सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में फिर भूस्खलन, डेढ़ किमी अंदर गिरा मलबा; 2023 हादसे की यादें ताजा
उत्तराखंड में चारधाम सड़क परियोजना के तहत बन रही सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग एक बार फिर भूस्खलन की घटना को लेकर चर्चा में है. सोमवार को निर्माणाधीन सुरंग के पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर मलबा गिरने की सूचना सामने आई. घटना के बाद सुरंग के भीतर मलबा जमा हो गया. इंटरनेट मीडिया पर इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जिसके बाद निर्माणाधीन सुरंग की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
हालांकि, निर्माण कंपनी ने स्थिति को लेकर किसी तरह के बड़े खतरे से इनकार किया है और इसे निर्माण प्रक्रिया के दौरान होने वाली सामान्य घटना बताया है.
सुरंग के अंदर करीब 1300 मीटर पर गिरा मलबा
निर्माण कंपनी नवयुगा इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर श्री राम के अनुसार, सुरंग के अंदर करीब 1300 मीटर की दूरी पर कुछ मलबा गिरा है. उन्होंने बताया कि मलबे को हटाने का काम किया जा रहा है.
कंपनी की ओर से कहा गया है कि निर्माणाधीन सुरंग में खुदाई और अन्य कार्यों के दौरान कभी-कभी मलबा गिरता रहता है. फिलहाल इसे किसी गंभीर या चिंताजनक स्थिति के रूप में नहीं देखा जा रहा है.
2023 का हादसा आज भी याद
सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन का जिक्र होते ही वर्ष 2023 का भयावह हादसा याद आ जाता है. नवंबर 2023 में सुरंग के सिलक्यारा छोर से करीब 200 मीटर अंदर भारी भूस्खलन हुआ था. इस हादसे के बाद 41 श्रमिक सुरंग के भीतर फंस गए थे.
श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए करीब 17 दिनों तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. कई चुनौतियों के बीच बचाव दल ने आखिरकार सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था. इस अभियान ने पूरी दुनिया का ध्यान उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग की ओर खींचा था.
हादसे के बाद भी नहीं थमीं मुश्किलें
2023 की घटना के बाद सुरंग निर्माण को लेकर सुरक्षा और भूगर्भीय परिस्थितियों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. अब एक बार फिर मलबा गिरने की घटना ने इन चिंताओं को चर्चा में ला दिया है.
हालांकि, मौजूदा घटना में किसी श्रमिक के फंसने या घायल होने की सूचना नहीं है. निर्माण कंपनी भी खतरे की बात से इनकार कर रही है. इसके बावजूद पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग निर्माण की प्रकृति को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों पर लगातार निगरानी जरूरी मानी जाती है.
2018 में शुरू हुआ था निर्माण
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था. इसे शुरुआती योजना के अनुसार 2022 तक पूरा किया जाना था, लेकिन तकनीकी और अन्य चुनौतियों के कारण परियोजना में देरी हुई.
वर्ष 2024 में सुरंग को सफलतापूर्वक आर-पार किया गया. इसके बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया गया और अब इसका लगभग 90 प्रतिशत सिविल कार्य पूरा होने की जानकारी है.
मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
करीब 4.5 किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग उत्तराखंड की सबसे लंबी निर्माणाधीन सड़क सुरंग बताई जा रही है. चारधाम सड़क परियोजना के लिए इसका निर्माण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.
फिलहाल सुरंग को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. ताजा भूस्खलन के बाद निर्माण कंपनी मलबा हटाने में जुटी है. भले ही कंपनी ने इसे सामान्य घटना बताया हो, लेकिन 2023 के हादसे की पृष्ठभूमि में सुरंग के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण की निगरानी पर विशेष ध्यान देना बेहद अहम हो जाता है.
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भारत का मानसून बेहतर हुआ, खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका आई कमी : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में मानसून की स्थिति हाल के महीनों में काफी बेहतर हुई है, जिससे खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान की आशंका कमी आई है। हालांकि, बारिश का वितरण अभी भी एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है, जिस पर नजर रखना जरूरी है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अगस्त तक संचयी बारिश की कमी घटकर 12.6 प्रतिशत रह गई है, जो जून में 35 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया, “स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि यह पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।” मानसून में सुधार का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी देखने को मिला है। सीजन की कमजोर शुरुआत के बाद बुवाई में काफी सुधार हुआ है।
ब्रोकरेज के अनुसार, 14 अगस्त तक कुल खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर से 2 प्रतिशत कम थी, जबकि जून के अंत में यह कमी 21 प्रतिशत थी।
इसके अलावा, धान का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.7 प्रतिशत कम रहा, जबकि मक्का का रकबा 4 प्रतिशत घटा।
इसके विपरीत, दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास का रकबा पिछले साल के स्तर से करीब 1 प्रतिशत के दायरे में रहा।
मैक्वायरी ने कहा कि बुवाई में बची हुई कमी मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा फसलों तक सीमित है और यह व्यापक स्तर पर नहीं है।
इसके अलावा, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर भी बारिश की कमी के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों में पानी का भंडारण 10 साल के औसत स्तर के बराबर या उससे अधिक है। वहीं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में जल भंडारण उनके संबंधित औसत स्तर का करीब 80-100 प्रतिशत है।
हालांकि, बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार, मानसून में सुधार, कुल बुवाई में सीमित कमी और पर्याप्त सिंचाई भंडार ने मिलकर खरीफ उत्पादन में गिरावट के जोखिम को कम कर दिया है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि मानसून की प्रगति महंगाई के लिहाज से भी सकारात्मक है। जून के स्तर की तुलना में खाद्य आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम कम हो रहे हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
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