अक्सर डेंटिस्ट ब्रशिंग और फ्लॉसिंग के साथ माउथवॉश को नियमित तौर पर रोजाना रुटीन में शामिल करने की सलाह जरुर देते हैं। हालांकि, इसके ज्यादा या फिर केमिकल से भरपूर माउथवॉश के इस्तेमाल से ड्राई माउथ वॉश या फिर टिशूज के सेंसिटिव हो जाने की समस्या हो सकती हैं। आइए आपको बताते हैं माउथवॉश से संबंधित ऐसे 7 फैक्ट्स जिनके बारे में आपको पता नहीं होना चाहिए। यह आपको बेहतर रिजल्ट पाने में मदद करता है।
डेंटिस्ट भी नहीं हैं एकमत
डेंटिस्ट हमेशा ब्रशिंग और फ्लॉसिंग के साथ ही डेली माउथवॉश करने को कहते हैं। हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि ब्रश और फ्लॉस मुंह के हर कोने में नहीं पहुंच सकते हैं। बल्कि माउथवॉश आपकी इस मुश्किल को मिनटों में दूर कर देगा। लेकिन कुछ डेंटिस्ट इसके इस्तेमाल को लेकर ज्यादा अहमियत नहीं देते हैं।
ब्रशिंग को रिप्लेस नहीं करता
वैसे यह आपके मुंह के हाइजीन को मेंटेन रखता है, लेकिन यह ब्रशिंग का ऑप्शन नहीं है। माउथवॉश से कुल्ला भर कर लेना कीटाणुओं और प्लाक को हटाने के लिए काफी नहीं। इसी बात को लेकर लोग कंफ्यूज रहते हैं और माउथवॉश को ही कम्प्लीट केयर मान लेते हैं।
सेंसेशन का मतलब असरदार होना नहीं
यदि आप माउथवॉश इस्तेमाल करते हैं, तो मुंह के अंदर जलन जरुरी होती है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपना काम बेहतर कर रहा है। माउथवॉश से होने वाली जलन अल्कोहल या उसमें एड किए गए फ्लेवर की वजह हो सकती है।
गुड बैक्टीरिया भी मर जाते हैं
कई माउथवॉश में एंटीमाइक्रोबायल एजेंट होते हैं, जो बैक्टीरिया को मारते हैं, लेकिन यह गुड या बैड बैक्टीरिया के बीच अंतर नहीं कर पाता है। वहीं गुड बैक्टीरिया आपके मुंह की सेहत के लिए जरुरी माने जाते हैं।
खरीदने से पहले लेवल पढ़े
जब आप माउथवॉश खरीदें तो एक बार लेवल जरुर चेक करें कि उसमें अल्कोहल और सोडियम लॉरेल सल्फेट या एसएलसी तो नहीं है। अधिकतर माउथ वॉश केयर प्रोडक्ट्स में ये दो तत्व जरुर शामिल होते हैं। वहीं, ऐसा माउथवाश देखें , जिसका अल्कलाइन पीएच हो और यह जितना ज्यादा होगा, मुंह की सेहत के लिए उतना ही बेहतर है।
ब्लडप्रेशर पर असर
असल में मुंह के कुछ ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो भोजन से मिलने वाले नाइट्रेट्स को नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल देते हैं। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। वहीं, लगातार ब्रॉड स्पेक्ट्रम वाले एंटीमाइक्रोबायल माउथवॉश इस्तेमाल करने से यह संतुलन बिगड़ सकता है। लेकिन, इस असंतुलन को सीधे माउथवॉश के इस्तेमाल से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है, अभी इस दिशा में रिसर्च चल रही है।
समस्याएं सिर्फ छुपती हैं हटती नहीं
अगर सांसों से बदबू आ रही है, तो मसूड़ों से जुड़ी बीमारी होने का संकेत हो सकता है और माउथवॉश करने से पहले कुछ समय के लिए यह समस्या छिप जाएगी लेकिन जड़ से खत्म नहीं होती है। ऐसा होने पर माउथवॉश इस्तेमाल करने के बजाय सबसे पहले डेंटिस्ट को जरुर दिखाएं।
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प्रत्येक वर्ष 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है। खासतौर पर इस दिन दुनियाभर में लोगों को अंगदान के प्रति जागरुक किया जाता है। ऑर्गन दान करना किसी जरुरतमंद मरीज को नया जीवन देने का खास जारिया है।
दरअसल, भारत में हजारों मरीज गंभीर अंग विफलता के चलते प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं। गौरतलब है कि एक व्यक्ति के मृत्यु के बाद दान किए गए अंग कई लोगों की जिंदगी बचाने में मदद करता है। ऐसे में आपके मन में भी सवाल आते होंगे कि आखिर इंसान अपने शरीर के कौन-कौन से अंग दान कर सकता है? आइए आपको इस लेख में पूरी जानकारी बताते हैं।
शरीर के कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?
किडनी: मृतक दाता अपनी दोनों किडनी को दान कर सकता है। जीवित व्यक्ति भी चिकित्सकीय और कानूनी नियमों के जरिए एक किडनी दान कर सकता है।
लिवर: मृत व्यक्ति लिवर का दान कर सकता है। जीवित व्यक्ति भी लिवर का एक हिस्सा दान कर सकते हैं, क्योंकि लिवर के हिस्से समय के साथ पुन:विकसित हो जाता है।
हृदय: मृतक हृदय का प्रत्यारोपण गंभीर हार्ट रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए किया जा सकता है। इसके लिए डोनेट करने वाले व्यक्ति की मेडिकल स्थिति और अंग की उपयुक्तता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फेफड़े: असल में मृतक दाता दोनों फेफड़ों का दान कर सकता है। वहीं, जीवित दाता सिर्फ एक फेफड़े का दान कर सकता है।
अग्नयाशय: अग्नयाशय एक मुख्य अंगों में से एक है, जिसे दान किया जाता है। जीवित दाता से इसके एक हिस्से का दान भी कुछ स्थितियों में संभव माना जाता है।
आंत: आपको बता दें कि, छोटी आंत/आंत भी प्रत्यारोपण के लिए दान किए जाने वाले अंगों में शामिल है।
अंगों के अलावा इन ऊतकों का भी हो सकता है दान
इसके अलावा, इन चीजों का दान भी किया जा सकता है। जैसे कि कॉर्निया, त्वचा, हड्डियां, हार्ट वाल्व, रक्त वाहिकाएं, नसें और टेंडन जैसे ऊतकों का भी दान किया जा सकता है। आपको बता दें कि, कॉर्निया का ट्रांसप्लांट दृष्टि बहाल करने में मदद कर सकता है, जबकि त्वचा का इस्तेमाल गंभीर जलने और घावों के उपचार में किया जाता है।
जीवित रहते कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?
वैसे जीवित व्यक्ति सभी ऑर्गन डोनेट नहीं कर सकता है। राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के अनुसार, मेडिकल परिस्थितियों में जीवत दाता एक किडनी, लिवर का एक हिस्सा और अग्न्याशय का हिस्सा दान कर सकता है। वहीं, कुछ खास परिस्थिति में फेफड़े के एक हिस्से या छोटी आंत के हिस्से का दान भी संभव हो सकता है।
हर व्यक्ति अंग दान के लिए योग्य है
हालांकि, यह जरुरी नहीं है कि हर व्यक्ति अंग दान कर सकता है। असल में अंगदान के लिए उम्र से ज्यादा महत्वपूर्ण दाता की मेडिकल स्थिति और आंगों की उपयुक्तता होती है। डॉक्टर मृत्यु के समय जांच करके तय करते हैं कि कौन-सा अंग या ऊतक प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
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