हमारे शरीर में मौजूद हर एक अंग बिना रुके और बिना थके लगातार काम करते रहते हैं। इन्हीं में से एक लिवर है, जो कि शरीर के मुख्य अंगों में से एक है। लिवर का कार्य खाना पचाने में मदद करना, टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालना, खाने को एनर्जी में बदलना और इम्यून सिस्टम को मजबूत करना सहित कई काम लिवर करता है।
इसलिए हेल्दी रहने के लिए इसका सही तरह से काम करना काफी जरुरी है। आजकल डाइट, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और स्ट्रेस सहित कई कारणों के चलते फैटी लिवर की दिक्कत काफी देखने को मिलती है। ऐसे में नानी मां की रसोई में उपलब्ध खाने-पीने की कुछ चीजें लिवर को हेल्दी रखने और फैटी लिवर के लक्षणों को रिवर्स करने में मदद करता है। आइए आपको बताते हैं फैटी लिवर के लिए 4 देसी उपाय, जिनका इस्तेमाल करना बेहद ही फायदेमंद है।
नींबू पानी का सेवन करें
गौरतलब है कि नींबू फैटी लिवर में काफी फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा, संतरें, मौसंबी और अन्य सिट्रस फ्रूट्स को भी लिवर के लिए हेल्दी माना जाता है। इसलिए खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू का रस डालकर जरुर पिएं। वहीं आप सलाद और सब्जियों में भी नींबू का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और फैट तेजी से बर्न करता है।
जीरा, धनिया, सौंफ और अदरक की चाय पिएं
इसके अलावा, आप जीरा, धनिया, सौंफ और अदरक की चाय भी लिवर हेल्थ को सुधार सकती है। इन सभी चीजों को पानी में डलकर उबाल लें और फिर इसे छान लें। इसे खाने के करीब एक घंटे बाद पीना फायदेमंद माना जाता है। यह ब्लोटिंग को दूर करने में मदद करता है। साथ ही पाचन को दुरुस्त करता है और शरीर को डिटॉक्स करती है। इससे शरीर में जमा चर्बी भी कम हो जाती है और फैटी लिवर के लक्षण रिवर्स हो जाते हैं।
आंवले को डाइट का हिस्सा बनाएं
लिवर के लिए आंवला किसी वरदान से कम नहीं है। यह पित्त को बैलेंस करता है और लिवर को सही तरह से फंक्शन करने में मदद करता है। इससे पाचन भी दुरुस्त होता है। खाली पेट आंवला का जूस पीना काफी फायदेमंद होता है। आप कच्चे आंवले के टुकड़ों को भी खा सकते हैं।
कच्ची हल्दी है फायदेमंद
फैटी लिवर के लक्षणों को कम करने में मददगार है हल्दी। इसमें कर्क्युमिन होता है। साथ ही एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है। यह लिवर सेल्स हेल्दी रखता है। आप कच्ची हल्दी और चुटकी भर काली मिर्च को पानी में उबालकर पिएं। इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना श्रेष्ठ है। वरना यह लिवर को नुकसान भी पहुंचा सकता है।
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पनीर से बनी हुई हर एक डिश हम सबको काफी पसंद होती है, लेकिन बाजार में मिलने वाली पनीर मेंकाफी मिलावट देखने को मिलती है। त्योहारों के समय पनीर में सबसे ज्यादा मिलावट की जाती है। वैसे पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन मार्केट में मिलने वाला पनीर असली दूध से बना हुआ हो, यह जरुरी नहीं है।
आजकल एनालॉग पनीर को लेकर कई राज्यो में सख्ती देखने को मिल रही है। एनलॉग पनीर पारंपरिक दूध से बने पनीर के बजाय दूसरे गैर-डेयरी फैट, स्टार्च और अन्य सामग्री से तैयार किया जाता है।
क्या कहा FSSAI ने?
FSSAI ने यह साफ स्पष्ट किया है कि एनलॉग को पनीर के नाम से बेचना नियमों का उल्लंघन है। इस समय उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई और प्रतिबंध की खबरें सामने आई है।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि एनालॉग पनीर क्या है, असली पनीर से यह कैसे अलग है और इसे खाने को लेकर चिंता क्यों जताई जा रही है। आइए जानते हैं एनालॉग पनीर से जुड़े 5 बड़े नुकसान और इससे बचने के तरीके।
क्या है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर एक ऐसी चीज है जो एकदम पनीर की तरह दिखती है और इस्तेमाल भी होता है, लेकिन इसमें दूध के जगह पर वनस्पति फैट, स्टार्च या दूसरे गैर-डेयरी तत्वों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जब लोगों को इस एनलॉग पनीर को असली पनीर बताकर बेचा जाता है। वहीं, FSSAI ने इस तरह की गलत लेबलिंग करने पर सख्ती दिखाई है।
एनालॉग पनीर खाने के नुकसान
पाचन संबंधी परेशानी
असल में एनालॉग पनीर में दूध की जगह अलग तरह का वसा, स्टार्च और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के उत्पाद हर व्यक्ति के लिए आसानी से पचने वाले नहीं है, यह जरुरी नहीं है। अगर आप इसको अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, तो कुछ लोगों को पेट में भारीपन, गैस, पेट फूलना, अपच या एसिडिटी जैसी परेशनियों से जूझना पड़ सकता है। यदि आप इसे तले-भुने या मसालेदार खाने के साख खाएंगे, तो पाचन समस्या बढ़ जाएगी।
ज्यादा वसा और कैलोरी
गौरतलब है कि एनलॉग पनीर को बनाने में वनस्पति वसा का इस्तेमाल किया जाता है। प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी मात्रा के आधार पर इसमें वसा और कैलोरी की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति इसे नियमित रुप से अधिक मात्रा में सेवन करता है, तो इसकी कुल कैलोरी और वसा की खपत बढ़ सकती है। खरीदते समय पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी और सामग्री जरुर चेक करें।
पोषण की कमी
पनीर दूध से बनाया जाए, तो इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन एनालॉग पनीर का पोषण प्रोफाइल इसमें इस्तेमाल की गई सामग्री पर निर्भर करता है। इसलिए एनलॉग पनीर को हमेशा असली दूध से बने पनीर के बराबर पोषण वाला प्रोडक्ट नहीं माना जाता है। इसलिए भूलकर भी एनलॉग पनीर को अपनी डाइट में शामिल न करें।
दिल की सेहत को लेकर चिंता
गौरतलब है कि एनालॉग पनीर में सबसे अधिक वसा की मात्रा पाई जाती है। यदि किसी व्यक्ति के भोजन में पहले से ही संतृप्त वसा की मात्रा ज्यादा है और वह लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन न करे, जिससे हृदय-स्वस्थ पर असर देखने को मिलेगा। इसलिए एनालॉग पनीर को नियमित रुप से सेवन न करे, उसमें पाए जाने वाले वसा का मात्रा और खाने की मात्रा पर ध्यान जरुर दें।
खाद्य सुरक्षा का जोखिम
दरअसल, एनालॉग पनीर को लेकर ग्राहकों को इतनी जानकारी नहीं होती है। वहीं, सही जानकारी ग्राहक को दी नहीं जाती है या उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानको के मुताबिक तैयार और सुरक्षित तरीके से संग्रहित नहीं किए जाते हैं। गलत तरीके से रखे गए खाद्य पदार्थ में दूषित होने का खतरा अधिक देखने को मिलता है। इसलिए बिन लेवल, संदिग्ध गुणवत्ता या अनजान स्रोत से मिलने वाले पनीर खरीदने से बचें। जब आप पैकेट वाला पनीर लें, तो एक बार सामग्री, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और एफएसएसएआई से संबंधित जानकारी जरुर जान लें।
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