Raksha Bandhan Free Bus: रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात, 29 अगस्त तक मिलेगी ये सुविधा, मुख्यमंत्री ने कर दिया ये बड़ा ऐलान
Raksha Bandhan Free Bus: रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात, 29 अगस्त तक मिलेगी ये सुविधा, मुख्यमंत्री ने कर दिया ये बड़ा ऐलानKajari Teej 2026: कब है कजरी तीज? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और पूजा सामग्री
Kajari Teej 2026: हिंदू धर्म में तीज पर्वों का विशेष महत्व माना जाता है। इन्हीं में से एक है कजरी तीज, जिसे कज्जली तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के साथ रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की कामना से कजरी तीज का व्रत करती हैं। आइए जानते हैं 2026 में कजरी तीज किस दिन मनाई जाएगी, पूजा के शुभ मुहूर्त क्या हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय कब रहेगा।
कजरी तीज 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, कजरी तीज का पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में तृतीया तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को सुबह 9:36 बजे होगी। वहीं इसका समापन 31 अगस्त को सुबह 8:50 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
कजरी तीज 2026 पूजा का शुभ समय
कजरी तीज के दिन पूजा-पाठ के लिए कई शुभ समय मिलेंगे। दिन की शुरुआत में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से 5:37 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:14 बजे से 1:04 बजे तक रहेगा। संध्या पूजा के लिए शाम 6:54 बजे से रात 8:03 बजे तक का समय बताया गया है।
कजरी तीज पर चौघड़िया मुहूर्त
- अमृत चौघड़िया: सुबह 5:58 बजे से 7:34 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: सुबह 9:10 बजे से 10:45 बजे तक
- लाभ चौघड़िया: दोपहर 3:33 बजे से शाम 5:08 बजे तक
- अमृत चौघड़िया: शाम 5:08 बजे से 6:44 बजे तक
- सूर्यास्त: शाम 6:44 बजे
कजरी तीज पर चंद्रमा को कब दें अर्घ्य?
कजरी तीज के व्रत में चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है। व्रती महिलाएं दिनभर निर्जला या अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। 2026 में कजरी तीज के दिन चंद्रोदय रात 8:25 बजे होने की जानकारी दी गई है। चंद्रमा के उदय के बाद उन्हें अर्घ्य देकर पूजा की जाती है। अर्घ्य के लिए जल में थोड़ा दूध, रोली और अक्षत मिलाया जा सकता है। चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें। इसके बाद कजरी तीज की व्रत कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है और फिर व्रत का पारण किया जाता है।
कजरी तीज पूजा सामग्री
- दीपक, घी और तेल
- कपूर और अगरबत्ती
- पीला वस्त्र
- हल्दी और चंदन
- श्रीफल और जटा नारियल
- गाय का दूध
- गंगाजल
- दही, मिश्री, शहद और पंचामृत
- कलश और जनेऊ
- सुपारी
- कच्चा सूत
- बेलपत्र और शमी के पत्ते
- केला के पत्ते
- भांग और धतूरा
- दूर्वा घास
माता पार्वती के लिए सुहाग सामग्री
माता पार्वती को सुहाग की वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर है। इसके लिए हरे रंग की साड़ी, चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, कुमकुम, सिंदूर, मेहंदी, कंघी और बिछुआ जैसी सामग्री रखी जा सकती है।
कजरी तीज का धार्मिक महत्व
कजरी तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति श्रद्धा प्रकट करने वाला पर्व माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं मनपसंद जीवनसाथी की प्राप्ति और अच्छे वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं। कजरी तीज केवल व्रत और पूजा का अवसर ही नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए पारिवारिक और सामाजिक रूप से भी खास पर्व है। इस दिन कई जगहों पर झूले, लोकगीत और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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