अधिकतर भारतीयों को तीखा खाना ज्यादा पसंद है। जब भी हम कुछ बनाते हैं, तो उसमें कई तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। जो खाने के स्वाद को बढ़ाने के साथ तीखापन भी लाता है। लेकिन हर किसी को तीखा खाना पसंद नहीं होता है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि तीखा खाना खाने से आपकी उम्र बढ़ सकती है।
दरअसल, पिछले कुछ सालों में इस पर रिसर्च की गई है। जिसमें मसालेदार खाना खाने और लंबी उम्र के बीच एक कनेक्शन देखने को मिला है। हालांकि वैज्ञानिकों की मानें, तो अभी इस पर रिसर्च की और जरूरत है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या सच में तीखा खाने वाले लोगों की जिंदगी लंबी हो सकती है।
जानें रिसर्च में क्या आया सामने
एक रिसर्च के मुताबिक करीब 5 लाख से अधिक लोगों की सेहत पर नजर रखी गई थी। उन पर स्टडी की गई, जिसमें पाया गया कि जो लोग सप्ताह में 6 से 7 दिन मसालेदार खाना खाते थे। उनमें मौत का खतरा अन्य लोगों की तुलना में कम था। जो लोग सप्ताह में एक बार या इससे भी कम तीखा खाना खाते थे।
यह अंतर करीब 14% तक देखा गया। वहीं यह भी पाया गया कि मसालेदार खाना खाने वालों में कुछ तरह के कैंसर, हार्ट डिजीज और लंग्स से जुड़ी समस्याओं की वजह मौत का खतरा कम देखा गया।
अन्य रिसर्च ने भी दिए ऐसे ही संकेत
अन्य रिसर्च में भी यह पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से अपनी डाइट में लाल मिर्च शामिल करते हैं। उनमें मौत का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में कम होता है। यह अंतर करीब 13% तक था। लेकिन यह सिर्फ एक ही कनेक्शन दिखाता है। जिसका मतलब यह नहीं है कि लंबी उम्र की वजह सिर्फ तीखा मिर्च खाना हो।
मिर्च में क्या होता है
मिर्च में कैप्साइसिन नामक एक्टिव एलिमेंट पाया जाता है। जिस कारण यह तीखा होता है। यह तत्व हमारी बॉडी में कुछ खास रिसेप्टर्स पर असर करता है, जो तीखेपन और गर्मी को महसूस करते हैं। इस एलिमेंट से सेहत पर सकारात्मक असर होता है।
दिल की सेहत को फायदा
रिसर्च में पाया गया है कि कैप्साइसिन बॉडी में अच्छे कोलेस्ट्ऱॉल यानी की HDL के लेवल को बढ़ा सकता है। वहीं कुछ लोग तीखा खाने पर नमक का कम इस्तेमाल करते हैं। जिससे बीपी को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। लेकिन यह फायदा आपकी लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों पर निर्भर करती है।
हमेशा पेट के लिए नुकसानदायक नहीं
आमतौर पर लोगों को लगता है कि तीखा खाना पेट को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन रिसर्च के मुताबिक कैप्साइसिन पेट को नुकसान नहीं पहुंचाता है। लेकिन जिन लोगों को गैस, एसिडिटी या कुछ डाइजेशन संबंधी समस्याएं हैं, उनको तीखा खाने पर कुछ समस्याएं हो सकती हैं।
जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
रिसर्च में बताया गया है कि स्पाइसी फूड और लंबी उम्र के बीच संबंध लेकर कुछ पॉजिटिव संकेत जरूर मिले हैं। लेकिन यह कहना पूरी तरीके से सही नहीं होगा कि सिर्फ तीखा खाने से उम्र बढ़ती है। मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी और मेटाबॉलिज्म से जुड़े कुछ फायदे देखने को मिले हैं। लेकिन किसी की व्यक्ति की लंबी उम्र कई चीजों पर निर्भर करती है। जैसे नियमित एक्सरसाइज करना, हेल्दी डाइट, तनाव कम लेना, जेनेटिक रीजन और अच्छी नींद आदि। वहीं कुछ लोगों में तीखा खाने से सेहत को फायदा हो सकता है।
वहीं जिन लोगों को गैस्ट्रो-इसोफेजियल रिफ्लक्स, एसिडिटी, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, गैस्ट्राइटिस या दूसरी डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं हैं, तो तीखा खाना इन लोगों की परेशानी को और बढ़ा सकता है। इसलिए सिर्फ लंबी उम्र की उम्मीद करके ज्यादा मिर्च-मसाला खाना सही नहीं है।
ज्यादा तीखा खाना शुरू करना
हालांकि अगर आपको तीखा खाना ज्यादा पसंद है, तो आप सीमित मात्रा में इसको खा सकती हैं। लेकिन सिर्फ लंबी उम्र पाने के लिए तीखा खाना शुरू करना सही नहीं होता है।
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फैट लॉस के दौरान पीरियड्स के दिन आते ही अक्सर महिलाओं की पूरी जर्नी गड़बड़ा जाती है। यह वह वक्त होता है, जब क्रेविंग्स को रोक पाना काफी मुश्किल होता है। कभी मीठा खाने का मन करता है, तो कभी बहुत ज्यादा भूख लगती है और कभी पेट इतना फूला हुआ महसूस होता है कि लगता है जैसे पिछले कई दिनों की मेहनत बेकार हो गई। इतना ही नहीं, इन दिनों स्केल पर वजन भी काफी बढ़ा हुआ नजर आता है। ऐसे में पूरा मूड ही खराब हो जाता है।
अमूमन इस दौरान अक्सर महिलाएं अपनी पूरी डाइट से फोकस हटा देती हैं और बाद में गिल्ट की वजह से दोबारा अपनी जर्नी शुरू ही नहीं करतीं। हो सकता है कि आपके साथ भी ऐसा हुआ हो। तो चलिए जानते हैं कि वेट लॉस जर्नी में पीरियड्स के दौरान अपनी डाइट में किस तरह के बदलाव करें, जिससे क्रेविंग्स और वजन दोनों को मैनेज किया जा सके-
समझदारी से खाएं मीठा
पीरियड्स के दौरान अक्सर मीठा खाने की बहुत अधिक क्रेविंग्स हो सकती है। ऐसे में खुद को बहुत ज्यादा रोकने की कोशिश ना करें। दरअसल, ऐसे में आप अचानक बहुत ज्यादा खा सकती हैं। कोशिश करें कि आप मीठा स्मार्टली खाएं। मसलन, पहले प्रोटीन व फाइबर वाला भोजन लें और फिर छोटी मात्रा में अपनी पसंद की चीज खाएं। मीठे की इच्छा पर दही के साथ फल और थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट लिया जा सकता है।
इन दिनों सिर्फ सलाद खाकर काम न चलाएं
अगर आप फैट लॉस पर हैं तो पीरियड्स में वजन बढ़ने के डर से खाना कम करने की कोशिश ना करें। इस दौरान शरीर पहले ही से थका हुआ महसूस कर रहा होता है और ऐसे में सिर्फ सलाद या सूप पर टिके रहना अच्छा विचार नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपनी थाली में दाल, चना, राजमा, लोबिया, पनीर या दही जैसे प्रोटीन स्रोत के साथ रोटी, चावल या कोई दूसरा संतुलित कार्बाेहाइड्रेट और सब्जियां रखें। पेट भी ज्यादा देर तक भरा रहेगा और बार-बार कुछ खाने का मन भी कम होगा।
हर भोजन में प्रोटीन
यह एक आसान रूल है, जो पीरियड्स के दौरान आपकी भूख व क्रेविंग्स को मैनेज करने में मददगार साबित हो सकता है। कोशिश करें कि आप अपने भोजन को सिर्फ कम कैलोरी वाला बनाने के बजाय भरपेट और संतोषजनक बनाएं। इसके लिए हर मील में प्रोटीन को जरूर शामिल करें। नाश्ते में दही या दूध, दोपहर के खाने में दाल या पनीर और शाम को भुना चना जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं। इससे आपको हर थोड़ी देर में कुछ खाने की जरूरत कम महसूस होगी।
नमकीन चीजों पर रखें नजर
पीरियड्स के दिनों में अक्सर हम बहुत ज्यादा नमकीन चिप्स, पैकेट वाले नाश्ते, अचार और दूसरी अधिक नमक वाली चीजों का सेवन अनजाने में कर लेते हैं। जिससे ब्लोटिंग और भी ज्यादा बढ़ सकती है। कोशिश करें कि आप इनकी जगह घर का बना नाश्ता, फल, दही, भुना चना या मखाना जैसे विकल्प रखें। इससे आपकी खाने की इच्छा भी पूरी होगी और बेवजह ज्यादा नमक लेने से बचेंगी।
याद रखें कि पीरियड्स के आसपास आपका वजन अचानक 500 ग्राम या 1 किलो ऊपर चला गया, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ दिनों का वजन पानी, ब्लोटिंग और पाचन में बदलाव से प्रभावित हो सकता है।
- मिताली जैन
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