Operation Toofan का लक्ष्य ड्रग सप्लाई चेन तोड़ना है: Ramesh Chennithala
केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन तूफान’ का उद्देश्य गिरफ्तारी के आंकड़ों में शीर्ष पर रहना नहीं, बल्कि नशीले पदार्थों के स्रोतों की पहचान करना, उनकी आपूर्ति शृंखला को तोड़ना और राज्य को अधिक सुरक्षित बनाना है। उन्होंने मीडिया के एक वर्ग की उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि मुस्लिम बहुल मलप्पुरम जिले में सबसे अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं। चेन्निथला ने शनिवार शाम ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि केरल पुलिस कुछ जिलों में शहर और ग्रामीण पुलिस जिलों के अलग-अलग ढांचे के माध्यम से काम करती है।
उन्होंने कहा, “जब भौगोलिक तुलना के लिए शहर और ग्रामीण पुलिस के आंकड़ों को जोड़ा जाता है, तो एर्नाकुलम में 1,393, कोझिकोड में 1,373 और मलप्पुरम में 999 गिरफ्तारियां हुई हैं। कोझिकोड में सबसे अधिक 1,327 मामले भी दर्ज किए गए हैं।” उन्होंने आगाह किया कि अधिक गिरफ्तारियों या मामलों का मतलब यह नहीं है कि किसी जिले में मादक पदार्थों की समस्या अधिक है। उन्होंने कहा, “ये आंकड़े हमारी कार्रवाई का रिकॉर्ड हैं, किसी के चरित्र का प्रमाण पत्र नहीं।” चेन्निथला ने कहा कि अभियान का लक्ष्य मादक पदार्थों के स्रोत और विक्रेताओं की पहचान करना, आपूर्ति शृंखला बाधित करना और नशीले पदार्थों को युवाओं तक पहुंचने से रोकना है।
उन्होंने कहा, “गिरफ्तारियां केवल कानून प्रवर्तन को मापती हैं, जबकि पूरे नेटवर्क को तोड़ना हमारा वास्तविक उद्देश्य है।” उन्होंने बताया कि अभियान के तहत अब तक 10,015 गिरफ्तारियां और 9,280 मामले दर्ज किए गए हैं। साथ ही, स्कूल-कॉलेज सुरक्षा समूहों के माध्यम से 9,147 जागरुकता कक्षाएं और 6,561 कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
Delhi में Swine Flu के मामले बढ़े, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया परामर्श
राष्ट्रीय राजधानी में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामले बढ़ने के बीच दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श जारी करके लोगों से श्वसन संबंधी स्वच्छता का पालन करने, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। इस वर्ष दिल्ली में इन्फ्लुएंजा-ए के 2,300 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें शुक्रवार तक एच1एन1 के 1,777 से अधिक मामले शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अकेले बृहस्पतिवार को एच1एन1 के 114 मामले सामने आए।
स्वास्थ्य परामर्श में लोगों से कहा गया है कि खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को ढकें, साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें और श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों के निकट संपर्क से बचें। लोगों को आंखों और नाक को छूने से बचने, सार्वजनिक स्थानों पर न थूकने और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने की भी सलाह दी गई है। परामर्श में कहा गया है कि यदि बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, शरीर में दर्द या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सक की सलाह के बिना दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।
स्वास्थ्य विभाग ने पहले कहा था कि दिल्ली इन्फ्लुएंजा के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बिस्तर, डॉक्टर, दवाएं और जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं। विभाग ने बताया कि 35 अस्पतालों को विशेष निगरानी में रखा गया है और दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र में दो रेफरल प्रयोगशालाएं निर्धारित की गई हैं।
मरीजों की श्रेणी तय करने, उपचार के प्रोटोकॉल, वेंटिलेटर संबंधी प्रबंधन, मास्क के इस्तेमाल और घर पर देखभाल से संबंधित तकनीकी दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारियों, जिला निगरानी अधिकारियों और अस्पतालों को इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों वाली बीमारी (आईएलआई), गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण, इन्फ्लुएंजा और कोविड-19 के मामलों की जांच, रिपोर्टिंग और निगरानी के संबंध में परामर्श भेजे गए हैं। यह काम दिशानिर्देशों के अनुसार ‘इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म’ पोर्टल पर किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बृहस्पतिवार को इन्फ्लुएंजा के 159 मामले सामने आए। इनमें 155 मामले इन्फ्लुएंजा -ए के थे, जिनमें 114 एच1एन1, दो एच1, एक एच3 और इन्फ्लुएंजा-ए के 38 अन्य मामले शामिल थे। इसके अलावा इन्फ्लुएंजा-बी के भी चार मामले सामने आए।
शुक्रवार तक इस वर्ष दिल्ली में इन्फ्लुएंजा के कुल 2,602 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 2,392 इन्फ्लुएंजा -ए और 210 इन्फ्लुएंजा -बी के मामले हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिस्सा लिया।
बैठक में दिल्ली में मौसमी इन्फ्लुएंजा और वेक्टर जनित बीमारियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई।
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