आगरा के अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र को विकसित करेगी योगी सरकार, कृषि और पोषण सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
UP News: योगी सरकार आगरा के अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र को विकसित करने जा रही है. दरअसल, योगी सरकार आगरा के सींगना स्थित अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीसार्क) को विश्वस्तरीय आलू एवं शकरकंद अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करेगी. जिसके तहत दक्षिण एशिया क्षेत्र में कृषि और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा.
इसी के मद्देनजर शनिवार को अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र- सीसार्क (CSARC) की टीम ने आगरा का दौरा किया. इस टीम ने आगरा में दूसरी बार बैठक की. बैठक में कई बिंदुओं पर मंथन हुआ. इसके साथ ही सीसार्क फार्म के लिए 10 हेक्टेयर भूमि उपयोग के समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए. जिसे इस दिशा में अहम माना जा रहा है.
सीआईपी (पेरू) के महानिदेशक ने की बैठक की अध्यक्षता
बता दें कि आगरा में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता सीआईपी (पेरू) के महानिदेशक डॉ. सीमोन हेक और भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव अतिश चंद्र ने की. बैठक में भारत सरकार, यूपी सरकार, अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के साथ ही दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों के कृषि एवं अनुसंधान संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के अलावा वैज्ञानिक भी शामिल हुए. इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने आगरा में सीसार्क की स्थापना के रणनीतिक महत्व को लेकर भी बातचीत की.
यूपी प्रमुख आलू उत्पादन राज्यों में शामिल
बता दें कि उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में शामिल है. जबकि आगरा एक महत्वपूर्ण आलू उत्पादन क्षेत्र है. ऐसे में सीसार्क को स्थानीय एवं राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जोड़ते हुए दक्षिण एशिया के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया.
नवाचार और सफल प्रयोगों को व्यापक स्तर पर अपनाने की तैयारी
आगरा स्थित सीसार्क को केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित रखने के बजाय दक्षिण एशिया में आलू और शकरकंद के अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान-साझाकरण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. सीसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह के अनुसार, केंद्र की गतिविधियों का दायरा भारत के साथ नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के किसानों की जरूरतों तक बढ़ाया जाना चाहिए. इसके लिए वैज्ञानिक संस्थानों के साथ सहयोग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता है.
डॉ. सिंह ने कहा कि आगरा का सीसार्क भारत की वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञता को दक्षिण एशियाई देशों के अनुभवों और जरूरतों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है. भारत में विकसित तकनीकों और कृषि संबंधी अनुभवों को पड़ोसी देशों तक पहुंचाने के साथ-साथ वहां विकसित स्थानीय नवाचारों और प्रभावी समाधानों से सीखकर उन्हें दूसरे क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है.
उन्होंने दक्षिण-दक्षिण सहयोग को सीसार्क की भविष्य की कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के कृषि अनुसंधान संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इस सहयोग के माध्यम से ज्ञान, जर्मप्लाज्म, तकनीक, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और मानव संसाधन के आदान-प्रदान को गति देने की योजना है.
किसानों की जरूरतों के अनुरूप होगा अनुसंधान
सीसार्क को आधुनिक और बहुआयामी अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. डॉ. सिंह के मुताबिक, वैज्ञानिक अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम प्रयोगशाला से निकलकर खेत तक पहुंचे और किसानों की उत्पादकता, आय तथा आजीविका में ठोस सुधार करे.
ये भी पढ़ें: यूपी में रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, जापान के यामानाशी प्रांत के साथ हुआ समझौता
इसी उद्देश्य से बेहतर और जलवायु-अनुकूल किस्मों के विकास, गुणवत्तापूर्ण बीज व्यवस्था, आधुनिक उत्पादन तकनीक, रोगों की पहचान और प्रबंधन, जैव-सुदृढ़ीकरण तथा डिजिटल कृषि जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके साथ ही टिकाऊ कृषि, बाजार से जुड़ी तकनीकों और पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने वाले समाधानों पर भी अनुसंधान का फोकस रहेगा.
ये भी पढ़ें: योगी सरकार का किसान भाईयों को बड़ा तोहफा, टोकन मनी वापस करने का दिया आदेश
दूसरे टेस्ट में हारकर भी बांग्लादेश के नाम ऐतिहासिक उपलब्धि, आईसीसी रैंकिंग में पहली बार छठे नंबर पर पहुंची टीम
दूसरे टेस्ट में हारकर भी बांग्लादेश के नाम ऐतिहासिक उपलब्धि, आईसीसी रैंकिंग में पहली बार छठे नंबर पर पहुंची टीम
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
Samacharnama










