Larsen & Toubro को Middle East में मिला ₹15,000 करोड़ का Mega Project, बढ़ेगी कंपनी की ताकत
लार्सन एंड टुब्रो को मध्य पूर्व में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा ठेका मिला है। कंपनी ने बताया कि यह परियोजना गैस संपीड़न संयंत्रों और उनसे जुड़ी आधारभूत सुविधाओं के निर्माण से संबंधित है। यह ठेका वित्त वर्ष 2025-26 में जारी किए गए कार्यादेश पत्र के माध्यम से दिया गया था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, परियोजना को लार्सन एंड टुब्रो की ऊर्जा हाइड्रोकार्बन ऑनशोर इकाई इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण के आधार पर पूरा करेगी। इसके तहत मध्य पूर्व में नई तटीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जहां खट्टी गैस के प्रसंस्करण के लिए जरूरी संयंत्र लगाए जाएंगे।
इस परियोजना में गैस प्रवेश सुविधाएं, गैस संपीड़न प्रणाली, संघनित द्रव और उत्पादित पानी के प्रबंधन की व्यवस्था, प्रोपेन प्रशीतन प्रणाली तथा अन्य सहायक सुविधाएं शामिल हैं। गैस संपीड़न संयंत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी का विद्युत पारेषण एवं वितरण कारोबार 230 किलोवोल्ट क्षमता वाले दो अतिरिक्त उच्च वोल्टेज विद्युत उपकेंद्र भी तैयार करेगा।
बता दें कि लार्सन एंड टुब्रो 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के ठेकों को अति-बड़े ठेके की श्रेणी में रखती है। हालांकि कंपनी ने इस परियोजना की सटीक कीमत और मध्य पूर्व के ग्राहक का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। कंपनी के मुताबिक, परियोजना को मिला कार्यादेश उसके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और इससे गैस संपीड़न क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
लार्सन एंड टुब्रो ऊर्जा हाइड्रोकार्बन ऑनशोर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख ई. एस. सत्यनारायण ने कहा कि यह ठेका बड़े और जटिल हाइड्रोकार्बन संयंत्रों को पूरा करने के कंपनी के अनुभव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि खट्टी गैस से जुड़ी कठिन परियोजनाओं के लिए एकीकृत समाधान उपलब्ध कराने की कंपनी की क्षमता को इससे और मजबूती मिलेगी।
गौरतलब है कि खट्टी गैस में हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी अशुद्धियां मौजूद होती हैं, जिसके कारण इसके प्रसंस्करण के लिए सामान्य गैस संयंत्रों की तुलना में अधिक जटिल और सुरक्षित व्यवस्था की जरूरत होती है। ऐसे में इस तरह की परियोजनाओं का मिलना लार्सन एंड टुब्रो की तकनीकी और निर्माण क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लार्सन एंड टुब्रो की हाइड्रोकार्बन कारोबार इकाई बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कार्य करती है। कंपनी ने अलग-अलग देशों में तेल शोधन संयंत्रों के विस्तार, पेट्रो रसायन परिसर, गैस प्रसंस्करण संयंत्र, उर्वरक संयंत्र, तरलीकृत प्राकृतिक गैस टर्मिनल और लंबी दूरी की पाइपलाइन जैसी परियोजनाएं पूरी की हैं।
इस नए ठेके में कंपनी की हाइड्रोकार्बन विशेषज्ञता के साथ विद्युत पारेषण एवं वितरण कारोबार की क्षमता भी एक साथ इस्तेमाल होगी। सोमवार सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर बंबई शेयर बाजार में लार्सन एंड टुब्रो के शेयर करीब 4,100 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। नए ठेके से कंपनी की मध्य पूर्व में ऊर्जा क्षेत्र की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह परियोजना कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार और बड़े ऊर्जा ढांचे में उसकी भूमिका को और विस्तार देने वाली मानी जा रही है।
AI Startup Perplexity में निवेश की तैयारी में Nvidia, 30 अरब डॉलर के पार पहुंचेगा कंपनी का Valuation
रविवार को सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तेजी से पहचान बना रही कंपनी पर्प्लेक्सिटी में एनवीडिया निवेश करने पर बातचीत कर रही है। यह निवेश ऐसे समय में संभावित है, जब पर्प्लेक्सिटी नए वित्तपोषण दौर के जरिए कंपनी का मूल्यांकन 30 अरब डॉलर से अधिक करने की तैयारी में है।
द इंफॉर्मेशन की रिपोर्ट में मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित निवेश पर्प्लेक्सिटी के नए हिस्सेदारी आधारित वित्तपोषण दौर का हिस्सा होगा। यदि यह सौदा आगे बढ़ता है तो कंपनी का मूल्यांकन पिछले साल के वित्तपोषण दौर की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, पर्प्लेक्सिटी की सालाना अनुमानित आय में भी इस साल तेज बढ़ोतरी हुई है। साल की शुरुआत में जहां कंपनी की सालाना आय 25 करोड़ डॉलर से कम थी, वहीं अब यह बढ़कर 75 करोड़ डॉलर से अधिक हो गई है। आय में इस बढ़ोतरी के पीछे पर्प्लेक्सिटी कंप्यूटर की भी अहम भूमिका बताई जा रही है।
पर्प्लेक्सिटी कंप्यूटर एक बादल आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल पेशेवर लोग कंप्यूटर पर किए जाने वाले कई कामों को स्वचालित करने के लिए कर सकते हैं। कंपनी का बढ़ता कारोबार इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाओं के लिए बाजार में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद पर्प्लेक्सिटी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं एनवीडिया की ओर से भी तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में निवेश की अंतिम शर्तों और रकम को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि पर्प्लेक्सिटी का मूल्यांकन पिछले कुछ समय में तेजी से बढ़ा है। पिछले साल सितंबर में द इंफॉर्मेशन ने बताया था कि कंपनी ने 20 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर वित्तपोषण पूरा किया था। अब प्रस्तावित नया दौर इस मूल्यांकन को काफी ऊपर ले जा सकता है।
पर्प्लेक्सिटी ने इस साल माइक्रोसॉफ्ट के साथ 75 करोड़ डॉलर का समझौता भी किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के तहत पर्प्लेक्सिटी माइक्रोसॉफ्ट की एजर क्लाउड सेवा का इस्तेमाल करेगी। इससे कंपनी के तकनीकी ढांचे और विस्तार को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बता दें कि पर्प्लेक्सिटी के प्रमुख निवेशकों में एनवीडिया के अलावा अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और जापान का सॉफ्टबैंक समूह भी शामिल हैं। कंपनी के प्रमुख अरविंद श्रीनिवास ने जून में सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि पर्प्लेक्सिटी 2028 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा था कि यह फैसला एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियों के संभावित बाजार प्रदर्शन से प्रभावित नहीं होगा।
एनवीडिया के संभावित निवेश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में उसकी रणनीतिक दिलचस्पी के तौर पर भी देखा जा रहा है। एनवीडिया पहले से ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए जरूरी उन्नत चिप और कंप्यूटिंग ढांचा उपलब्ध कराने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। पर्प्लेक्सिटी में निवेश से दोनों कंपनियों के बीच भविष्य में तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। हालांकि, अंतिम सौदा और निवेश की शर्तों की पुष्टि होना अभी बाकी हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi





