Hockey World Cup 2026: अर्जेंटीना से हारकर भारत बाहर, 51 साल से पदक का इंतजार बरकरार
भारतीय हॉकी टीम पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हो गई है. अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 से हार के बाद टीम का सफर समाप्त हो गया. 51 साल से पदक का इंतजार और लंबा हो गया है.
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Larsen & Toubro को Middle East में मिला ₹15,000 करोड़ का Mega Project, बढ़ेगी कंपनी की ताकत
लार्सन एंड टुब्रो को मध्य पूर्व में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा ठेका मिला है। कंपनी ने बताया कि यह परियोजना गैस संपीड़न संयंत्रों और उनसे जुड़ी आधारभूत सुविधाओं के निर्माण से संबंधित है। यह ठेका वित्त वर्ष 2025-26 में जारी किए गए कार्यादेश पत्र के माध्यम से दिया गया था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, परियोजना को लार्सन एंड टुब्रो की ऊर्जा हाइड्रोकार्बन ऑनशोर इकाई इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण के आधार पर पूरा करेगी। इसके तहत मध्य पूर्व में नई तटीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जहां खट्टी गैस के प्रसंस्करण के लिए जरूरी संयंत्र लगाए जाएंगे।
इस परियोजना में गैस प्रवेश सुविधाएं, गैस संपीड़न प्रणाली, संघनित द्रव और उत्पादित पानी के प्रबंधन की व्यवस्था, प्रोपेन प्रशीतन प्रणाली तथा अन्य सहायक सुविधाएं शामिल हैं। गैस संपीड़न संयंत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी का विद्युत पारेषण एवं वितरण कारोबार 230 किलोवोल्ट क्षमता वाले दो अतिरिक्त उच्च वोल्टेज विद्युत उपकेंद्र भी तैयार करेगा।
बता दें कि लार्सन एंड टुब्रो 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के ठेकों को अति-बड़े ठेके की श्रेणी में रखती है। हालांकि कंपनी ने इस परियोजना की सटीक कीमत और मध्य पूर्व के ग्राहक का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। कंपनी के मुताबिक, परियोजना को मिला कार्यादेश उसके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और इससे गैस संपीड़न क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
लार्सन एंड टुब्रो ऊर्जा हाइड्रोकार्बन ऑनशोर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख ई. एस. सत्यनारायण ने कहा कि यह ठेका बड़े और जटिल हाइड्रोकार्बन संयंत्रों को पूरा करने के कंपनी के अनुभव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि खट्टी गैस से जुड़ी कठिन परियोजनाओं के लिए एकीकृत समाधान उपलब्ध कराने की कंपनी की क्षमता को इससे और मजबूती मिलेगी।
गौरतलब है कि खट्टी गैस में हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी अशुद्धियां मौजूद होती हैं, जिसके कारण इसके प्रसंस्करण के लिए सामान्य गैस संयंत्रों की तुलना में अधिक जटिल और सुरक्षित व्यवस्था की जरूरत होती है। ऐसे में इस तरह की परियोजनाओं का मिलना लार्सन एंड टुब्रो की तकनीकी और निर्माण क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लार्सन एंड टुब्रो की हाइड्रोकार्बन कारोबार इकाई बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कार्य करती है। कंपनी ने अलग-अलग देशों में तेल शोधन संयंत्रों के विस्तार, पेट्रो रसायन परिसर, गैस प्रसंस्करण संयंत्र, उर्वरक संयंत्र, तरलीकृत प्राकृतिक गैस टर्मिनल और लंबी दूरी की पाइपलाइन जैसी परियोजनाएं पूरी की हैं।
इस नए ठेके में कंपनी की हाइड्रोकार्बन विशेषज्ञता के साथ विद्युत पारेषण एवं वितरण कारोबार की क्षमता भी एक साथ इस्तेमाल होगी। सोमवार सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर बंबई शेयर बाजार में लार्सन एंड टुब्रो के शेयर करीब 4,100 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। नए ठेके से कंपनी की मध्य पूर्व में ऊर्जा क्षेत्र की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह परियोजना कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार और बड़े ऊर्जा ढांचे में उसकी भूमिका को और विस्तार देने वाली मानी जा रही है।
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