ऋषभ पंत निकले एमएस धोनी से आगे, बन गए भारत के नंबर-1 विकेटकीपर-बल्लेबाज
Rishabh Pant Record: श्रीलंका के साथ खेले जा रहे कोलंबो टेस्ट मैच में ऋषभ पंत ने 63 रनों की अर्धशतकीय पारी खेली. इसी के साथ पंत ने कईयों रिकॉर्ड बनाए हैं. इस दौरान ऋषभ पंत ने पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी को पीछे छोड़कर एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया है. पंत ने विदेशी/न्यूट्रल टेस्ट में भारतीय विकेटकीपर के तौर पर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया और एमएस धोनी को पीछे छोड़ दिया. उनके नाम अब इस तरह के मुकाबलों में 2,501 रन हैं, जबकि धोनी के 2,496 रन थे.
उत्तराखंड में रोपवे नेटवर्क का होगा विस्तार, CM धामी ने की 50 परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा
Uttarakhand Ropeway: उत्तराखंड में पर्यटन, तीर्थाटन और पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार रोपवे परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्वतमाला परियोजना के तहत प्रस्तावित 50 रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही जिन परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है, उनमें हो रही देरी के कारणों की समीक्षा कर नई समयसीमा तय करने को कहा गया है.
मुख्यमंत्री ने शासकीय आवास पर आयोजित बैठक में अधिकारियों से कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में रोपवे सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं. रोपवे के जरिए दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने के साथ ही यात्रा का समय भी कम होगा. इससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
उत्तराखण्ड में रोपवे परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से शासकीय आवास पर बैठक के दौरान अधिकारियों को पर्वतमाला परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित 50 रोपवे परियोजनाओं के संबंध में लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने एवं सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त परियोजनाओं में हो… pic.twitter.com/PILDlyj1mK
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 24, 2026
प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने की तैयारी
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की कई महत्वपूर्ण रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली. इनमें सोनप्रयाग-केदारनाथ, टनकपुर-पूर्णागिरि, काठगोदाम-नैनीताल, गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब, कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, देहरादून-मसूरी और जानकीचट्टी जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं.
इन परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और सुगम होने की उम्मीद है. खास तौर पर चारधाम और अन्य धार्मिक स्थलों पर हर साल बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए रोपवे एक वैकल्पिक और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध करा सकते हैं. सरकार का जोर ऐसी परियोजनाओं पर भी है, जिनके जरिए राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों को प्रमुख शहरों और पर्यटन केंद्रों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके. इससे पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होने के साथ स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.
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हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र में भी रोपवे पर फोकस
बैठक के दौरान हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड की मौजूदा कार्यप्रगति और भविष्य की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारियों के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजनाओं को सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनकी ग्राउंडिंग के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए. हर परियोजना की प्रगति की नियमित निगरानी और तय समयसीमा में काम पूरा करने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है.
रोपवे के साथ पार्किंग की भी होगी व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि रोपवे परियोजनाओं की योजना बनाते समय सिर्फ रोपवे निर्माण पर ध्यान न दिया जाए. प्रत्येक रोपवे परियोजना के साथ पर्याप्त पार्किंग सुविधा को भी समेकित योजना का हिस्सा बनाया जाए. इससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अपने वाहनों को सुरक्षित तरीके से पार्क करने की सुविधा मिलेगी और प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है. सरकार का उद्देश्य रोपवे परियोजनाओं को व्यापक परिवहन व्यवस्था से जोड़ना है, ताकि यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न हो.
निजी निवेश और PPP मॉडल को बढ़ावा
रोपवे परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दे रही है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लाइसेंसिंग और अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि निजी निवेशकों को परियोजनाओं में भाग लेने के लिए बेहतर माहौल मिल सके. उन्होंने PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के जरिए ज्यादा से ज्यादा रोपवे परियोजनाओं को जल्द धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों के साथ प्रभावी समन्वय करने को कहा. इसके लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
उत्तराखंड सरकार की यह पहल राज्य में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यटन, तीर्थाटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. अगर प्रस्तावित परियोजनाएं तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन का स्वरूप काफी बदल सकता है और राज्य के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान हो सकती है.
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