8 सितंबर तक टला तमिलनाडु की 5 सीटों का उपचुनाव, थलपति विजय को हाई कोर्ट से बड़ा झटका
मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा की पांच सीटों पर होने वाले उपचुनावों पर लगी अंतरिम रोक को 8 सितंबर तक बढ़ा दिया। इनमें मुख्यमंत्री विजय द्वारा जीती गई एक सीट भी शामिल है।
अयोध्या के किसानों के लिए मखाने की खेती बनी कमाई का नया जरिया, सरकार दे रही 50% अनुदान
उत्तर प्रदेश के अयोध्या और आसपास के तराई क्षेत्रों में किसानों के लिए मखाने की खेती आमदनी बढ़ाने का नया विकल्प बनकर उभर रही है. खासकर ऐसे इलाके जहां जलभराव रहता है या तालाब और पोखरों की पर्याप्त उपलब्धता है, वहां किसान पारंपरिक फसलों के साथ मखाना उत्पादन की ओर रुख कर सकते हैं. किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यान विभाग की मखाना विकास योजना के तहत खेती की लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देने की व्यवस्था की गई है.
जलभराव वाले क्षेत्रों में खेती का बेहतर विकल्प
मखाने की खेती सामान्य खेतों के मुकाबले पानी वाले क्षेत्रों में की जाती है. अयोध्या के रुदौली समेत तराई क्षेत्र में वेटलैंड और ताल-पोखरों की मौजूदगी को देखते हुए इसके उत्पादन की संभावनाएं अच्छी मानी जा रही हैं.
ऐसे क्षेत्रों में जहां लगातार जलभराव के कारण पारंपरिक फसलों की खेती चुनौतीपूर्ण होती है, वहां मखाना किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकता है. इससे किसानों को गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत भी कम हो सकती है.
खेती की लागत का आधा हिस्सा मिलेगा
सरकार की मखाना विकास योजना किसानों के लिए इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि एक हेक्टेयर तालाब में मखाना उत्पादन की स्वीकृत लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे किसानों पर शुरुआती निवेश का दबाव कम होगा.
सरकार का जोर केवल खेती शुरू कराने पर नहीं है, बल्कि किसानों को उन्नत तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों से जोड़ने पर भी है. किसानों को फसल प्रबंधन और तकनीकी पहलुओं से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने की बात भी कही गई है.
तालाब नहीं है तो भी रास्ता मौजूद
मखाना उत्पादन के इच्छुक ऐसे किसान जिनके पास पहले से तालाब नहीं है, उनके लिए खेत तालाब योजना उपयोगी हो सकती है. इसके तहत खेत में तालाब बनवाने के लिए भूमि संरक्षण विभाग से सहायता का प्रावधान है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार तालाब निर्माण के लिए अधिकतम 52,500 रुपये तक अनुदान दिया जा सकता है.
इस तरह किसान तालाब निर्माण और मखाना उत्पादन से जुड़ी अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपनी शुरुआती लागत को कम करने की कोशिश कर सकते हैं.
31 मार्च तक आवेदन का मौका
मखाना विकास योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 31 मार्च तक आवेदन किए जा सकते हैं. इच्छुक किसानों को संबंधित सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है.
हालांकि, आवेदन करने से पहले किसानों को स्थानीय उद्यान और भूमि संरक्षण विभाग से पात्रता, स्वीकृत लागत और जरूरी दस्तावेजों की ताजा जानकारी जरूर हासिल करनी चाहिए.
बाजार में बढ़ रही मखाने की मांग
मखाना अब केवल पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं रह गया है. इसे पौष्टिक भोजन और हेल्दी स्नैक के तौर पर भी बाजार में तेजी से लोकप्रियता मिल रही है. यही वजह है कि इसकी खेती, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को लेकर सरकारी स्तर पर भी जोर बढ़ा है.
केंद्र सरकार ने मखाना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना मंजूर की है. इसके तहत उत्पादन, बेहतर बीज, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने की योजना है.
अयोध्या के किसानों को मिल सकता है फायदा
केंद्र की योजना के तहत उत्तर प्रदेश में भी मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. वर्ष 2025-26 में राज्य के कई जिलों के किसानों को योजना से लाभ मिला, जिसमें अयोध्या के 200 किसान भी शामिल थे.
इससे संकेत मिलता है कि मखाने की खेती अब केवल बिहार जैसे पारंपरिक उत्पादक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है. उत्तर प्रदेश के उपयुक्त जलक्षेत्रों में भी इसे नए कृषि विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है.
खेती के साथ प्रोसेसिंग पर भी जोर
मखाना उत्पादन से किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल फसल उगाना पर्याप्त नहीं है. इसके बाद सफाई, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बेहतर बाजार तक पहुंच भी महत्वपूर्ण है. केंद्र की योजना में इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है.
अगर अयोध्या के किसान सरकारी सहायता के साथ आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से जुड़ते हैं, तो मखाना उनके लिए पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का मजबूत जरिया बन सकता है.
किसानों के लिए नई उम्मीद
अयोध्या में मखाना खेती को बढ़ावा देने की पहल जलभराव वाले क्षेत्रों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में भी महत्वपूर्ण है. अनुदान, तालाब निर्माण में सहायता, प्रशिक्षण और बढ़ती बाजार मांग—इन सभी को एक साथ देखा जाए तो मखाना किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकता है.
अब जरूरत इस बात की है कि इच्छुक किसान योजना की पात्रता और स्थानीय परिस्थितियों की सही जानकारी लेकर आगे बढ़ें, ताकि मखाने की खेती उनके लिए वास्तव में आय बढ़ाने वाला टिकाऊ विकल्प साबित हो सके.
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