बाघ-तेंदुए देखने हैं लेकिन कॉर्बेट वाली भीड़ नहीं चाहिए? तो उत्तराखंड की इस जगह को ट्रैवल लिस्ट में कर लें शामिल
Nandhaur Wildlife Sanctuary Must Visit: अगर कॉर्बेट और राजाजी जैसी जगहों की सफारी कई बार कर चुके हैं और अब भीड़ से दूर जंगल का असली रोमांच महसूस करना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का नंधौर वन्यजीव अभयारण्य आपको जरूर पसंद आएगा. घने साल के जंगल, शांत माहौल, नदियों का खूबसूरत संगम और बाघ-तेंदुए समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी इस जगह को खास बनाती है. नैनीताल के पास मौजूद यह कम चर्चित जंगल प्रकृति और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए किसी छिपे हुए खजाने जैसा है. यहां सफारी के दौरान जंगल की शांति, पक्षियों की आवाज और अचानक सामने आ जाने वाले सांभर या चीतल का नजारा सफर को यादगार बना सकता है.
दालचीनी में ना दाल है, ना चीनी, फिर कैसे पड़ा नाम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, हैरान कर देंगे फायदे
History Behind Dalchini Name : मसाले भोजन का स्वाद बढ़ा देते हैं. शुद्ध मसाले स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हैं. ऐसा ही एक मसाला है दालचीनी जो कि पेड़ की छाल जैसा दिखता है. दालचीनी खाने का स्वाद तो बढ़ाती ही है, सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसकी खुशबू और हल्की सी मिठास भोजन में स्वाद भर देती है. आयुर्वेद में इसे बेहद गुणकारी बताया गया है. आज दालचीनी आसानी से बाजार में मिल जाती है, लेकिन पुराने समय में इतनी बहुमूल्य थी कि चांदी से भी महंगी बिकती थी. दालचीनी को देखकर एक सवाल जरूर मन में आता अहि कि इसमें ना तो दाल है, और ना ही चीनी, फिर इस मसाले का नाम दालचीनी ही क्यों पड़ा? क्या है इसके पीछे की कहानी. असली-नकली दालचीनी में क्या अंतर होता है, इसके फायदे क्या हैं, आइये जानते हैं.
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