भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को लेकर सरकार अब केवल मोबाइल फोन की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती है। मोबाइल फोन विनिर्माण योजना शुरू करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिया कि एप्पल भारत में आईफोन के अलावा मैकबुक और आईपैड जैसे दूसरे उत्पादों का निर्माण भी शुरू कर सकती है। उनसे जब इस संभावना को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि ऐसा हो सकता है।
बता दें कि सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की लागत वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को पांच वर्षों के लिए लागू किया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। इसका उद्देश्य भारत में मोबाइल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कलपुर्जों का स्थानीय निर्माण, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला, उत्पाद डिजाइन और अनुसंधान क्षमता को मजबूत करना है।
नई योजना में भारतीय मोबाइल ब्रांडों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक सरकार को उम्मीद है कि अगले 10 से 14 महीनों में तीन संभावित भारतीय स्मार्टफोन कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में आ सकती हैं। इन कंपनियों को अपने लक्षित बाजार के अनुसार बेहतर डिजाइन तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, भारतीय ब्रांड को योजना का लाभ लेने के लिए भारत में पंजीकृत कंपनी होना जरूरी होगा। उसका बौद्धिक संपदा अधिकार और व्यापार चिह्न भारत में होना चाहिए। कंपनी का प्रबंधन भारतीय नागरिकों के नियंत्रण में होना और 51 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी भारतीय नागरिकों की होनी चाहिए। इसके साथ भारत में ही अनुसंधान और डिजाइन की क्षमता विकसित करना भी जरूरी होगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि अनुसंधान और विकास के लिए भी अलग प्रोत्साहन रखा गया है। भारतीय ब्रांडों को पांच प्रतिशत का मूल प्रोत्साहन मिलेगा। घरेलू स्तर पर प्रमुख कलपुर्जे खरीदने पर 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त लाभ मिल सकता है, जबकि भारतीय डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के लिए तीन प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है।
गौरतलब है कि सरकार मोबाइल फोन के साथ पूरी आपूर्ति श्रृंखला को देश में विकसित करना चाहती है। डिस्प्ले, कैमरा, बाहरी ढांचा, बैटरी और यूएसबी तार जैसे कलपुर्जों की घरेलू खरीद बढ़ाने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
पिछली उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के दौरान भी भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में तेजी से विस्तार किया है। निवेश 20,587 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था। मोबाइल उत्पादन करीब 11.62 लाख करोड़ रुपये रहा। मोबाइल फोन निर्यात भी तेजी से बढ़ा है और भारत अब मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर है।
नई योजना के तहत सरकार को पांच वर्षों में करीब 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल उत्पादन और लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के निर्यात की उम्मीद है। इससे करीब 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है। इस तरह सरकार की कोशिश अब भारत को केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि डिजाइन, तकनीक और अनुसंधान के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करने की है।
Continue reading on the app
केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार अलग मुवाट्टुपुझा जिला बनाने की मांग पर विचार करेगी। वह यहां मुवाट्टुपुझा नगर निकाय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले, मुवाट्टुपुझा के विधायक मैथ्यू कुझलनादन ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के 10 साल के शासन के दौरान इस क्षेत्र की उपेक्षा की गई और उन्होंने अलग मुवाट्टुपुझा जिला बनाने की मांग दोहराई।
मुवाट्टुपुझा वर्तमान में एर्नाकुलम जिले का हिस्सा है और इडुक्की जिले की सीमा के करीब स्थित है। एर्नाकुलम जिले के पूर्वी हिस्सों और इडुक्की जिले के निचले इलाकों को मिलाकर अलग मुवाट्टुपुझा जिला बनाने की लंबे समय से मांग की जा रही है। सतीशन ने कहा कि उन्होंने मुवाट्टुपुझा विधायक द्वारा उठाई गई शिकायतों और समस्याओं का संज्ञान लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने (कुझलनादन ने) बताया कि लंबे समय से इस क्षेत्र को हाशिये पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि बदले की भावना से यहां विकास कार्यों को रोक दिया गया और बाधित किया गया। मैं सिर्फ एक बात कह रहा हूं।
इन सभी शिकायतों और चिंताओं का समाधान किया जाएगा।
Continue reading on the app