रोज माउथवॉश करते हैं तो पहले जान लें ये जरूरी बातें, वर्ना फायदे की जगह हो सकता है नुकसान
नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। सुबह उठते ही ब्रश करना और फिर मुंह की ताजगी के लिए माउथवॉश का इस्तेमाल करना अब कई लोगों की रोज की आदत बन चुका है। कुछ लोग इसे सांसों की बदबू दूर रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ को लगता है कि माउथवॉश करने से दांत और मसूड़े ज्यादा साफ रहेंगे।
हालांकि माउथवॉश मुंह की सफाई में मदद जरूर करता है, मगर यह ब्रश और दांतों के बीच की सफाई नहीं कर सकता। साथ ही, हर दिन इस्तेमाल करने से पहले यह जानना भी जरूरी है कि आप किस तरह का माउथवॉश इस्तेमाल कर रहे हैं और उसका सही तरीका क्या है।
माउथवॉश से कुल्ला करने के बाद मुंह ताजगी भरा जरूर लगता है, लेकिन इससे दांतों पर जमी गंदगी पूरी तरह नहीं निकलती। ब्रश दांतों की सतह पर जमा गंदगी और प्लाक को हटाने में मदद करता है। वहीं दांतों के बीच फंसे खाने को साफ करने के लिए के लिए फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश की जरूरत पड़ती है। इसलिए माउथवॉश को ब्रश का विकल्प मानना गलत है। इसे जरूरत के मुताबिक रोज की ओरल हाइजीन रूटीन में शामिल किया जा सकता है।
बाजार में कई तरह के माउथवॉश मिलते हैं। किसी का इस्तेमाल बदबू के लिए किया जाता है, तो किसी को मसूड़ों या दूसरी दांतों की परेशानी को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। इसलिए सिर्फ अच्छा स्वाद या बड़ी कंपनी देखकर माउथवॉश खरीदना सही नहीं है। अगर आपको दांत या मसूड़ों से जुड़ी कोई परेशानी है तो डेंटिस्ट से पूछकर माउथवॉश लेना बेहतर रहेगा।
कुछ माउथवॉश इस्तेमाल करने पर मुंह में तेज जलन होती है। कई लोगों को लगता है कि जलन ज्यादा है तो माउथवॉश ज्यादा असरदार होगा। ऐसा जरूरी नहीं है। जलन कुछ खास चीजों की वजह से हो सकती है, जैसे अल्कोहल या उसमें डाला गया फ्लेवर। अगर हर बार इस्तेमाल के बाद ज्यादा जलन या परेशानी हो रही है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
माउथवॉश खरीदने से पहले उसकी बोतल पर दी गई जानकारी जरूर पढ़ें। उसमें कौन-कौन सी चीजें डाली गई हैं, यह देखना जरूरी है। खासकर अगर आपका मुंह जल्दी सूखता है या किसी चीज से जलन होती है तो ऐसा प्रोडक्ट चुनने से बचें, जिससे आपकी परेशानी बढ़ सकती है। हर व्यक्ति के लिए एक ही माउथवॉश सही हो, यह जरूरी नहीं है।
अगर माउथवॉश करने के बाद सांसों की बदबू वापस बनी रहती है तो इसकी वजह कुछ और हो सकती है। दांतों और मसूड़ों की बीमारी भी इसकी वजह बन सकती है। ऐसे में बार-बार माउथवॉश करने के बजाय डेंटिस्ट से जांच कराना ज्यादा बेहतर रहेगा।
--आईएएनएस
पीके/एएस
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Putrada Ekadashi 2026: श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत कब खुलेगा? जानें पारण का शुभ समय और सही विधि
Putrada Ekadashi 2026: सावन के महीने में दो एकादशियां पड़ती है- कामिका एकादशी और पुत्रदा एकादशी. कामिका एकादशी श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन रखा जा चुका है. अब श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. बता दें कि इस साल यह एकादशी 23 और 24 अगस्त, दोनों ही दिन मनाई जा रही है. ऐसे में गृहस्थों के लिए 23 अगस्त 2026 का दिन व्रत रखने के लिए तय था जबकि वैष्णव संप्रदाय के लोगों को 24 अगस्त यानी आज एकादशी व्रत रखना है. जिन लोगों ने कल व्रत रख है, वे आज व्रत का पारण कर रहे हैं. जबकि जिन लोगों का व्रत है, वे 25 तारीख को पारण करेंगे. यहां इस आर्टिकल में आपको दोनों दिन का पारण का सही समय बता रहे हैं.
सावन पुत्रदा एकादशी पारण मुहूर्त (24 अगस्त 2026 के लिए)
द्रिक पंचांग के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को श्रावण पुत्रदा एकादशी का पारण करने का समय दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. आप इस बीच कभी भी व्रत का पारण कर सकते हैं. विधिवत भगवान विष्णु की पूजा करें और जरूरतमंदों तथा ब्राह्मणों को दान करने के बाद व्रत खोल सकते हैं. पारण के दिन आपको हरि वासर समय का भी ध्यान रखना होता है.
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25 अगस्त 2026 को पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण मुहूर्त
जो लोग आज के दिन व्रत रख रहे हैं, उन्हें 25 अगस्त 2026 मंगलवार को व्रत का पारण करना होगा. इस दिन व्रत खोलने का समय सुबह 05:55 से 06:20 बजे तक रहेगा. बता दें कि पारण तिथि के बाद द्वादशी भी समाप्त होती है, ऐसे द्वादशी तिथि का समापन 06:20 होगा. इसलिए, समय पर व्रत खोल लें.
पुत्रदा एकादशी व्रत पारण विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आपको एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के पश्चात करना होता है. इस दिन हरिवासर समाप्त होने का भी ध्यान रखना होता है. पारण करने के लिए आपको सुबह के समय स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करते हैं. भगवान विष्णु को तुलसी दल भी अर्पित करते हैं. पूजा के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भोजन आदि करवाना चाहिए और दान-दक्षिण देनी चाहिए. इसके बाद भगवान को अर्पित तुलसी दल और चरणामृत ग्रहण करके व्रत खोले. इस दिन आपको सात्विक भोजन खाना होता है.
श्रावण पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु को अर्पित करते है 'पवित्रा'
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है. विशेष रूप से संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना जाता है. इस पावन दिन भगवान विष्णु को पवित्रा अर्पित करने की परंपरा है. पवित्रा सूती धागों से बनी एक पवित्र डोरी होती है, जिसे भगवान विष्णु को समर्पित किया जाता है. कई घरों में पूजा के बाद इस पवित्रा को धार्मिक आस्था के साथ अगले श्रावण पुत्रदा एकादशी तक पूजा स्थान पर सुरक्षित रखकर रखा जाता है.
पुत्रदा एकादशी पारण के दिन इन चीजों का दान करें
- अन्न का दान
- वस्त्र दान
- फल दान
- गुड़ और चने का दान
- दक्षिणा
- गाय को चारा खिलाएं
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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