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Hariyali Teej 2026: समृद्ध परंपराओं, प्रकृति-प्रेम और दांपत्य जीवन की पवित्रता का अनुपम उत्सव है हरियाली तीज

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना विशेष महत्व है। इन्हीं पावन पर्वों में हरियाली तीज का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन से जब धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, तब प्रकृति का यह अनुपम सौंदर्य हरियाली तीज के उत्सव को और भी मनोहारी बना देता है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए सौभाग्य, प्रेम, समृद्धि और आनंद का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी दिव्य मिलन की स्मृति में हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएँ योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं और माता पार्वती तथा भगवान शिव की पूजा करती हैं।

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हरियाली तीज का उत्सव पूरे देश में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महिलाएँ हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, चूड़ियाँ पहनती हैं और पारंपरिक आभूषणों से श्रृंगार करती हैं। बाग-बगीचों में झूले डाले जाते हैं, लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य के माध्यम से उत्सव की खुशी व्यक्त की जाती है। विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में इस पर्व की भव्यता देखने योग्य होती है। अनेक स्थानों पर भगवान शिव और माता पार्वती की शोभायात्राएँ भी निकाली जाती हैं।

यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। वर्षा ऋतु में चारों ओर फैली हरियाली हमें वृक्षों और वनस्पतियों के महत्व का स्मरण कराती है। हरियाली तीज हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने तथा पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रेरणा देती है।

आज के आधुनिक जीवन में भी हरियाली तीज की प्रासंगिकता बनी हुई है। यह पर्व परिवार में प्रेम, विश्वास और सौहार्द को मजबूत करता है तथा हमारी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। नई पीढ़ी को भी इस पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना आवश्यक है। हरियाली तीज भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं, प्रकृति-प्रेम और दांपत्य जीवन की पवित्रता का अनुपम उत्सव है। यह पर्व जीवन में उल्लास, प्रेम, आस्था और हरियाली का संदेश देता है।

- शुभा दुबे

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Rice Soya Sticks: घर पर ऐसे बनाएं कुरकुरी और टेस्टी राइस सोया स्टिक्स, बच्चों से बड़ों तक सबको पसंद आएगी

Rice Soya Sticks: शाम की चाय के साथ कुछ कुरकुरा और चटपटा खाने का मन हो तो हर बार बाजार की पैक्ड स्नैक्स खरीदने की जरूरत नहीं है। घर में मौजूद चावल के आटे और सोया जैसी आसानी से मिलने वाली चीजों से स्वादिष्ट राइस सोया स्टिक्स तैयार की जा सकती हैं। बाहर से बेहद क्रिस्पी और अंदर से हल्की मसालेदार ये स्टिक्स चाय, कॉफी या किसी भी ड्रिंक के साथ स्नैक के तौर पर परोसी जा सकती हैं।

खास बात यह है कि इसे बनाने की प्रक्रिया बहुत मुश्किल नहीं है। सही मात्रा में आटा, सोया और मसाले मिलाकर तैयार किया गया आटा अगर ठीक तरह से गूंथा जाए, तो स्टिक्स आसानी से आकार ले लेती हैं और तलने के बाद अच्छी तरह कुरकुरी बनती हैं। बच्चों की पार्टी हो या घर पर अचानक मेहमान आ जाएं, यह स्नैक मेन्यू में शामिल किया जा सकता है।

राइस सोया स्टिक्स बनाने के लिए सामग्री

  • 1 कप चावल का आटा
  • 1/2 कप सोया ग्रेन्यूल्स या सोया चंक्स
  • 2 बड़े चम्मच बेसन
  • 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1/2 छोटा चम्मच अजवाइन
  • 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
  • 1/2 छोटा चम्मच चाट मसाला
  • स्वादानुसार नमक
  • 1 बड़ा चम्मच तेल
  • जरूरत के अनुसार पानी
  • तलने के लिए तेल

राइस सोया स्टिक्स बनाने का तरीका

सबसे पहले तैयार करें सोया
सोया ग्रेन्यूल्स या सोया चंक्स को गर्म पानी में कुछ मिनट भिगो दें। नरम होने के बाद पानी निकालकर उन्हें अच्छी तरह निचोड़ लें। अगर चंक्स इस्तेमाल कर रहे हैं तो इन्हें मिक्सर में हल्का दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि सोया में पानी ज्यादा न रह जाए, वरना आटा गीला हो सकता है।

ऐसे तैयार करें स्टिक्स का आटा
एक बड़े बर्तन में चावल का आटा, बेसन और तैयार किया हुआ सोया डालें। अब इसमें लाल मिर्च, हल्दी, अजवाइन, चाट मसाला और नमक मिलाएं। एक चम्मच तेल डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए ऐसा आटा गूंथें जो नरम हो, लेकिन बहुत ज्यादा चिपचिपा न हो।

आटे को 5 से 10 मिनट के लिए ढककर रख दें। इससे सभी मसाले अच्छी तरह मिल जाएंगे और आटा आकार देने के लिए तैयार हो जाएगा।

स्टिक्स को दें सही आकार
अब आटे की छोटी लोई लेकर लंबी और पतली स्टिक जैसा आकार दें। आप चाहें तो सेव बनाने वाली मशीन या मुरुक्कू मेकर की मदद से भी एक जैसे आकार की स्टिक्स तैयार कर सकते हैं। सभी स्टिक्स बहुत मोटी न रखें, क्योंकि ज्यादा मोटी स्टिक्स अंदर से नरम रह सकती हैं।

सुनहरी और क्रिस्पी होने तक तलें
कड़ाही में तेल गर्म करें। तेल बहुत तेज गर्म नहीं होना चाहिए। तैयार स्टिक्स को मध्यम आंच पर बैच में डालें और धीरे-धीरे सुनहरा व कुरकुरा होने तक तलें। ज्यादा तेज आंच पर तलने से स्टिक्स बाहर से जल्दी रंग पकड़ सकती हैं और अंदर से ठीक से क्रिस्पी नहीं होंगी।

तलने के बाद इन्हें टिश्यू पेपर पर निकाल लें, ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए। पूरी तरह ठंडी होने पर एयरटाइट डिब्बे में रख सकते हैं।

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लेखक: (कीर्ति)

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  Sports

Rahul Dravid को Team India से उम्मीद, बोले- WTC Final की राह कठिन, काबिलियत पर भरोसा!

भारत के पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ का मानना ​​है कि भले ही भारत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फ़ाइनल की रेस में पीछे छूट गया हो, लेकिन टीम की क्वालिटी को देखते हुए दो बार फ़ाइनल खेल चुकी यह टीम अभी भी रेस से बाहर नहीं हुई है। भारत अभी WTC 2025-27 पॉइंट्स टेबल में पांचवें नंबर पर है और टॉप दो में जगह बनाकर अगले साल होने वाले फाइनल में पहुंचने के लिए उसे कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। अभी कई अहम टेस्ट मैच खेले जाने बाकी हैं, इसलिए तीसरी बार WTC फ़ाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को ज़िंदा रखने के लिए भारत को अपने बचे हुए ज़्यादातर मैच जीतने होंगे।
 

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जब द्रविड़ से पूछा गया कि क्या भारत अभी भी WTC फ़ाइनल में जगह बना सकता है, तो उन्होंने JioStar से कहा कि मुझे उम्मीद है कि वे ऐसा करेंगे। अगर भारत यहाँ से WTC फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई कर पाता है, तो यह एक शानदार सफ़र होगा। उन्होंने कहा कि वे थोड़े पीछे रह गए हैं, लेकिन भारतीय टीम में जिस तरह की काबिलियत है, उसे किसी भी स्टेज पर कम नहीं आंका जा सकता। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अच्छी शुरुआत की है, जो एक अच्छा पहला कदम है।

भारत अभी श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की सीरीज़ में 1-0 से आगे है और शानदार बल्लेबाज़ी के दम पर दूसरे टेस्ट में भी मज़बूत स्थिति में है। सीरीज़ जीतने से भारत को अहम पॉइंट्स और मोमेंटम मिलेगा, लेकिन आगे की राह काफी मुश्किल है। WTC साइकल में भारत के लिए अगली बड़ी चुनौती अक्टूबर में आएगी, जब टीम दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए न्यूजीलैंड जाएगी। द्रविड़ का मानना ​​है कि यह दौरा काफ़ी मुश्किल हो सकता है, खासकर युवा भारतीय टीम के लिए, जिन्हें उन हालात में टेस्ट क्रिकेट खेलने का ज़्यादा अनुभव नहीं है।
 

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द्रविड़ ने कहा कि न्यूज़ीलैंड में खेलना हमेशा एक चुनौती होती है। घर से बाहर उनके ख़िलाफ़ खेलना मुश्किल होता है। भारतीय टीम के कई युवा खिलाड़ियों ने उन हालात में नहीं खेला है, इसलिए यह एक बड़ी चुनौती होगी। भारत के पूर्व कप्तान ने विराट कोहली, रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा के जाने से भारत को हुए अनुभव के नुकसान का भी ज़िक्र किया। उनकी गैर-मौजूदगी में अब युवा खिलाड़ियों के कंधों पर न्यूज़ीलैंड में चुनौती का सामना करने की ज़िम्मेदारी होगी।
 
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Tue, 25 Aug 2026 14:58:00 +0530

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