पीओजेके जिसे पाकिस्तान अपना हिस्सा कहता है। आज वहां की आवाम के लिए एक खुली जेल बन चुका है। सड़कों पर खौफ है और घरों में मातम है। पाकिस्तानी सेना का क्रूर दमन चक्र अपनी सारी हदें पार कर चुका है। लेकिन क्या पाकिस्तान का पाप का घड़ा भर गया है? दरअसल पिछले कुछ महीनों में पीओजे की स्थिति नरक से भी बदतर हो गई है। जिस क्षेत्र को शांति का टापू होना चाहिए था उसे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कसाई खाना बना दिया है। यहां विरोध प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार जो दमन चक्र चलाया गया है वह अभूतपूर्व है। सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। कई ऐसे युवा हैं जो अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं लेकिन उन्हें पाकिस्तानी सेना की गोलियों का सामना करना पड़ा। पूरे इलाके में कर्फ्यू हो, सख्त नाकेबंदी है और सबसे बड़ी बात वहां कम्युनिकेशन ब्लैकआउट लागू है। इंटरनेट बंद है, फोन लाइनें काट दी गई है।
आखिर पाकिस्तान दुनिया से क्या छिपा रहा है
जब किसी इलाके का दुनिया से संपर्क काट दिया जाता है तो समझ लीजिए वहां जुल्म की इंतहा हो रही है और ब्रिटेन में रह रहे कश्मीरी समुदाय के लोग आज अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर खौफ में हैं। हफ्तों से उनकी अपने सगे संबंधियों से बातचीत नहीं हुई है। उन्हें नहीं पता कि उनके घर वाले जिंदा भी हैं या पाकिस्तानी सेना की बर्बरता का शिकार हो चुके हैं। अब ब्रिटिश सांसदों का कदम यूएन को पत्र क्या है वो समझ लीजिए। देखिए इस मानवीय संकट ने अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। ब्रिटेन के 70 से ज्यादा सांसदों ने जिनमें सभी प्रमुख दलों के नेता शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेररेस को एक कड़ा पत्र लिखा है। यह कोई साधारण पत्र नहीं है बल्कि पाकिस्तान के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है। इन सांसदों ने स्पष्ट कहा है कि पीओजेके में पाकिस्तानी सेना नरसंहार कर रही है। पत्र में मांग की गई है कि यूएन तुरंत हस्तक्षेप करें। सांसदों ने इस बात की चिंता जताई है कि निर्दोष नागरिकों की जान बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जागना होगा। ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त बोलकर तुर्क के उन बयानों का समर्थन किया जिसमें उन्होंने शांतिपूर्ण संवाद, अभिव्यक्ति की आजादी और मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
क्या पाकिस्तान इन मांगों को मानेगा
पीओजेके में जो हो रहा है वह किसी भी लोकतंत्र या सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। ब्रिटिश सांसदों ने अपनी चिट्ठी में कुछ बेहद गंभीर मुद्दे उठाए हैं। पहला मुद्दा है अवैध गिरफ्तारियां। पाकिस्तानी एजेंसियां रात के अंधेरे में लोगों को घरों से उठा रही हैं। दूसरा है दवा और भोजन की कमी। नाकेबंदी की वजह से चिकित्सा उपकरणों, जीवन रक्षक दवाओं और भोजन की भारी किल्लत हो गई है। लोग इलाज अभाव में दम तोड़ रहे हैं। और तीसरा पॉइंट है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार। जो कोई भी सेना के खिलाफ बोलता है उसे गद्दार घोषित कर दिया जाता है या उसे हमेशा के लिए खामोश कर दिया जाता है।
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दुनिया की नजरें टिकी है सिर्फ और सिर्फ भारत पर क्योंकि बहुत जल्द दिल्ली की धरती पर वो हलचल मचने वाली है जिसकी गूंज सीधे बीजिंग और वाशिंगटन तक सुनाई देगी। रूस के राष्ट्रपति पुतिन एक बार फिर भारत आ रहे हैं और वह भी महज 9 से 10 महीने के भीतर। जैसे ही यह खबर बाहर आई ग्लोबल पॉलिटिक्स में भूचाल आ गया है और वजह बिल्कुल साफ है। सितंबर के महीने में भारत में सजने जा रहा है ब्रिक्स का ऐसा महामंच जो दुनिया का पूरा पावर बैलेंस बदल कर रख देगा। दरअसल आपको बता दें कि 12 से 13 सितंबर को दिल्ली में ब्रिक्स का बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है। इसमें हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन खुद भारत आ रहे हैं। आपको बता दें कि इस दौरे पर दोनों देशों के बीच दो बहुत बड़े रक्षा सौदों पर मोहर लग सकती है जो दुश्मन के होश उड़ाने के लिए काफी है। रूस आपको बता दें कि भारत के सामने एक बहुत बड़ा ऑफर रखने वाला है। इसके तहत भारतीय वायु सेना के 100 से ज्यादा Sukhoi 30 फाइटर जेट्स को आधुनिक बनाया जाएगा और साथ ही रूस अपनी पांचवी पीढ़ी का सबसे खतरनाक स्टेल्थ फाइटर 57 भी भारत को देने की पेशकश कर सकता है।
इस डील की सबसे खास बात यह होगी कि यह सिर्फ विमान खरीदना नहीं होगा बल्कि भारत में ही उन्हें बनाने और पूरी तकनीक ट्रांसफर करने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल होगा। बात करते हैं सुपर सुखोई प्रोजेक्ट की। हमारे Sukhoi 30 फाइटर जेट्स ने ऑपरेशन सिंदूर समेत कई मोर्चों पर अपनी ताकत साबित की है। अब इन विमानों को और भी ज्यादा घातक बनाया जाएगा। इनके इंजन, हथियार और अंदर की तकनीक पूरी तरह अपग्रेड की जाएगी। इसके लिए रूस के एक्सपर्ट्स की जो टीम है यह पहले से ही नासिक में एचए एएल की यूनिट का दौरा कर चुकी है। आपको बता दें कि करीब 63 थाउजेंड करोड़ की लागत से 84 sukhhoi 30 जेट्स को पहले ही सुपर सुखोई में बदलने का काम चल रहा है और इस दौरे से इस काम को और भी ज्यादा तेजी मिलने वाली है। लेकिन इस दौरे का सबसे बड़ा गेम चेंजर होने वाला है Suhoi 57. सवाल यह है कि भारत के लिए यह विमान इतना जरूरी क्यों है? जवाब बिल्कुल साफ है।
चीन और पाकिस्तान की चालबाजी। चीन अपना स्टेल्थ फाइटर पहले ही तैनात कर चुका है। और पाकिस्तान को भी ऐसी तकनीक दे रहा है। तो दूसरी तरफ भारत का अपना पांचवा जनरेशन का फाइटर जेट एएमसीए साल 2032 तक ही तैयार हो पाएगा। और इसी बीच देश की सुरक्षा को मजबूत रखना बेहद जरूरी है। याद रखिए साल 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। रूस का यह Sukoi 57 फाइटर जेट रफ्तार के मामले में अमेरिका के F35A से भी 25% ज्यादा तेज है। वहीं आपको यह भी बता दें कि इसके पहले पुतिन दिसंबर 2025 में भारत आए थे। जब दोनों देशों ने अपनी दोस्ती के 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया था और अब सितंबर 2026 में उनका यह दौरा एशियाई राजनीति का पूरा नक्शा बदल कर रख देगा।
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