सफलता की कहानी: 'जितनी बड़ी मेहनत, उतना बड़ा उद्यम'- कार्तिक पांडेय की प्रेरणादायक यात्रा
Namaste Saarthi: पहाड़ों की हसीन वादियों में जब कोई नया सपना आकार लेता है, तो वह केवल एक इंसान की जिंदगी नहीं बदलता बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर संवार देता है. पिथौरागढ़ के रहने वाले कार्तिक पांडेय की कहानी भी कुछ ऐसी ही उम्मीद जगाती है. एक सामान्य परिवार में पले-बढ़े कार्तिक ने अपने आसपास की मुश्किलों को देखा, समझा और फिर उन्हें दूर करने का मजबूत इरादा बना लिया. उनके पिता लंबे समय से टैक्सी चलाने का काम करते रहे हैं. बचपन के दिनों में कार्तिक भी अपने पिता के साथ गाड़ियों में बैठकर दूर-दराज के रास्तों पर जाया करते थे. सफर के इन्हीं पलों में उन्होंने महसूस किया कि पिथौरागढ़ और चम्पावत की खूबसूरत वादियों में आने वाले सैलानियों को कितनी परेशानियों से गुजरना पड़ता है. सही जानकारी न होने और बिचौलियों के चक्कर में फंसकर यात्रियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था. इसी अनुभव ने कार्तिक के भीतर एक नए विचार का बीज बो दिया.
समस्या से उपजा एक अनोखा विचार
पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाले हजारों सैलानियों को अक्सर मनमाने किराए पर गाड़ियां मिलती थीं. इसके अलावा साफ-सुथरे होटल और सच्चे स्थानीय गाइड खोजना उनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता था. बिचौलियों के दखल की वजह से पर्यटकों को जेब ढीली करनी पड़ती थी, जिससे उनका पूरा सफर खराब हो जाता था. कार्तिक कई सालों से सोच रहे थे कि कैसे इस व्यवस्था को सुधारा जाए ताकि बाहर से आने वाले मेहमानों को सुकून मिल सके और स्थानीय लोगों को भी उनका वाजिब हक मिले. वे चाहते थे कि तकनीक की मदद से एक ऐसा रास्ता बनाया जाए, जहां सब कुछ साफ और पारदर्शी हो.
देवभूमि उद्यमिता योजना ने दिखाई नई राह
कार्तिक के मन में विचार तो था, लेकिन उसे जमीन पर कैसे उतारा जाए, यह समझ नहीं आ रहा था. साल 2025 में उनकी इस उलझन का हल निकल आया. उनके कॉलेज में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद की ओर से एक खास उद्यमिता बूटकैंप का आयोजन किया गया. यह बूटकैंप राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच पर आधारित देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत हुआ था. इस प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेना कार्तिक के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. यहां उन्हें सिखाया गया कि एक छोटे से विचार को बड़े कारोबार में कैसे बदला जाता है.
बिजनेस मॉडल और डिजिटल तकनीक की समझ
बूटकैंप के दौरान कार्तिक ने कारोबार का पूरा ताना-बाना समझा. उन्होंने जाना कि किस तरह ग्राहकों की जरूरत को पहचानकर बिजनेस मॉडल तैयार किया जाता है. उन्हें यह भी सिखाया गया कि इंटरनेट, वेबसाइट और मोबाइल मंचों के जरिए दूर बैठे ग्राहकों तक अपनी बात कैसे पहुंचाई जा सकती है. किसी नए काम को शुरू करने और उसे कानूनी व व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ाने के गुर उन्होंने विशेषज्ञों से सीखे. इसी मजबूत तैयारी के बाद कार्तिक ने 'नमस्ते सारथी' नाम से अपना ऑनलाइन मंच शुरू किया.
एक ही जगह पर सफर की सारी सुविधाएं
'नमस्ते सारथी' की शुरुआत होते ही पर्यटकों को एक बड़ी राहत मिली. अब सैलानियों को गाड़ी, होटल और गाइड के लिए अलग-अलग भटकने की जरूरत नहीं रही. वे एक ही जगह से अपनी पूरी यात्रा की योजना बनाने लगे. इससे कीमतों में पारदर्शिता आई और यात्रियों का भरोसा बढ़ा. हालांकि, शुरुआती दिनों में कार्तिक को अपने इस काम को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा. इस मोड़ पर उन्होंने हार मानने के बजाय फिर से विशेषज्ञों से सलाह ली.
गुरुओं का साथ और कारोबार का विस्तार
कार्तिक को सही दिशा दिखाने में एलएसएम पिथौरागढ़ की डॉ. रुचिता पंघरिया ने बहुत मदद की. वे कॉलेज में इस योजना की नोडल अधिकारी भी हैं. उन्होंने कार्तिक के साथ लगातार बैठकें कीं और उनके काम को तराशने में मदद की. योजना के जानकारों ने कार्तिक को डिजिटल प्रचार और ग्राहकों से जुड़ने के नए तौर-तरीके सिखाए. इस सही मार्गदर्शन का असर जल्द ही दिखाई देने लगा और नमस्ते सारथी का दायरा कुमाऊं क्षेत्र में तेजी से फैलने लगा.
15 बसों का नेटवर्क और आगे की तैयारी
आज स्थिति यह है कि नमस्ते सारथी के साथ पंद्रह बसों का बड़ा नेटवर्क जुड़ चुका है. बिचौलियों का खेल खत्म होने से यात्रियों को कम खर्च में बेहतरीन सेवाएं मिल रही हैं. साथ ही साथ, इलाके के वाहन चालकों और होटल वालों को सीधे ग्राहक मिलने लगे हैं. अपनी इस कामयाबी के बाद भी कार्तिक रुके नहीं हैं. खुद को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने साल 2026 में योजना के आवासीय बूटकैंप में फिर से भाग लिया. उनका मानना है कि जब तक वे सीखते रहेंगे, उनका काम आगे बढ़ता रहेगा.
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी यह पहल
कार्तिक की यह यात्रा दर्शाती है कि अगर सही समय पर युवाओं को मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिल जाए, तो वे कमाल कर सकते हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी मानना है कि इस योजना का असली मकसद युवाओं की सोच को कारोबार में बदलना है ताकि राज्य का युवा नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने वाला बने. कार्तिक पांडेय का यह प्रयास आज पूरे उत्तराखंड के लिए एक मिसाल बन चुका है.
यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में रक्षाबंधन पर सीएम धामी का बहनों को बड़ा तोहफा, दो दिन बस यात्रा रहेगी एकदम मुफ्त
सरकार ने गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाईं
नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने गेहूं से बने कई उत्पादों की निर्यात नीति में बदलाव करते हुए उन्हें प्रतिबंधित श्रेणी से मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। यह जानकारी विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में दी गई।
संशोधित नीति के तहत अब गेहूं या मेस्लिन आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेंहू के आटा के निर्यात की अनुमति बिना किसी प्रतिबंध के होगी।
घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने 2022 में गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए थे।
13 मई 2022 को गेहूं की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया गया था। इसके बाद उसी साल अगस्त में गेहूं के आटे के निर्यात पर भी प्रतिबंध लागू कर दिए गए।
यह फैसला रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक स्तर पर गेहूं की आपूर्ति में आए व्यवधान के बीच लिया गया था। इससे भारतीय गेहूं की विदेशी मांग बढ़ गई थी और घरेलू कीमतों पर भी दबाव बढ़ा था।
उस दौरान सरकार ने कहा था कि देश की 1.4 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गेहूं तथा गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए निर्यात प्रतिबंध जरूरी थे।
हालांकि, प्रतिबंध के बावजूद गेहूं से बने कुछ विशेष उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई थी।
इस साल फरवरी में सरकार ने बेहतर स्टॉक उपलब्धता का हवाला देते हुए 25 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं और अतिरिक्त 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी।
मई में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 2025-26 में 5.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 35.7732 करोड़ टन था।
फसलवार आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में चावल का उत्पादन 15.4024 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 15.0184 करोड़ टन से 38.4 लाख टन अधिक है।
वहीं, गेहूं का उत्पादन 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 11.7945 करोड़ टन की तुलना में 27.12 लाख टन अधिक है।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









