है, जब वह जेल से बाहर आया है।
राम रहीम अपनी दो शिष्याओं से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की जेल की सजा काट रहा है और हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद है। सूत्रों के अनुसार, फरलो की अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित अपने डेरा मुख्यालय में रहेगा। दोषी ठहराए जाने के बाद से उसे असामान्य रूप से कई बार फरलो और पैरोल मिल चुकी है।
इस साल ही वह तीसरी बार जेल से बाहर आया है। उसे जनवरी में 40 दिन और मई में 30 दिन की पैरोल दी गई थी। अगस्त 2025 में वह 40 दिन की पैरोल और अप्रैल 2025 में 21 दिन की फरलो पर बाहर आया था।
जनवरी 2025 में उसे पांच फरवरी को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले 30 दिन की पैरोल पर रिहा किया गया था। पांच अक्टूबर 2024 को होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले, एक अक्टूबर 2024 को वह 20 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आया था। अगस्त 2024 में राम रहीम को 21 दिन की फरलो दी गई थी।
इससे पहले उसे सात फरवरी 2022 से तीन सप्ताह की फरलो भी दी गई थी, जो पंजाब विधानसभा चुनाव से महज दो सप्ताह पहले थी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) जैसे सिख संगठनों ने राम रहीम को बार-बार मिल रही इस राहत की आलोचना की है। मार्च में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2002 में एक पत्रकार की हत्या के मामले में राम रहीम को बरी कर दिया था।
इस मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके सात साल बाद उच्च न्यायालय ने उसे बरी किया। मई 2024 में उच्च न्यायालय ने एक अन्य विशेष सीबीआई अदालत के आदेश को पलटते हुए डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की 2002 में हुई हत्या के मामले में राम रहीम और चार अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।
डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय सिरसा में है और हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान में इसके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। हरियाणा में इसके सबसे अधिक अनुयायी सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और हिसार जैसे जिलों में हैं।
Continue reading on the app