बाएं हाथ में दर्द होना एक ऐसा लक्षण है, जिसको कई लोग गलत तरीके से सोने, थकान या ज्यादा काम करने का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन हर बार इसको नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई मामलों में यह दर्द हड्डियों, मांसपेशियों या नसों की समस्या से जुड़ा होता है। वहीं कुछ स्थितियों में यह दिल की बीमारी या हार्ट अटैक का शुरूआती संकेत हो सकता है।
खासकर अगर दर्द अचानक शुरू हो, सांस लेने में तकलीफ, ठंडा पसीना, सीने में दबाव, मतली या जबड़े तक फैलने वाले दर्द के साथ हो, तो इसको हार्ट अटैक का संकेत मानकर फौरन हॉस्पिटल जाना चाहिए। वहीं अगर दर्द गर्दन से शुरू होकर हाथ की उंगलियों तक फैल जाता है। अगर सुन्नपन या झनझनाहट के साथ है, तो इसकी वजह नस दबना या सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी हो सकती है।
जानें क्या हैं सामान्य कारण
बाएं हाथ में दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें नसों की समस्या, चोट, हड्डी की चोट, रीढ़ की बीमारी और मांसपेशियों का खिंचाव आदि शामिल है।
हड्डी टूटना
अगर सड़क दुर्घटना, गिरने या खेल के दौरान हाथ में चोट लगी हो और इसके बाद सूजन, तेज दर्द, हाथ हिलाने में परेशानी या हाथ का आकार बदलता दिखे, तो हड्डी टूटने की संभावना हो सकती है। फ्रैक्चर में लगातार दर्द बना रहता है और बिना इलाज के हड्डी सही तरीके से नहीं जुड़ती है।
स्लिप डिस्क की समस्या
गर्दन की रीढ़ में मौजूद डिस्क बाहर आकर नस पर दबाव डाल सकती है। ऐसी स्थिति में दर्द सिर्फ तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि बाजू, कंधे और उंगलियों तक फैल सकता है। कुछ मरीजों के हाथ में झुनझुनी या फिर कमजोरी महसूस हो सकती है।
नस का दबना
जब गर्दन से निकलने वाली नस दब जाती है, तो दर्द गर्दन से होते हुए पूरे हाथ तक जा सकता है। इसको सर्वाइकल रेडिक्युलोपैथी कहा जाता है।
मोच और मांसपेशियों में खिंचाव होना
जिम में भारी वजन उठाने, बार-बार एक ही तरह का काम करने या अचानक झटका लगने से मांसपेशियों और लिंगामेंट में खिंचाव आ सकता है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में एक्टिविटी करने में दर्द बढ़ता है। वहीं आराम करने से धीरे-धीरे कम होने लगता है।
बाएं हाथ का दर्द बन सकता है दिल की बीमारी
हार्ट अटैक के दौरान हृदय की मांसपेशियों तक पर्याप्त ब्लड नहीं पहुंच पाता है। इसका दर्द सिर्फ सीने तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि नसों के साझा मार्ग के कारण बाएं कंधे, बाजू, जबड़े, गर्दन और पीठ तक फील हो सकता है।
हालांकि हर हार्ट अटैक में बाएं हाथ का दर्द नहीं होता है। बल्कि अगर यह सीने में दबाव या जकड़न के साथ हो, तो इसको भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इन लक्षणों में लें इमरजेंसी सहायता
सांस लेने में समस्या
सीने में दबाव या तेज दर्द
ठंडा पसीना आता
मतली या उल्टी
चक्कर आना
पीठ, गर्दन या जबड़े तक दर्द फैलना
बेहोशी महसूस होना
अचानक कमजोरी
यह हार्ट अटैक या अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्या के संकेत भी हो सकते हैं।
हालांकि हमेशा बाएं हाथ में दर्द हार्ट अटैक का संकेत नहीं होता है, बल्कि कई बार यह जानलेवा स्थिति की चेतावनी भी हो सकती है। अगर दर्द मोच, नस दबने, चोट या स्लिप डिक्स की वजह से है, तो समय पर इलाज से राहत मिल सकती है। अगर दर्द सांस फूलने, ठंडा पसीना, सीने में जकड़न या मतली जैसे लक्षणों के साथ होता है, तो फौरन आपको इमरजेंसी में मेडिकल सहायता लेना जरूरी है। वहीं दर्द की वजह की सही पहचान सही इलाज और गंभीर जटिलताओं से बचाव की कुंजी है।
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अक्सर डेंटिस्ट ब्रशिंग और फ्लॉसिंग के साथ माउथवॉश को नियमित तौर पर रोजाना रुटीन में शामिल करने की सलाह जरुर देते हैं। हालांकि, इसके ज्यादा या फिर केमिकल से भरपूर माउथवॉश के इस्तेमाल से ड्राई माउथ वॉश या फिर टिशूज के सेंसिटिव हो जाने की समस्या हो सकती हैं। आइए आपको बताते हैं माउथवॉश से संबंधित ऐसे 7 फैक्ट्स जिनके बारे में आपको पता नहीं होना चाहिए। यह आपको बेहतर रिजल्ट पाने में मदद करता है।
डेंटिस्ट भी नहीं हैं एकमत
डेंटिस्ट हमेशा ब्रशिंग और फ्लॉसिंग के साथ ही डेली माउथवॉश करने को कहते हैं। हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि ब्रश और फ्लॉस मुंह के हर कोने में नहीं पहुंच सकते हैं। बल्कि माउथवॉश आपकी इस मुश्किल को मिनटों में दूर कर देगा। लेकिन कुछ डेंटिस्ट इसके इस्तेमाल को लेकर ज्यादा अहमियत नहीं देते हैं।
ब्रशिंग को रिप्लेस नहीं करता
वैसे यह आपके मुंह के हाइजीन को मेंटेन रखता है, लेकिन यह ब्रशिंग का ऑप्शन नहीं है। माउथवॉश से कुल्ला भर कर लेना कीटाणुओं और प्लाक को हटाने के लिए काफी नहीं। इसी बात को लेकर लोग कंफ्यूज रहते हैं और माउथवॉश को ही कम्प्लीट केयर मान लेते हैं।
सेंसेशन का मतलब असरदार होना नहीं
यदि आप माउथवॉश इस्तेमाल करते हैं, तो मुंह के अंदर जलन जरुरी होती है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपना काम बेहतर कर रहा है। माउथवॉश से होने वाली जलन अल्कोहल या उसमें एड किए गए फ्लेवर की वजह हो सकती है।
गुड बैक्टीरिया भी मर जाते हैं
कई माउथवॉश में एंटीमाइक्रोबायल एजेंट होते हैं, जो बैक्टीरिया को मारते हैं, लेकिन यह गुड या बैड बैक्टीरिया के बीच अंतर नहीं कर पाता है। वहीं गुड बैक्टीरिया आपके मुंह की सेहत के लिए जरुरी माने जाते हैं।
खरीदने से पहले लेवल पढ़े
जब आप माउथवॉश खरीदें तो एक बार लेवल जरुर चेक करें कि उसमें अल्कोहल और सोडियम लॉरेल सल्फेट या एसएलसी तो नहीं है। अधिकतर माउथ वॉश केयर प्रोडक्ट्स में ये दो तत्व जरुर शामिल होते हैं। वहीं, ऐसा माउथवाश देखें , जिसका अल्कलाइन पीएच हो और यह जितना ज्यादा होगा, मुंह की सेहत के लिए उतना ही बेहतर है।
ब्लडप्रेशर पर असर
असल में मुंह के कुछ ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो भोजन से मिलने वाले नाइट्रेट्स को नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल देते हैं। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। वहीं, लगातार ब्रॉड स्पेक्ट्रम वाले एंटीमाइक्रोबायल माउथवॉश इस्तेमाल करने से यह संतुलन बिगड़ सकता है। लेकिन, इस असंतुलन को सीधे माउथवॉश के इस्तेमाल से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है, अभी इस दिशा में रिसर्च चल रही है।
समस्याएं सिर्फ छुपती हैं हटती नहीं
अगर सांसों से बदबू आ रही है, तो मसूड़ों से जुड़ी बीमारी होने का संकेत हो सकता है और माउथवॉश करने से पहले कुछ समय के लिए यह समस्या छिप जाएगी लेकिन जड़ से खत्म नहीं होती है। ऐसा होने पर माउथवॉश इस्तेमाल करने के बजाय सबसे पहले डेंटिस्ट को जरुर दिखाएं।
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