CM Yogi ने दिए Invest UP को निर्देश, जापानी निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी कम्पनियों के निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से सोमवार को ‘इन्वेस्ट यूपी’ तथा अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार 240 लोगों के प्रतिनिधिमण्डल का प्रदेश में आगमन हुआ और इस यात्रा में जापान से आए अतिथियों ने राज्य में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की, ऐसे में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच निरन्तर संवाद कर निवेश के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए। राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बैठक में मुख्यमंत्री को जापान के प्रतिनिधिमण्डल की ओर से किए गए सभी समझौतों (एमओयू) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान में सितम्बर, अक्टूबर एवं दिसम्बर में होने वाले विभिन्न वैश्विक आयोजनों में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमण्डल को भी भेजा जाए, जिनमें मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, उद्योगपतियों के साथ ही सम्बन्धित क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। आदित्यनाथ ने कहा कि जापानी के प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और यामानाशी प्रान्त सहित जापान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार की सम्भावनाओं को सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘इन्वेस्ट यूपी’ में अलग से यामानाशी जापान डेस्क बनायी जाए, ताकि इसके जरिए निरन्तर संवाद होता रहे।
उन्होंने हर तीसरे महीने इसकी प्रगति की रिपोर्ट भी लेने के भी निर्देश दिये। बयान के मुताबिक, उप्र-जापान इन्वेस्टमेंट समिट 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित बहुभाषी मंच भाषिणी ने की रुकावटों को दूर करके और भारतीय एवं जापानी निवेशकों और हितधारकों के बीच आसानी से बातचीत मुमकिन बनाकर अहम भूमिका निभाई। राज्य की निवेश संवर्धन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी और भाषिणी के बीच एक खास सहयोग के तहत, समिट के दौरान इस तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया।
बयान में कहा गया है कि हिंदी, अंग्रेजी और जापानी भाषाओं के बीच तुरंत होने वाले अनुवाद और लिप्यांतरण से दोनों देशों के प्रतिनिधियों को अपनी पसंद की भाषाओं में बातचीत करने और चर्चाओं को समझने में मदद मिली।
Delhi में H1N1 Cases बढ़े, विशेषज्ञों ने कहा कोई नया या घातक स्वरूप नहीं
सत्यम द्विवेदी नयी दिल्ली, 24 अगस्त हाल के हफ्तों में दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में एच1एन1 इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी के बीच विशेषज्ञों ने लोगों, खासकर संक्रमण से जटिलताओं का अधिक खतरा झेलने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वायरस के पहले से अधिक घातक या गंभीर होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की पूर्व महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा कि एच1एन1 इन्फ्लुएंजा का एक ज्ञात स्वरूप है और यह कोई नया वायरस नहीं है।
डॉ. स्वामीनाथन ने कहा, ‘‘इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि वायरस में कोई बड़ा एंटीजेनिक बदलाव हुआ है या यह पहले से अधिक घातक अथवा खतरनाक हो गया है।’’ उन्होंने कहा कि हाल में मामलों में हुई बढ़ोतरी मौसमी इन्फ्लुएंजा के प्रसार के अनुरूप है, खासकर मानसून और सर्दियों के महीनों में। स्वामीनाथन ने कहा कि ज्यादातर लोग पर्याप्त आराम, तरल पदार्थों का सेवन और लक्षणों के आधार पर उपचार से इस संक्रमण से ठीक हो जाते हैं। हालांकि, बुजुर्गों, बच्चों, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण के कारण जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि दिल्ली में फिलहाल एच1एन1 के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन मानसून के कमजोर पड़ने के साथ इनमें कमी आने की संभावना है। उन्होंने लोगों, खासकर संक्रमण के लिहाज से अधिक जोखिम वाले समूहों के लोगों को इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी। जन स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने कहा कि एच1एन1 इन्फ्लुएंजा का कोई नया उप स्वरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप या मोटापे से ग्रस्त लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में संक्रमण से जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।
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