Saffron Purity: बाजार से लाई केसर असली है या नकली? इन आसान तरीकों से मिनटों में करें पहचान
Saffron Purity Test: केसर की कुछ लड़ियां खाने में डालते ही खुशबू, रंग और स्वाद बदल देती हैं। यही वजह है कि यह दुनिया के महंगे मसालों में शामिल है। लेकिन इसकी ऊंची कीमत के कारण बाजार में नकली या मिलावटी केसर मिलने की आशंका भी रहती है। कई बार देखने में बिल्कुल असली जैसी दिखने वाली केसर में रंगीन रेशे या दूसरे पदार्थ मिलाए जाते हैं। ऐसे में खरीदारी करते समय सिर्फ कीमत या पैकिंग देखकर भरोसा करना सही नहीं है।
अच्छी बात यह है कि घर पर कुछ आसान तरीकों से केसर की शुरुआती जांच की जा सकती है। पानी, दूध, खुशबू, बनावट और रंग छोड़ने के तरीके से काफी हद तक अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपके पास मौजूद केसर असली है या उसमें मिलावट की आशंका है। हालांकि, घरेलू जांच केवल प्राथमिक पहचान के लिए है और पूरी तरह पक्की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला परीक्षण ही सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है।
पानी में डालकर देखें
एक गिलास गुनगुने पानी में केसर की 2-3 लड़ियां डालें। असली केसर धीरे-धीरे अपना सुनहरा-पीला रंग छोड़ती है और पानी में रंग एकदम से नहीं फैलता। केसर की लड़ियां भी कुछ समय तक अपना लाल या गहरा लाल रंग बनाए रखती हैं। अगर रेशा डालते ही बहुत तेज रंग फैलने लगे और धागे का रंग तेजी से फीका पड़ जाए, तो मिलावट की आशंका हो सकती है।
दूध में करें पहचान
केसर की कुछ लड़ियां हल्के गर्म दूध में डालकर कुछ देर छोड़ें। असली केसर दूध को धीरे-धीरे हल्का सुनहरा रंग और अपनी खास खुशबू देती है। सिर्फ तेज पीला रंग मिलना ही असली होने का प्रमाण नहीं है। इसलिए रंग के साथ केसर की खुशबू और रेशों की स्थिति पर भी ध्यान दें।
खुशबू से पहचानें
असली केसर की खुशबू बेहद खास होती है। इसमें हल्की मीठी, मिट्टी जैसी और घास या शहद से मिलती-जुलती प्राकृतिक सुगंध महसूस हो सकती है। नकली केसर में कई बार तेज कृत्रिम या रंग जैसी गंध आ सकती है। हालांकि केवल खुशबू के आधार पर अंतिम फैसला नहीं करना चाहिए।
रेशों की बनावट पर दें ध्यान
असली केसर के रेशे सामान्यतः पतले, सूखे और एक सिरे पर थोड़े चौड़े या तुरही जैसे दिखाई दे सकते हैं। सभी रेशों का एकदम एक जैसा होना जरूरी नहीं है। बहुत ज्यादा चमकीले, असामान्य रूप से एकसमान या कागज जैसे दिखने वाले रेशों पर सावधानी बरतें।
रंग छोड़ने की रफ्तार जांचें
असली केसर अपना रंग धीरे-धीरे छोड़ती है। इसे पानी या दूध में डालने पर रंग धीरे-धीरे विकसित होता है। अगर कोई रेशा तुरंत बहुत गहरा कृत्रिम रंग छोड़ दे और खुद लगभग रंगहीन हो जाए, तो वह संदिग्ध हो सकता है। ध्यान रखें कि सिर्फ रंग की गति से भी 100 फीसदी पुष्टि नहीं की जा सकती।
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
केसर हमेशा भरोसेमंद विक्रेता से खरीदें और पैकेट पर पैकिंग, बैच, गुणवत्ता संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण जरूर देखें। बहुत कम कीमत में मिलने वाली केसर को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहें। पिसी हुई केसर की तुलना में पूरे रेशे वाली केसर को देखकर उसकी प्राथमिक जांच करना आसान होता है।
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लेखक: (कीर्ति)
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Foods Avoid in Monsoon: बारिश में 5 चीजें कर सकती हैं बीमार! खाने से पहले इन बातों को जानना है ज़रूरी
Foods Avoid in Monsoon: मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई तरह की बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। ऐसे में खाने-पीने की छोटी सी लापरवाही भी पेट संक्रमण, फूड पॉइजनिंग और वायरल बीमारियों का कारण बन सकती है। यही वजह है कि इस मौसम में भोजन चुनते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दिनों में कुछ खाद्य पदार्थ संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ, कटे हुए फल और लंबे समय तक रखा गया खाना सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
मानसून में 5 चीजों से बना लें दूरी
कटे हुए फल और सलाद
बारिश के मौसम में खुले में रखे कटे हुए फल और सलाद बैक्टीरिया का घर बन सकते हैं। लंबे समय तक खुले रहने से इनमें हानिकारक सूक्ष्मजीव पनपने लगते हैं, जो पेट खराब कर सकते हैं। इसलिए हमेशा ताजे फल खरीदें और खाने से ठीक पहले उन्हें काटें।
स्ट्रीट फूड
गोलगप्पे, चाट, भेलपुरी और अन्य स्ट्रीट फूड मानसून में संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं। बारिश के दौरान साफ-सफाई बनाए रखना मुश्किल होता है, जिससे खाने में बैक्टीरिया और वायरस पहुंच सकते हैं। इस मौसम में घर का बना ताजा भोजन ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
पत्तेदार सब्जियां
पालक, मेथी और सरसों जैसी पत्तेदार सब्जियों में बारिश के दौरान मिट्टी, कीड़े और बैक्टीरिया अधिक मात्रा में चिपक सकते हैं। यदि इन्हें अच्छी तरह धोकर और पकाकर नहीं खाया जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ मानसून में इनका सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह देते हैं।
बासी और लंबे समय तक रखा भोजन
बारिश के मौसम में भोजन जल्दी खराब हो सकता है। कई बार लोग बचा हुआ खाना दोबारा गर्म करके खा लेते हैं, लेकिन उसमें बैक्टीरिया पनप चुके होते हैं। इसलिए हमेशा ताजा भोजन करें और लंबे समय तक रखा हुआ खाना खाने से बचें।
कच्चा या अधपका सी-फूड
मानसून के दौरान मछली और अन्य सी-फूड में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अधपका या कच्चा सी-फूड पेट संबंधी समस्याएं और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। यदि सी-फूड खाते हैं तो उसे अच्छी तरह पकाकर ही सेवन करें।
मानसून में स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये टिप्स
- हमेशा ताजा और गर्म भोजन खाएं।
- पानी उबालकर या फिल्टर करके पिएं।
- खाने से पहले और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएं।
- खुले और कटे हुए खाद्य पदार्थों से बचें।
- फल और सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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