सैंडविच शॉप के उद्घाटन में इंसानों के बीच रोबोट ने लगाए ठुमके, अनोखा VIDEO देखकर लोग रह गए हैरान
मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक सैंडविच शॉप का उद्घाटन अचानक चर्चा में आ गया, जब समारोह में एक ह्यूमनॉइड रोबोट ने एंट्री ली। रोबोट को लोगों के सामने डांस करते देख हर कोई हैरान रह गया। आम उद्घाटन से बिल्कुल अलग इस नजारे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया
Sawan Last Somwar: आज सावन के अंतिम सोमवार पर भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से मिलेगा शुभ फल, नोट करें संध्या मुहूर्त
Sawan Last Somwar: सावन 2026 का आखिरी सोमवार भगवान शिव की विशेष कृपा रहने वाली है. इस पावन अवसर पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा-पाठ करना लाभदायक माना जाता है. सोमवार का व्रत करने से और पूजा करने से जीवन के सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती है. अगर आप इस खास दिन पर भोलेनाथ का जलाभिषेक करना चाहते हैं तो शुभ संयोगों और सही मुहूर्त में पूजा करें. चलिए आपको बताते हैं इस आर्टिकल में सावन के अंतिम सोमवार की पूजा का महत्व क्या है और संध्या मुहूर्त.
जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त (Sawan Somwar Jalabhishek & Puja Shubh Muhurat)
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:25 से 5 बजकर 10 मिनट तक
- सुबह की पूजा का सर्वोत्तम समय- सुबह 6 बजे से 9 बजकर 15 मिनट तक
- अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक
शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल- शाम 6:30 से रात 8 बजकर 30 मिनट तक. आज आखिरी सोमवार पर जो लोग शाम की पूजा करने वाले हैं, उन्हें इस मुहूर्त में पूजा करनी चाहिए. यह जलाभिषेक करने के लिए श्रेष्ठ समय है. जो लोग उपवास कर रहे हैं, उन्हें इस समय शिव जी के सामने दीया जलाना चाहिए और पूजा करने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए.
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सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहे कई शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा बताते हैं कि सावन के अंतिम सोमवार के दिन प्रीति योग और आयुष्मान योग जैसे अत्यंत कल्याणकारी और दुर्लभ योग बन रहे हैं. इसके साथ ही, आज के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष काल का भी शुभ संयोग बन रहा है. इन योगों में पूजा करने और जलाभिषेक करने का फल कई गुना ज्यादा मिलता है.
शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का सही तरीका क्या है?
शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से तांबे या चांदी के पात्र में शुद्ध जल भरना है या गंगाजल लेना है. अब उत्तर दिशा की ओर मुख करके खड़े हों. सबसे पहले जलाधारी पर बाएं भाग और फिर दाएं भाग पर जल अर्पित करें. ये भगवान गणेश और कार्तिकेय हैं. इसके बाद जलाधारी के मध्य में अशोक सुंदरी और फिर गोल भाग माता पार्वती के हस्तकमल पर जल चढ़ाएं. इसके बाद ऊं नम: शिवाय मंत्र या श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जाप करते हुए शिव जी का पतली धारा के साथ अभिषेक करें.
पूजन की सरल विधि
सावन के अंतिम सोमवार पर पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठें और स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद मन में व्रत का संकल्प लें. इसके बाद शिवलिंग का पंचामृत, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर अर्पित करें. इसके बाद शुद्ध जल से स्नान करवाएं. अब उसके बाद भोलेनाथ को सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, आंकड़ा फूल और अन्य फूल अर्पित करें. इसके बाद फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद धूप-दीया जलाएं. अंत में शिव जी की आरती करें, चालीसा का पाठ करें और रुद्राष्टकम का पाठ करें. आखिरी में पूजा के दौरान हुई भूलचूक की माफी मांगे.
सावन के आखिरी सोमवार पर करें इन चीजों का दान
सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान शिव की पूजा के साथ दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. शिव भक्त इस दिन दूध, चावल, सफेद वस्त्र, चीनी और घी जैसी चीजों का दान कर सकते हैं. इसके अलावा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है. सोमवार के दिन गौ सेवा करना और गाय को हरा चारा खिलाना भी धार्मिक दृष्टि से लाभकारी माना जाता है. मान्यता है कि दान हमेशा श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए. किसी भी वस्तु का दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सेवा भाव से करना अधिक फलदायी माना जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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