ममता बनर्जी बोलीं- राजनीति से संन्यास नहीं लूंगी:कहा- भाजपा को हाशिए पर धकेलने तक नहीं रुकूंगी
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि वह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा को हाशिए पर पहुंचाने तक वह नहीं रुकेंगी। ममता बनर्जी ने कहा, “मैं राजनीति से संन्यास नहीं ले रही हूं। जब तक भाजपा को गुमनामी में नहीं धकेल दूंगी, तब तक नहीं रुकूंगी।”
देश में चीनी की कमी नहीं, जल्द कीमतें घटेंगी:ISMA बोला-त्योहारों के लिए पर्याप्त स्टॉक; सरकार ने 10 लाख टन इंपोर्ट की मंजूरी दी थी
देशभर में चीनी की कीमतों में आई हालिया तेजी के बीच इंडस्ट्री बॉडी इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने स्थिति साफ की है। ISMA ने सोमवार को कहा कि देश में चीनी की कमी नहीं है और आने वाले दिनों में खुदरा बाजारों में कीमतें कम होने की उम्मीद है। पिछले एक महीने में चीनी 20% से ज्यादा महंगी होकर ₹56 से ₹60 प्रति किलो हो गई हैं। इसके बाद सरकार ने राहत देने के लिए ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की मंजूरी दी थी। सट्टेबाजी और कम पैदावार से बढ़े दाम ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने बताया कि हाल ही में कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण सट्टेबाजी के तहत की गई जमाखोरी और मौसम से जुड़ी समस्याओं के चलते कम उत्पादन होना है। उन्होंने कहा, "भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है और सप्लाई की बुनियादी स्थिति पूरी तरह मजबूत है। आगामी त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को मंजूरी खुदरा और थोक बाजारों में चीनी के दाम ₹56 से ₹60 प्रति किलो पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के बिना किसी सीमा शुल्क आयात की अनुमति दी है, ताकि बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों पर काबू पाया जा सके। NFCSF बोला- घबराने की कोई जरूरत नहीं नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज ने भी घरेलू सप्लाई को पर्याप्त बताया है। NFCSF के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनवरे ने कहा कि फेडरेशन ने 2025-26 सीजन के लिए अपने नेट शुगर प्रोडक्शन के अनुमान को 2.79 करोड़ टन पर बरकरार रखा है। इसमें से करीब 24 लाख टन चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की गई है। भारत में हर साल करीब 3 15 अक्टूबर से पहले आ सकती हैं पहली खेप NFCSF के अनुसार, इंपोर्टेड चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती है। प्रकाश नाईकनवरे ने बताया कि थाईलैंड खुद चीनी की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में अभी ब्राजील ही एकमात्र विकल्प है। ब्राजील से जहाजों को भारत आने में 40 से 45 दिन का समय लगता है, जिसके बाद इसे मिलों तक पहुंचाया जाता है। डीजीएफटी की मंजूरी, लेटर ऑफ क्रेडिट और पोर्ट कंजेशन पर यह टाइमलाइन निर्भर करेगी। 31 अक्टूबर की डेडलाइन में छूट संभव सरकार की गई 31 अक्टूबर की डेडलाइन पर नाईकनवरे ने कहा कि इसमें छूट मिल सकती है। जो शिपमेंट पहले से रास्ते में होंगे, उन्हें तय तारीख के बाद भी आने की अनुमति मिलने की पूरी संभावना है। तटीय राज्यों को पहले मिलेगी राहत महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों को इंपोर्टेड रॉ शुगर पहले मिलेगी। वहीं उत्तर भारत के लैंडलॉक्ड राज्यों तक इन बंदरगाहों से रेल या सड़क मार्ग के जरिए चीनी पहुंचाई जाएगी। कोटा होने के बावजूद एक्सपोर्ट घटा नाईकनवरे ने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अनुकूल न होने के कारण भारत ने 20 लाख टन के तय कोटे में से केवल 8 लाख टन चीनी का ही निर्यात किया था। अगर कोई पाबंदी न होती, तब भी निर्यात 10 लाख टन से ज्यादा नहीं जाता। केंद्र सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक लगा रखी है। नॉलेज बॉक्स: रॉ शुगर से कैसे बनेगी खाने वाली चीनी? रिफाइनिंग प्रोसेस: ब्राजील से आने वाली रॉ शुगर को सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे देश की रिफाइनरियों और शुगर मिलों में प्रोसेस करके सफेद दानेदार चीनी में बदला जाएगा, जिसके बाद यह रिटेल मार्केट में आएगी।
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