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सरकार ने गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाईं

नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने गेहूं से बने कई उत्पादों की निर्यात नीति में बदलाव करते हुए उन्हें प्रतिबंधित श्रेणी से मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। यह जानकारी विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में दी गई।

संशोधित नीति के तहत अब गेहूं या मेस्लिन आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेंहू के आटा के निर्यात की अनुमति बिना किसी प्रतिबंध के होगी।

घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने 2022 में गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए थे।

13 मई 2022 को गेहूं की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया गया था। इसके बाद उसी साल अगस्त में गेहूं के आटे के निर्यात पर भी प्रतिबंध लागू कर दिए गए।

यह फैसला रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक स्तर पर गेहूं की आपूर्ति में आए व्यवधान के बीच लिया गया था। इससे भारतीय गेहूं की विदेशी मांग बढ़ गई थी और घरेलू कीमतों पर भी दबाव बढ़ा था।

उस दौरान सरकार ने कहा था कि देश की 1.4 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गेहूं तथा गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए निर्यात प्रतिबंध जरूरी थे।

हालांकि, प्रतिबंध के बावजूद गेहूं से बने कुछ विशेष उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई थी।

इस साल फरवरी में सरकार ने बेहतर स्टॉक उपलब्धता का हवाला देते हुए 25 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं और अतिरिक्त 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी।

मई में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 2025-26 में 5.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 35.7732 करोड़ टन था।

फसलवार आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में चावल का उत्पादन 15.4024 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 15.0184 करोड़ टन से 38.4 लाख टन अधिक है।

वहीं, गेहूं का उत्पादन 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 11.7945 करोड़ टन की तुलना में 27.12 लाख टन अधिक है।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सिम्बायोटेक फार्मालैब आईपीओ: कंपनी के खिलाफ 150.79 करोड़ रुपए के कानूनी मामले लंबित, आरएचपी में हुआ खुलासा

नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। सिम्बायोटेक फार्मालैब के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में खुलासा हुआ है कि कंपनी के पास टैक्स से जुड़े छह मामले और एक अहम सिविल केस लंबित है और इसमें 150.79 करोड़ रुपए की राशि शामिल है।

सिम्बायोटेक फार्मालैब का 1,757 करोड़ रुपए का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) सोमवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला और यह 27 अगस्त तक खुला रहेगा। फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ने प्रति शेयर 938-988 रुपए का प्राइस बैंड तय किया है।

आरएचपी में कंपनी ने कहा कि उससे जुड़े कानूनी मामले अलग-अलग अदालतों और अधिकारियों के पास लंबित हैं। साथ ही, कहा कि ऐसे मामलों में कोई भी प्रतिकूल फैसला - चाहे अलग-अलग हो या कुल मिलाकर - उसकी प्रतिष्ठा, मैनेजमेंट के बने रहने, कारोबार, कामकाज के नतीजों, वित्तीय स्थिति और कैश फ्लो पर बुरा असर डाल सकता है।

आधिकारिक दस्तावजों में कंपनी के डायरेक्टर, सब्सिडियरी और प्रमोटर से जुड़े कानूनी मामलों की जानकारी भी दी गई है। प्रमोटरों को छोड़कर, डायरेक्टरों के खिलाफ दो आपराधिक और 11 टैक्स से जुड़े मामले चल रहे हैं, जिनमें कुल 41.2 लाख रुपए की रकम शामिल है।

कंपनी की सब्सिडियरी भी कानूनी मामलों में शामिल हैं। सब्सिडियरी के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है, जिसमें कुल 36.7 लाख रुपए की रकम शामिल है। आरएचपी में सब्सिडियरी से जुड़े एक अहम सिविल मुकदमे की जानकारी भी दी गई है।

प्रमोटरों के खिलाफ एक आपराधिक मामला, एक टैक्स से जुड़ा मामला और एक अहम सिविल केस की जानकारी दी गई है।

कंपनी की एक सब्सिडियरी, नोविया फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक अहम सिविल केस में शामिल है। इस सब्सिडियरी ने ड्राफ्ट पीतमपुरा मास्टर प्लान, 2035 और रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर व मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़े नोटिफिकेशन्स की वैधता को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका दायर की थी।

आरएचपी के अनुसार, हाई कोर्ट ने 6 अप्रैल, 2023 और 22 अगस्त, 2023 के अपने आदेशों में संबंधित नोटिफिकेशन के अमल पर रोक लगा दी और नोटिस जारी किए; यह मामला अभी भी लंबित है।

कंपनी ने बताई गई कानूनी कार्यवाही को अपनी मटेरियलिटी पॉलिसी के अनुसार वर्गीकृत किया है और कहा है कि बताई गई रकम उतनी ही है जितनी पता लगाई जा सकती है और जिसकी गणना की जा सकती है।

--आईएएनएस

एबीएस

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