Delhi में H1N1 Cases बढ़े, विशेषज्ञों ने कहा कोई नया या घातक स्वरूप नहीं
सत्यम द्विवेदी नयी दिल्ली, 24 अगस्त हाल के हफ्तों में दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में एच1एन1 इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी के बीच विशेषज्ञों ने लोगों, खासकर संक्रमण से जटिलताओं का अधिक खतरा झेलने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वायरस के पहले से अधिक घातक या गंभीर होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की पूर्व महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा कि एच1एन1 इन्फ्लुएंजा का एक ज्ञात स्वरूप है और यह कोई नया वायरस नहीं है।
डॉ. स्वामीनाथन ने कहा, ‘‘इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि वायरस में कोई बड़ा एंटीजेनिक बदलाव हुआ है या यह पहले से अधिक घातक अथवा खतरनाक हो गया है।’’ उन्होंने कहा कि हाल में मामलों में हुई बढ़ोतरी मौसमी इन्फ्लुएंजा के प्रसार के अनुरूप है, खासकर मानसून और सर्दियों के महीनों में। स्वामीनाथन ने कहा कि ज्यादातर लोग पर्याप्त आराम, तरल पदार्थों का सेवन और लक्षणों के आधार पर उपचार से इस संक्रमण से ठीक हो जाते हैं। हालांकि, बुजुर्गों, बच्चों, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण के कारण जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि दिल्ली में फिलहाल एच1एन1 के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन मानसून के कमजोर पड़ने के साथ इनमें कमी आने की संभावना है। उन्होंने लोगों, खासकर संक्रमण के लिहाज से अधिक जोखिम वाले समूहों के लोगों को इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी। जन स्वास्थ्य और स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने कहा कि एच1एन1 इन्फ्लुएंजा का कोई नया उप स्वरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप या मोटापे से ग्रस्त लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में संक्रमण से जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।
CM Vishnu Deo Sai ने DBT से 1.45 लाख श्रमिकों को भेजे 39.67 करोड़ रुपये
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को 1.45 लाख से ज्यादा श्रमिकों के खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 39.67 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह के दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 1,45,841 श्रमिकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 39.67 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि अंतरित की।
साय ने कहा, ‘‘श्रमिक हमारे विकास की मजबूत नींव हैं। अपने परिश्रम से वे सड़कें, भवन, पुल और विकास की अनेक संरचनाएं खड़ी करते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
समारोह में मुख्यमंत्री ने योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा, अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 बच्चों को योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का अवसर दिया गया है।’’ साय ने कहा कि प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा छठी से 12वीं तक निशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना कभी श्रमिक परिवारों के लिए कठिन सपना हुआ करता था, आज राज्य सरकार उस सपने को साकार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल बच्चों को अच्छे विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर देने की पहल है। साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद प्रदेश के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा रहा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, ‘डबल इंजन’ सरकार के समन्वित प्रयासों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। राज्य के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से वर्तमान में 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ श्रमिकों को दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को कक्षा छठी से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभावान बच्चों के अवसर सीमित न होने देना और उन्हें उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
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