CM Hemant Soren ने UAE में फंसे झारखंड के मजदूर की सुरक्षित वापसी के दिए निर्देश
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों को संयुक्त अबर अमीरात में तीन महीने से अधिक समय से फंसे एक प्रवासी मजदूर की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। राज्य प्रवासन प्रकोष्ठ की टीम लीडर शिखा लाकड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों ने मजदूर की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम एशियाई देश में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया है।
लाकड़ा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “मुख्यमंत्री ने सोमवार सुबह हमें मजदूर की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। हमने संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों और विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है।” उन्होंने बताया कि प्रवासन प्रकोष्ठ ने गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के अटका गांव निवासी रमेश्वर दास की वापसी के लिए आवश्यक दस्तावेज भेज दिए हैं। फंसे हुए प्रवासी मजदूर के परिजनों ने बताया कि वह रोजगार की तलाश में एक ठेकेदार के माध्यम से इस साल 6 मई को पर्यटक वीजा पर दुबई गया था।
अधिकारी ने कहा, “परिजनों का दावा है कि पिछले पांच दिनों से उनका रमेश्वर से संपर्क नहीं हो पाया है। उसका मोबाइल फोन बंद है, जिससे परिवार के लोग चिंतित हैं। उनका यह भी कहना है कि वह कर्ज लेकर विदेश गया था।” प्रवासी मजदूरों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने रविवार को गांव में रमेश्वर के परिवार से मुलाकात की थी।
उन्होंने परिवार की गुहार मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को टैग किया था।
Hemant Soren के गांव Nemra में छात्र नेता की मुहिम का विरोध, सड़क जाम
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गांव नेमरा के निवासियों ने सोमवार को छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की प्रस्तावित परीक्षा सुधार मुहिम के विरोध में सड़क जाम कर दी। ग्रामीणों को आशंका है कि महतो का संगठन गांव में मुख्यमंत्री के पुतले जला सकता है। पारंपरिक हथियारों और लाठियों से लैस ग्रामीणों ने रामगढ़ जिले में गांव की ओर जाने वाली सड़क को जाम कर दिया।
महतो ‘जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच’ के बैनर तले भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू करने वाले हैं। इसके तहत गांव के लुकैयाटांड़ में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने के बाद अभियान की शुरुआत की जानी है। ग्रामीण बिरजू सोरेन ने कहा, “हमने महतो को नेमरा में प्रवेश करने से रोकने के लिए सड़क जाम की है।” उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि महतो गांव में मुख्यमंत्री के पुतले जलाएंगे।
जब उन्हें बताया गया कि महतो भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू करने आ रहे हैं, तो बिरजू सोरेन ने कहा, “महतो गांव के बाहर स्थित शिबू सोरेन की प्रतिमा के पास से अपना अभियान शुरू कर सकते हैं लेकिन हम उन्हें गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे।” महतो के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे कार्यक्रम स्थल की ओर पहुंच रहे हैं और ग्रामीणों के विरोध से उनके अभियान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले महतो ने कहा था कि निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती व्यवस्था की मांग को लेकर शुरू किया गया ‘जेपीएससी-जेएसएससी भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती’ अभियान राज्य के सभी 24 जिलों में चलाया जाएगा। महतो ने दावा किया, “राज्यभर के छात्र इस अभियान को लेकर उत्साहित और आशान्वित हैं।
उनका मानना है कि इससे उन्हें न्याय मिलेगा और भर्ती परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आएगी।” महतो 25 जुलाई को रांची में शुरू हुए भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 26 दिन चले छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और 2014 से राज्य लोक सेवा आयोग तथा एक आउटसोर्स एजेंसी द्वारा आयोजित 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए थे। हालांकि, उच्च न्यायालय ने 21 अगस्त को बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जरिए भर्ती किए गए लोगों की नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी थी।
अदालत ने 20 अगस्त को 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षाओं को रद्द करने वाली अधिसूचनाओं तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगा दी थी।
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