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Skin Tanning: टैनिंग हटाने के लिए पार्लर नहीं, घर पर आजमाएं ये आसान तरीके; स्किन को मिलेगा नेचुरल ग्लो

Skin Tanning: धूप में ज्यादा समय बिताने के बाद चेहरे, गर्दन और हाथों की त्वचा का रंग सामान्य से गहरा नजर आने लगे तो इसे टैनिंग कहा जाता है। कई बार टैनिंग के साथ त्वचा रूखी और बेजान भी दिखाई देने लगती है। ऐसे में महंगे पार्लर ट्रीटमेंट कराने से पहले अपनी रोजमर्रा की स्किनकेयर आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे अहम बात यह है कि टैनिंग को केवल हटाने की कोशिश न करें, बल्कि आगे होने वाले सन डैमेज से त्वचा को बचाना भी जरूरी है।

घर पर त्वचा की देखभाल के लिए कुछ आसान और अपेक्षाकृत सौम्य विकल्प अपनाए जा सकते हैं। मसूर दाल जैसे घरेलू इंग्रीडिएंट्स से बने पैक को लोग त्वचा की सफाई और एक्सफोलिएशन के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन किसी भी घरेलू नुस्खे को लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर है। वहीं, ग्लो बनाए रखने के लिए सनस्क्रीन, मॉइश्चराइजर और धूप से बचाव सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञ भी कम से कम एसपीएफ 30 वाले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन की सलाह देते हैं।

मसूर दाल का फेस पैक आजमाएं
मसूर दाल को बारीक पीसकर इसमें थोड़ा दही या एलोवेरा जेल मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं और करीब 10-15 मिनट बाद पानी से धो लें। इसे जोर से रगड़ने या स्क्रब करने से बचें, क्योंकि ज्यादा घर्षण त्वचा में जलन पैदा कर सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोग पहले हाथ के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें।

एलोवेरा से दें त्वचा को ठंडक
अगर धूप में रहने के बाद त्वचा गर्म, रूखी या थोड़ी परेशान महसूस हो रही है तो सादा एलोवेरा जेल त्वचा को शांत करने में मदद कर सकता है। धूप से प्रभावित त्वचा पर कूलिंग और मॉइस्चराइजिंग के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल किया जाता है। अगर लगाने के बाद जलन, खुजली या लालिमा बढ़े तो इस्तेमाल बंद कर दें। हल्के सनबर्न में भी त्वचा को ठंडा रखने और मॉइश्चराइजर लगाने की सलाह दी जाती है।

मॉइश्चराइजर लगाना न भूलें
टैनिंग के बाद त्वचा अक्सर ड्राई और डल नजर आ सकती है। ऐसे में त्वचा के प्रकार के अनुसार हल्का, फ्रेगरेंस-फ्री मॉइश्चराइजर इस्तेमाल करें। नियमित मॉइस्चराइजिंग त्वचा में नमी बनाए रखने और उसे ज्यादा मुलायम दिखाने में मदद कर सकती है। संवेदनशील त्वचा के लिए बहुत ज्यादा एक्टिव या खुशबू वाले उत्पादों के बजाय सौम्य विकल्प बेहतर रहते हैं।

नींबू सीधे चेहरे पर लगाने से बचें
टैनिंग हटाने के नाम पर नींबू का रस सीधे त्वचा पर लगाना अच्छा विकल्प नहीं है। खट्टे फलों में मौजूद कुछ रसायन धूप के संपर्क में आने पर त्वचा में जलन, दाग और यहां तक कि फफोले जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं। इसलिए ऐसे घरेलू प्रयोगों से बचना बेहतर है, खासकर अगर त्वचा पहले से संवेदनशील हो।

सनस्क्रीन है टैनिंग से बचाव का सबसे जरूरी तरीका
टैनिंग दोबारा न हो, इसके लिए रोजाना सनस्क्रीन लगाना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन चुनें और बाहर निकलने से पहले लगाएं। लंबे समय तक बाहर रहने पर इसे करीब हर दो घंटे में दोबारा लगाने की जरूरत हो सकती है। टोपी, छाता, पूरी बाजू के कपड़े और दोपहर की तेज धूप से बचाव भी त्वचा को UV नुकसान से बचाने में मदद करता है।

कब डॉक्टर की सलाह लें?

अगर त्वचा पर लगातार जलन, लालिमा, खुजली, सूजन, छाले या असामान्य काले धब्बे दिखाई दें तो घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। याद रखें, टैनिंग वास्तव में UV एक्सपोजर से होने वाली त्वचा की क्षति का संकेत है। इसलिए ग्लो के लिए त्वचा को बार-बार धूप में झुलसने देना सही तरीका नहीं है।

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Swine Flu Symptoms: सामान्य से दिखने वाले ये लक्षण कहीं स्वाइन फ्लू तो नहीं? इन उपायों से खुद को रखें सेफ

Swine Flu Symptoms: बदलते मौसम और वायरल संक्रमण के बीच फ्लू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। स्वाइन फ्लू, जिसे H1N1 इन्फ्लूएंजा भी कहा जाता है, एक संक्रामक श्वसन बीमारी है। इसकी शुरुआत कई बार सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल फीवर जैसी लगती है, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है।

लगातार बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और अत्यधिक थकान जैसे संकेत दिखाई दें तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को फ्लू के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। जानिए स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण और इससे बचाव के आसान तरीके।

क्या है स्वाइन फ्लू?

स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से इन्फ्लूएंजा A (H1N1) वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों के संपर्क में आने से वायरस फैल सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।

स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण

तेज बुखार और ठंड लगना
स्वाइन फ्लू में अचानक बुखार आ सकता है। इसके साथ ठंड लगना, कमजोरी और शरीर में सुस्ती महसूस होना भी आम लक्षणों में शामिल हैं।

लगातार खांसी और गले में खराश
सूखी या लगातार बनी रहने वाली खांसी, गले में दर्द और खराश फ्लू के महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में नाक बहना या नाक बंद होना भी देखा जाता है।

शरीर और मांसपेशियों में दर्द
फ्लू के दौरान सिरदर्द के साथ मांसपेशियों और शरीर में दर्द महसूस हो सकता है। थकान इतनी अधिक हो सकती है कि रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी होने लगे।

सांस लेने में परेशानी
यदि बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या सांस फूलने जैसी समस्या हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कुछ लोगों में उल्टी-दस्त
फ्लू के दौरान कुछ मरीजों, विशेषकर बच्चों में उल्टी या दस्त जैसी शिकायत भी हो सकती है। हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है।

स्वाइन फ्लू से बचाव के जरूरी टिप्स

हाथ साफ रखें: साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं। बाहर से आने के बाद हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखें।

खांसते-छींकते समय सावधानी: खांसते या छींकते समय टिश्यू या कोहनी से मुंह-नाक ढकें। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत कूड़ेदान में डालें।

बीमार व्यक्ति से दूरी रखें: फ्लू के लक्षण वाले व्यक्ति के बेहद करीब जाने से बचें। खुद बीमार हों तो दूसरों के संपर्क को कम करना भी जरूरी है।

चेहरा बार-बार न छुएं: बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

भीड़भाड़ में सावधानी: संक्रमण फैलने की स्थिति में बहुत भीड़ वाली जगहों पर अनावश्यक जाने से बचें और जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करें।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

तेज या लगातार बना रहने वाला बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति या लक्षणों के तेजी से बिगड़ने पर चिकित्सकीय मदद लें। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों में फ्लू जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच और उपचार की सलाह दे सकते हैं।

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

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