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Delhi में Swine Flu के मामले बढ़े, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया परामर्श

राष्ट्रीय राजधानी में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामले बढ़ने के बीच दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श जारी करके लोगों से श्वसन संबंधी स्वच्छता का पालन करने, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। इस वर्ष दिल्ली में इन्फ्लुएंजा-ए के 2,300 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें शुक्रवार तक एच1एन1 के 1,777 से अधिक मामले शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अकेले बृहस्पतिवार को एच1एन1 के 114 मामले सामने आए।

स्वास्थ्य परामर्श में लोगों से कहा गया है कि खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को ढकें, साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें और श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों के निकट संपर्क से बचें। लोगों को आंखों और नाक को छूने से बचने, सार्वजनिक स्थानों पर न थूकने और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने की भी सलाह दी गई है। परामर्श में कहा गया है कि यदि बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, शरीर में दर्द या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सक की सलाह के बिना दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।

स्वास्थ्य विभाग ने पहले कहा था कि दिल्ली इन्फ्लुएंजा के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बिस्तर, डॉक्टर, दवाएं और जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं। विभाग ने बताया कि 35 अस्पतालों को विशेष निगरानी में रखा गया है और दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र में दो रेफरल प्रयोगशालाएं निर्धारित की गई हैं।

मरीजों की श्रेणी तय करने, उपचार के प्रोटोकॉल, वेंटिलेटर संबंधी प्रबंधन, मास्क के इस्तेमाल और घर पर देखभाल से संबंधित तकनीकी दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारियों, जिला निगरानी अधिकारियों और अस्पतालों को इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों वाली बीमारी (आईएलआई), गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण, इन्फ्लुएंजा और कोविड-19 के मामलों की जांच, रिपोर्टिंग और निगरानी के संबंध में परामर्श भेजे गए हैं। यह काम दिशानिर्देशों के अनुसार ‘इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म’ पोर्टल पर किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बृहस्पतिवार को इन्फ्लुएंजा के 159 मामले सामने आए। इनमें 155 मामले इन्फ्लुएंजा -ए के थे, जिनमें 114 एच1एन1, दो एच1, एक एच3 और इन्फ्लुएंजा-ए के 38 अन्य मामले शामिल थे। इसके अलावा इन्फ्लुएंजा-बी के भी चार मामले सामने आए।

शुक्रवार तक इस वर्ष दिल्ली में इन्फ्लुएंजा के कुल 2,602 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 2,392 इन्फ्लुएंजा -ए और 210 इन्फ्लुएंजा -बी के मामले हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में दिल्ली में मौसमी इन्फ्लुएंजा और वेक्टर जनित बीमारियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई।

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PNG Connection को बढ़ावा देने के लिए राज्यों में तैनात होंगे Nodal Officer

केंद्र सरकार ने घरों में पाइप के जरिये प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की पहुंच और इस्तेमाल बढ़ाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। ये अधिकारी गैस वितरण कंपनियों और पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के साथ समन्वय कर उन घरों को पाइप वाली रसोई गैस से जोड़ने में मदद करेंगे, जहां पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने 21 अगस्त को राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा कि पीएनजी सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक सुविधाजनक ईंधन है।

इसका इस्तेमाल बढ़ने से रसोई गैस सिलेंडर यानी एलपीजी की ढुलाई का बोझ कम होगा और शहरों में तैयार किए गए गैस वितरण ढांचे का बेहतर उपयोग हो सकेगा। मंत्रालय चाहता है कि इस मामले में जिला-स्तर पर हस्तक्षेप हो। मंत्रालय एक ऐसा नियामकीय ढांचा लागू करने वाला है जिसके तहत परिवार ऐसे इलाकों में एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन दोनों एक साथ नहीं रख सकेंगे जहां पाइप वाली गैस उपलब्ध है।

सरकार का यह कदम ऐसे उठाया आया है जब इस साल पश्चिम एशिया में संकट के दौरान एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। भारत अपनी घरेलू एलपीजी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है और पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति समुद्री मार्गों पर निर्भर रहती है। संकट के दौरान घरेलू एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता देनी पड़ी थी।

इसके मुकाबले घरेलू पीएनजी आपूर्ति पर संकट का असर अपेक्षाकृत कम रहा। घरेलू पीएनजी क्षेत्र को घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस की प्राथमिकता वाली आपूर्ति मिलने के कारण यह संकट से बचा रहा। सरकार अब उन क्षेत्रों में एलपीजी से पीएनजी की ओर तेजी से बदलाव करना चाहती है, जहां पाइप वाली गैस पहुंच चुकी है।

पीएनजी को तेजी से बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइन बिछाने, निर्माण, परिचालन और विस्तार तथा अन्य सुविधाओं) आदेश 2026 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा तीन के तहत एलपीजी नियंत्रण आदेश को अधिसूचित किया है। नए अधिसूचित नियमों के तहत ऐसे इलाकों में घरों को एक साथ एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन रखने की अनुमति नहीं होगी। नोटिस दिए जाने के बाद पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की एलपीजी आपूर्ति बंद की जा सकती है।

इसके लिए प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र में पीएनजी समन्वय समिति (पीसीसी) गठित की जाएगी। समिति आवासीय सोसायटी और पात्र घरों की पहचान करेगी, नोटिस जारी करेगी तथा उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता और कनेक्शन शिविर आयोजित करेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि पीसीसी व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन अब तक के अनुभव से पता चला है कि इसे समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग जरूरी है।

जिला प्रशासन को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और आवासीय समितियों से पाइपलाइन बिछाने के लिए रास्ता उपलब्ध कराने, एलपीजी वितरकों और गैस वितरण कंपनियों के बीच समन्वय कराने, उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान और पीएनजी अपनाने की निगरानी में मदद करनी होगी। मंत्रालय ने राज्यों से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को इस काम के लिए नामित करने को कहा है। प्रत्येक जिले में कम से कम जिला आपूर्ति अधिकारी स्तर के एक अधिकारी को पीसीसी से जोड़ा जाएगा।

सरकार का मानना है कि पीएनजी का विस्तार खाना पकाने के लिए एलपीजी पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ भारत की ऊर्जा आपूर्ति को अंतरराष्ट्रीय संकट और समुद्री परिवहन में होने वाले व्यवधानों के प्रति अधिक जुझारू बनाएगा। सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे इस मामले को प्राथमिकता से लें। सरकार ने राज्यों से स्पष्ट किया है कि वह समयबद्ध तरीके से पीएनजी की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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