पनीर से बनी हुई हर एक डिश हम सबको काफी पसंद होती है, लेकिन बाजार में मिलने वाली पनीर मेंकाफी मिलावट देखने को मिलती है। त्योहारों के समय पनीर में सबसे ज्यादा मिलावट की जाती है। वैसे पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन मार्केट में मिलने वाला पनीर असली दूध से बना हुआ हो, यह जरुरी नहीं है।
आजकल एनालॉग पनीर को लेकर कई राज्यो में सख्ती देखने को मिल रही है। एनलॉग पनीर पारंपरिक दूध से बने पनीर के बजाय दूसरे गैर-डेयरी फैट, स्टार्च और अन्य सामग्री से तैयार किया जाता है।
क्या कहा FSSAI ने?
FSSAI ने यह साफ स्पष्ट किया है कि एनलॉग को पनीर के नाम से बेचना नियमों का उल्लंघन है। इस समय उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई और प्रतिबंध की खबरें सामने आई है।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि एनालॉग पनीर क्या है, असली पनीर से यह कैसे अलग है और इसे खाने को लेकर चिंता क्यों जताई जा रही है। आइए जानते हैं एनालॉग पनीर से जुड़े 5 बड़े नुकसान और इससे बचने के तरीके।
क्या है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर एक ऐसी चीज है जो एकदम पनीर की तरह दिखती है और इस्तेमाल भी होता है, लेकिन इसमें दूध के जगह पर वनस्पति फैट, स्टार्च या दूसरे गैर-डेयरी तत्वों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जब लोगों को इस एनलॉग पनीर को असली पनीर बताकर बेचा जाता है। वहीं, FSSAI ने इस तरह की गलत लेबलिंग करने पर सख्ती दिखाई है।
एनालॉग पनीर खाने के नुकसान
पाचन संबंधी परेशानी
असल में एनालॉग पनीर में दूध की जगह अलग तरह का वसा, स्टार्च और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के उत्पाद हर व्यक्ति के लिए आसानी से पचने वाले नहीं है, यह जरुरी नहीं है। अगर आप इसको अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, तो कुछ लोगों को पेट में भारीपन, गैस, पेट फूलना, अपच या एसिडिटी जैसी परेशनियों से जूझना पड़ सकता है। यदि आप इसे तले-भुने या मसालेदार खाने के साख खाएंगे, तो पाचन समस्या बढ़ जाएगी।
ज्यादा वसा और कैलोरी
गौरतलब है कि एनलॉग पनीर को बनाने में वनस्पति वसा का इस्तेमाल किया जाता है। प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी मात्रा के आधार पर इसमें वसा और कैलोरी की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति इसे नियमित रुप से अधिक मात्रा में सेवन करता है, तो इसकी कुल कैलोरी और वसा की खपत बढ़ सकती है। खरीदते समय पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी और सामग्री जरुर चेक करें।
पोषण की कमी
पनीर दूध से बनाया जाए, तो इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन एनालॉग पनीर का पोषण प्रोफाइल इसमें इस्तेमाल की गई सामग्री पर निर्भर करता है। इसलिए एनलॉग पनीर को हमेशा असली दूध से बने पनीर के बराबर पोषण वाला प्रोडक्ट नहीं माना जाता है। इसलिए भूलकर भी एनलॉग पनीर को अपनी डाइट में शामिल न करें।
दिल की सेहत को लेकर चिंता
गौरतलब है कि एनालॉग पनीर में सबसे अधिक वसा की मात्रा पाई जाती है। यदि किसी व्यक्ति के भोजन में पहले से ही संतृप्त वसा की मात्रा ज्यादा है और वह लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन न करे, जिससे हृदय-स्वस्थ पर असर देखने को मिलेगा। इसलिए एनालॉग पनीर को नियमित रुप से सेवन न करे, उसमें पाए जाने वाले वसा का मात्रा और खाने की मात्रा पर ध्यान जरुर दें।
खाद्य सुरक्षा का जोखिम
दरअसल, एनालॉग पनीर को लेकर ग्राहकों को इतनी जानकारी नहीं होती है। वहीं, सही जानकारी ग्राहक को दी नहीं जाती है या उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानको के मुताबिक तैयार और सुरक्षित तरीके से संग्रहित नहीं किए जाते हैं। गलत तरीके से रखे गए खाद्य पदार्थ में दूषित होने का खतरा अधिक देखने को मिलता है। इसलिए बिन लेवल, संदिग्ध गुणवत्ता या अनजान स्रोत से मिलने वाले पनीर खरीदने से बचें। जब आप पैकेट वाला पनीर लें, तो एक बार सामग्री, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और एफएसएसएआई से संबंधित जानकारी जरुर जान लें।
Continue reading on the app
अधिकतर भारतीयों को तीखा खाना ज्यादा पसंद है। जब भी हम कुछ बनाते हैं, तो उसमें कई तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। जो खाने के स्वाद को बढ़ाने के साथ तीखापन भी लाता है। लेकिन हर किसी को तीखा खाना पसंद नहीं होता है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि तीखा खाना खाने से आपकी उम्र बढ़ सकती है।
दरअसल, पिछले कुछ सालों में इस पर रिसर्च की गई है। जिसमें मसालेदार खाना खाने और लंबी उम्र के बीच एक कनेक्शन देखने को मिला है। हालांकि वैज्ञानिकों की मानें, तो अभी इस पर रिसर्च की और जरूरत है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या सच में तीखा खाने वाले लोगों की जिंदगी लंबी हो सकती है।
जानें रिसर्च में क्या आया सामने
एक रिसर्च के मुताबिक करीब 5 लाख से अधिक लोगों की सेहत पर नजर रखी गई थी। उन पर स्टडी की गई, जिसमें पाया गया कि जो लोग सप्ताह में 6 से 7 दिन मसालेदार खाना खाते थे। उनमें मौत का खतरा अन्य लोगों की तुलना में कम था। जो लोग सप्ताह में एक बार या इससे भी कम तीखा खाना खाते थे।
यह अंतर करीब 14% तक देखा गया। वहीं यह भी पाया गया कि मसालेदार खाना खाने वालों में कुछ तरह के कैंसर, हार्ट डिजीज और लंग्स से जुड़ी समस्याओं की वजह मौत का खतरा कम देखा गया।
अन्य रिसर्च ने भी दिए ऐसे ही संकेत
अन्य रिसर्च में भी यह पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से अपनी डाइट में लाल मिर्च शामिल करते हैं। उनमें मौत का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में कम होता है। यह अंतर करीब 13% तक था। लेकिन यह सिर्फ एक ही कनेक्शन दिखाता है। जिसका मतलब यह नहीं है कि लंबी उम्र की वजह सिर्फ तीखा मिर्च खाना हो।
मिर्च में क्या होता है
मिर्च में कैप्साइसिन नामक एक्टिव एलिमेंट पाया जाता है। जिस कारण यह तीखा होता है। यह तत्व हमारी बॉडी में कुछ खास रिसेप्टर्स पर असर करता है, जो तीखेपन और गर्मी को महसूस करते हैं। इस एलिमेंट से सेहत पर सकारात्मक असर होता है।
दिल की सेहत को फायदा
रिसर्च में पाया गया है कि कैप्साइसिन बॉडी में अच्छे कोलेस्ट्ऱॉल यानी की HDL के लेवल को बढ़ा सकता है। वहीं कुछ लोग तीखा खाने पर नमक का कम इस्तेमाल करते हैं। जिससे बीपी को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। लेकिन यह फायदा आपकी लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों पर निर्भर करती है।
हमेशा पेट के लिए नुकसानदायक नहीं
आमतौर पर लोगों को लगता है कि तीखा खाना पेट को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन रिसर्च के मुताबिक कैप्साइसिन पेट को नुकसान नहीं पहुंचाता है। लेकिन जिन लोगों को गैस, एसिडिटी या कुछ डाइजेशन संबंधी समस्याएं हैं, उनको तीखा खाने पर कुछ समस्याएं हो सकती हैं।
जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
रिसर्च में बताया गया है कि स्पाइसी फूड और लंबी उम्र के बीच संबंध लेकर कुछ पॉजिटिव संकेत जरूर मिले हैं। लेकिन यह कहना पूरी तरीके से सही नहीं होगा कि सिर्फ तीखा खाने से उम्र बढ़ती है। मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी और मेटाबॉलिज्म से जुड़े कुछ फायदे देखने को मिले हैं। लेकिन किसी की व्यक्ति की लंबी उम्र कई चीजों पर निर्भर करती है। जैसे नियमित एक्सरसाइज करना, हेल्दी डाइट, तनाव कम लेना, जेनेटिक रीजन और अच्छी नींद आदि। वहीं कुछ लोगों में तीखा खाने से सेहत को फायदा हो सकता है।
वहीं जिन लोगों को गैस्ट्रो-इसोफेजियल रिफ्लक्स, एसिडिटी, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, गैस्ट्राइटिस या दूसरी डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं हैं, तो तीखा खाना इन लोगों की परेशानी को और बढ़ा सकता है। इसलिए सिर्फ लंबी उम्र की उम्मीद करके ज्यादा मिर्च-मसाला खाना सही नहीं है।
ज्यादा तीखा खाना शुरू करना
हालांकि अगर आपको तीखा खाना ज्यादा पसंद है, तो आप सीमित मात्रा में इसको खा सकती हैं। लेकिन सिर्फ लंबी उम्र पाने के लिए तीखा खाना शुरू करना सही नहीं होता है।
Continue reading on the app