जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में हाल ही में हुई तोड़-फोड़ की जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यों वाली कमेटी के प्रमुख, प्रोफ़ेसर सुभा शंकर सरकार ने इस्तीफ़ा दे दिया है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि जल्द ही नए चेयरमैन की नियुक्ति की जाएगी। यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने यह कहते हुए पद छोड़ा कि वे ठीक से जांच नहीं कर पा रहे थे। यह कमेटी 20 अगस्त को कैंपस में ABVP और वामपंथी झुकाव वाले छात्र समूहों के बीच हुई झड़प के बाद बनाई गई थी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर यूनिवर्सिटी में बाहरी लोगों को लाने का आरोप लगाया था। सरकार का इस्तीफ़ा RSS से जुड़े शिक्षक संगठन, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ' के वाइस-चांसलर को उनकी नियुक्ति का विरोध करते हुए पत्र लिखने से कुछ घंटे पहले आया। जादवपुर यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक रजिस्ट्रार सेलिम बॉक्स मंडल ने कहा सरकार ने पैनल की अध्यक्षता करने में अपनी असमर्थता जताई है। जल्द ही एक नया चेयरपर्सन नियुक्त किया जाएगा।" सरकार ने शनिवार को एक ईमेल के ज़रिए वाइस चांसलर चिरंजीब भट्टाचार्य को सूचित किया कि वे यह ज़िम्मेदारी नहीं संभाल पाएंगे।
अपने फ़ैसले के बारे में बताते हुए सरकार ने कहा अपनी नियुक्ति के बारे में जानकारी मिलते ही मैंने जाधवपुर यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर को बता दिया था। मैं अभी दिल्ली में हूँ और इस जाँच के लिए उन लोगों से लगातार बातचीत करनी होगी जो घटना के समय कैंपस में मौजूद थे। नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस-चांसलर सरकार ने कहा कि यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने सुझाव दिया था कि वे ऑनलाइन कार्यवाही कर सकते हैं, लेकिन उन्हें लगा कि वर्चुअल बातचीत के ज़रिए ऐसी जाँच ठीक से नहीं हो पाएगी। 20 अगस्त की सुबह जाधवपुर यूनिवर्सिटी में ABVP के सदस्यों और वामपंथी झुकाव वाले छात्र समूहों के बीच झड़प हो गई। दोनों पक्षों ने कैंपस में बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए। RSS से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया कि SFI और DSO-DSF जैसे वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने 'फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी स्टूडेंट्स यूनियन' की बैठक की आड़ में झगड़ा शुरू किया। वहीं, वामपंथी समूहों ने ABVP पर कैंपस में बाहरी लोगों को लाने और तोड़-फोड़ करने का आरोप लगाया।
कथित तोड़-फोड़ के विरोध में छात्रों, शिक्षकों और नागरिकों के प्रदर्शन के बाद, यूनिवर्सिटी ने 21 अगस्त को एक कमिटी बनाने की घोषणा की। वाइस-चांसलर को लिखे पत्र में, RSS से जुड़े टीचर्स विंग ने कहा कि सरकार की नियुक्ति से प्रस्तावित जांच की "विश्वसनीयता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता" पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने मांग की कि स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए इस पैनल की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें।
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चंडीगढ़ में एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) की बरामदगी के मामले में पंजाब के रहने वाले तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि रविवार को यहां सेक्टर 43 स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनस के पीछे वन क्षेत्र से एक बैग के अंदर टिफिन बॉक्स में छिपाकर रखा गया आईईडी बरामद किया गया।
पुलिस ने बताया कि बरामदगी में पांच किलोग्राम जिलेटिन छड़ विस्फोटक, एक डेटोनेटर, पावर सोर्स, रिमोट से संचालित प्रणाली, एक पिस्तौल, एक मैगजीन और पांच कारतूस शामिल थे। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) से जुड़े संदिग्ध लोगों की गतिविधियों के संबंध में मिली विशेष खुफिया जानकारी के बाद की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तरन तारन के सरहाली गांव निवासी लवप्रीत सिंह (19), तरन तारन के देवबाथ गांव निवासी जशनप्रीत सिंह उर्फ जशनदीप (21) और अमृतसर के तरसिक्का गांव निवासी प्रभप्रीत सिंह उर्फ प्रभ (19) के रूप में हुई है।
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर विदेश में रह रहे बीकेआई के हैंडलर सतनाम उर्फ सत्ता नौशेरा के संपर्क में थे। सतनाम के निर्देश पर उन्होंने चंडीगढ़ में आतंक फैलाने के लिए आईईडी लगाने की साजिश रची थी। पुलिस ने बताया कि व्यापक नेटवर्क, विस्फोटक सामग्री के स्रोत और अन्य सहयोगियों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस ने विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
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