अरुणाचल के सरकारी ठेकों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI से मांगी नई रिपोर्ट
अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में कोर्ट ने CBI से नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. आरोप है कि कुछ सरकारी ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों को दिए गए. मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच कर रही है. सुनवाई के दौरान अरुणाचल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा. कोर्ट ने यह समय दे दिया.
सीबीआई को सौंपे गए 17 ट्रंक में दस्तावेज
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि करीब 17 ट्रंक में दस्तावेज CBI को सौंपे गए हैं. कोर्ट ने कहा कि इन दस्तावेजों को लेकर राज्य सरकार हलफनामा दाखिल करे. साथ ही CBI से भी पुष्टि कराने को कहा कि उसे सभी दस्तावेज मिल गए हैं. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सवाल उठाया कि CBI की शुरुआती जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर नियमित केस क्यों दर्ज नहीं किया गया.
पहले दस्तावेजों को हासिल करें CBI- सुप्रीम कोर्ट
इस पर कोर्ट ने कहा कि पहले CBI दस्तावेजों को हासिल करे और उनकी जांच करे. इसके बाद CBI ही बताएगी कि आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए. कोर्ट ने इस स्तर पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि सरकार ने केवल विवादित ठेकों के रिकॉर्ड नहीं, बल्कि सभी ठेकों से जुड़े दस्तावेज CBI को दे दिए हैं. उन्होंने चिंता जताई कि इससे जांच में देरी हो सकती है.
नई स्टेटस रिपोर्ट के के जरिए जांच का स्टेटस बताए सीबीआई
कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार ने ज्यादा दस्तावेज दे दिए हैं तो CBI उन्हें देखे. कोर्ट ने यह भी कहा कि हो सकता है जांच के दौरान किसी और मामले की जानकारी सामने आ जाए. इस मामले में कोर्ट पहले ही CBI जांच को लेकर दिशा-निर्देश दे चुका है. अब CBI को नई स्टेटस रिपोर्ट के जरिए बताना होगा कि जांच कहां तक पहुंची है और दस्तावेजों की जांच में क्या सामने आया. कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई करीब चार हफ्ते बाद होगी.
Rajasthan News: जयपुर के बाद जोधपुर का सरकारी स्कूल घेरे में, बच्चों को परोसा जा रहा खराब खाना, जांच शुरू
Rajasthan News: राजस्थान में भजनलाल शर्मा की सरकार है. भाजपा की यह सरकार प्रदेश में सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं चला रही है. मिड-डे मील व्यवस्था के तहत स्कूली बच्चों को तय मानकों के अनुसार, निर्धारित समय पर खाना उपलब्ध कराया जाता है. मगर बीते कुछ दिनों से राज्य अपने सरकारी स्कूल और वहां की स्थितियों को लेकर चर्चित है. जयपुर के कई स्कूल निशाने पर आए हैं, जहां न तो बच्चों के पास पीने का पानी है और कहीं-कहीं तो पर्याप्त कक्षाएं भी नहीं है. इसी बीच अब जोधपुर से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो की जांच-पड़ताल करने पर सामने आया कि यह मामला जोधपुर के शिकारगढ़ के एक सरकारी स्कूल का है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, स्कूल के बच्चों के लिए भोजन तैयार कर उसे सप्लाई के लिए ले जाया जा रहा था. इसी दौरान एक युवक की नजर भोजन की कथित खराब स्थिति पर पड़ी और उसने इस खाने का वीडियो बना लिया. इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया.
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क्या दिखा वायरल वीडियो में?
वायरल वीडियो में कथित तौर पर ऐसे बर्तन दिखाई दे रहे हैं, जिनमें सब्जियां रखी हुई हैं. साथ ही रोटियां भी दिखाई दे रही हैं, जिनकी स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों को उपलब्ध कराया जाने वाला भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया गया था या कि नहीं. स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पौष्टिक खाने की व्यवस्था का उद्देश्य उन्हें पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराना है. ऐसे में अगर भोजन की क्वालिटी या साफ-सफाई में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है तो यह एक गंभीर मामला बन सकता है.
शिक्षा विभाग ने शुरू करवाई जांच
वीडियो सामने आने के बाद ही राजस्थान शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. जोधपुर जिला शिक्षा अधिकारी हिम्मत सिंह पवार के मुताबिक, वीडियो शिकारगढ़ के स्कूल का ही है. वीडियो में दिखने वाली भोजन व्यवस्था और लगाए गए आरोपों की वास्तविकता का पता लगाने के लिए जांच कराई जा रही है. जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भोजन तैयार करने और स्कूल तक पहुंचाने के लिए निर्धारित नियम और गाइडलाइन हैं. बच्चों के लिए मिड-डे मील इन्हीं मानकों के आधार पर तैयार और वितरित किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर जांच में किसी तरह की कोई लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
भोजन तैयार करने वाली संस्था को भेजा गया नोटिस
इस मामले में खाना तैयार कर सप्लाई करने वाली संस्था को भी नोटिस भेजा गया है. संस्था से वायरल वीडियो में सामने आई स्थिति को लेकर जवाब मांगा गया है. शिक्षा विभाग यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि भोजन तैयार करने से लेकर स्कूल तक पहुंचाने के दौरान निर्धारित स्वच्छता नियमों का पालन किया गया था या नहीं.
जांच कमेटी करेगी मौके की पड़ताल
ADEO एलीमेंट्री चंदन सिंह का कहना है कि वीडियो सामने आने के बाद से ही मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है. यह समिति स्कूल पहुंचकर मौके की स्थिति, भोजन की गुणवत्ता और पूरी व्यवस्था की जांच कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक जांच रिपोर्ट जल्द सामने आने की उम्मीद है. रिपोर्ट में यदि किसी व्यक्ति, संस्था या स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी,फिलहाल विभाग की नजर जांच रिपोर्ट पर है.
वायरल वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगी. फिलहाल शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित संस्था से जवाब मांगा गया है. अब यह देखना होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है.
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