दिल्ली: एच1एन1 के बढ़ते मामले को लेकर एक्शन में स्वास्थ्य मंत्री, बुलाई उच्चस्तरीय बैठक
नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) और वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए वर्तमान स्थिति और तैयारियों पर चर्चा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई।
यह बैठक दोपहर 2 बजे दिल्ली सचिवालय में आयोजित होने वाली है और इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक के दौरान, स्वास्थ्य मंत्री द्वारा मौजूदा स्थिति और विभिन्न मौसमी और वेक्टर जनित रोगों के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे उपायों की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। चर्चा में अस्पतालों की तैयारियों, निगरानी प्रणालियों और मामलों में संभावित वृद्धि से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तत्परता पर भी ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है।
इस बैठक में विशेष रूप से स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों और स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
डॉ. पंकज सिंह द्वारा दिल्ली भर में बीमारी की मौजूदा स्थिति के संबंध में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करने की उम्मीद है। वे जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने और आने वाले दिनों में संभावित मामलों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को बढ़ाने के संबंध में निर्देश भी दे सकते हैं।
दिल्ली में मानसून के मौसम के दौरान मौसमी और वेक्टर जनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बीच, सफदरजंग अस्पताल ने कहा कि वह स्वाइन फ्लू (एच1एन1 इन्फ्लूएंजा) और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है। अस्पताल ने बताया कि मरीजों के लिए आवश्यक दवाएं, उपचार सुविधाएं और सहायक देखभाल उपलब्ध हैं।
दिल्ली में 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा के 159 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें एच1एन1 के 114 मामले शामिल हैं। इसके साथ ही 2026 में एच1एन1 के कुल मामलों की संख्या 1,777 हो गई है। इन्फ्लूएंजा ए के मामले भी बढ़कर 2,392 हो गए हैं। एच1एन1 इन्फ्लूएंजा ए का एक उपप्रकार है और इसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है।
राष्ट्रीय राजधानी में 2026 में अब तक इन्फ्लूएंजा के कुल 2,602 मामले सामने आए हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा ए के 2,392 और इन्फ्लूएंजा बी के 210 मामले शामिल हैं। 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा बी के चार नए मामले सामने आए, जिससे कुल संख्या 210 हो गई।
एच1एन1 इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक उपप्रकार है, जो श्वसन संबंधी बीमारी का कारण बनता है। 2009 के इन्फ्लूएंजा महामारी के दौरान इसे व्यापक रूप से स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाने लगा और बाद में यह मनुष्यों में फैलने वाले मौसमी इन्फ्लूएंजा वायरसों में से एक बन गया।
इन्फ्लूएंजा के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक बहना या बंद होना शामिल हैं। कई मामलों में लोग कुछ दिनों से लेकर लगभग एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं।
हालांकि, इन्फ्लूएंजा कभी-कभी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों में। गंभीर श्वसन संबंधी लक्षण, लगातार तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, सीने में तकलीफ, भ्रम या स्थिति के बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा जांच की आवश्यकता हो सकती है।
इन्फ्लूएंजा मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने पर निकलने वाली श्वसन बूंदों और कणों के माध्यम से फैलता है। हाथों की अच्छी स्वच्छता बनाए रखना, खांसते और छींकते समय मुंह ढकना और बीमार लोगों के निकट संपर्क से बचना संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहायक हो सकता है।
मौसमी इन्फ्लूएंजा का टीकाकरण भी एक महत्वपूर्ण निवारक उपाय है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें जटिलताओं का अधिक खतरा होता है।
--आईएएनएस
एसएचके/एएस
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Saffron Purity: बाजार से लाई केसर असली है या नकली? इन आसान तरीकों से मिनटों में करें पहचान
Saffron Purity Test: केसर की कुछ लड़ियां खाने में डालते ही खुशबू, रंग और स्वाद बदल देती हैं। यही वजह है कि यह दुनिया के महंगे मसालों में शामिल है। लेकिन इसकी ऊंची कीमत के कारण बाजार में नकली या मिलावटी केसर मिलने की आशंका भी रहती है। कई बार देखने में बिल्कुल असली जैसी दिखने वाली केसर में रंगीन रेशे या दूसरे पदार्थ मिलाए जाते हैं। ऐसे में खरीदारी करते समय सिर्फ कीमत या पैकिंग देखकर भरोसा करना सही नहीं है।
अच्छी बात यह है कि घर पर कुछ आसान तरीकों से केसर की शुरुआती जांच की जा सकती है। पानी, दूध, खुशबू, बनावट और रंग छोड़ने के तरीके से काफी हद तक अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपके पास मौजूद केसर असली है या उसमें मिलावट की आशंका है। हालांकि, घरेलू जांच केवल प्राथमिक पहचान के लिए है और पूरी तरह पक्की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला परीक्षण ही सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है।
पानी में डालकर देखें
एक गिलास गुनगुने पानी में केसर की 2-3 लड़ियां डालें। असली केसर धीरे-धीरे अपना सुनहरा-पीला रंग छोड़ती है और पानी में रंग एकदम से नहीं फैलता। केसर की लड़ियां भी कुछ समय तक अपना लाल या गहरा लाल रंग बनाए रखती हैं। अगर रेशा डालते ही बहुत तेज रंग फैलने लगे और धागे का रंग तेजी से फीका पड़ जाए, तो मिलावट की आशंका हो सकती है।
दूध में करें पहचान
केसर की कुछ लड़ियां हल्के गर्म दूध में डालकर कुछ देर छोड़ें। असली केसर दूध को धीरे-धीरे हल्का सुनहरा रंग और अपनी खास खुशबू देती है। सिर्फ तेज पीला रंग मिलना ही असली होने का प्रमाण नहीं है। इसलिए रंग के साथ केसर की खुशबू और रेशों की स्थिति पर भी ध्यान दें।
खुशबू से पहचानें
असली केसर की खुशबू बेहद खास होती है। इसमें हल्की मीठी, मिट्टी जैसी और घास या शहद से मिलती-जुलती प्राकृतिक सुगंध महसूस हो सकती है। नकली केसर में कई बार तेज कृत्रिम या रंग जैसी गंध आ सकती है। हालांकि केवल खुशबू के आधार पर अंतिम फैसला नहीं करना चाहिए।
रेशों की बनावट पर दें ध्यान
असली केसर के रेशे सामान्यतः पतले, सूखे और एक सिरे पर थोड़े चौड़े या तुरही जैसे दिखाई दे सकते हैं। सभी रेशों का एकदम एक जैसा होना जरूरी नहीं है। बहुत ज्यादा चमकीले, असामान्य रूप से एकसमान या कागज जैसे दिखने वाले रेशों पर सावधानी बरतें।
रंग छोड़ने की रफ्तार जांचें
असली केसर अपना रंग धीरे-धीरे छोड़ती है। इसे पानी या दूध में डालने पर रंग धीरे-धीरे विकसित होता है। अगर कोई रेशा तुरंत बहुत गहरा कृत्रिम रंग छोड़ दे और खुद लगभग रंगहीन हो जाए, तो वह संदिग्ध हो सकता है। ध्यान रखें कि सिर्फ रंग की गति से भी 100 फीसदी पुष्टि नहीं की जा सकती।
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
केसर हमेशा भरोसेमंद विक्रेता से खरीदें और पैकेट पर पैकिंग, बैच, गुणवत्ता संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण जरूर देखें। बहुत कम कीमत में मिलने वाली केसर को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहें। पिसी हुई केसर की तुलना में पूरे रेशे वाली केसर को देखकर उसकी प्राथमिक जांच करना आसान होता है।
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लेखक: (कीर्ति)
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