Putrada Ekadashi 2026: पुत्रदा एकादशी पर व्रत नहीं रखा तो भी करें ये 7 उपाय, संतान सुख की है मान्यता
सावन महीने में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति, संतान की तरक्की और उनकी दीर्घायु की कामना से किया जाता है।
इस बार 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी के साथ सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में भक्त व्रत के अलावा भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और जरूरतमंदों को दान कर सकते हैं।
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए कुछ विशेष उपायों से संतान के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है।
1. संतान गोपाल मंत्र का जाप
पुत्रदा एकादशी पर संतान सुख की कामना के लिए संतान गोपाल मंत्र का जाप करने की धार्मिक मान्यता है।
“ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥”
पूजा के बाद श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
2. तुलसी के पास जलाएं घी का दीपक
एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक जलाएं। इसके बाद तुलसी माता की परिक्रमा करें। धार्मिक मान्यता में तुलसी को भगवान विष्णु को प्रिय माना गया है।
3. पीपल के पेड़ की करें सेवा
सुबह पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें। शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा भी बताई गई है। ऐसा करते समय मन में संतान की सुख-समृद्धि की कामना कर सकते हैं।
4. भगवान विष्णु को लगाएं पीले रंग का भोग
पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु को केसर की खीर, पीले लड्डू और तुलसी दल अर्पित करने की मान्यता है। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं।
5. विष्णु सहस्रनाम का करें पाठ
इस दिन विष्णु सहस्रनाम या संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। अगर पूरा पाठ संभव न हो तो भगवान विष्णु के नामों का श्रद्धापूर्वक स्मरण भी किया जा सकता है।
6. 108 बार करें इस मंत्र का जाप
संतान सुख और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप किया जा सकता है। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करने की परंपरा है।
7. दक्षिणावर्ती शंख से करें अभिषेक
भगवान विष्णु की पूजा के दौरान दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करने की भी धार्मिक मान्यता है। पूजा में तुलसी दल और पीले फूल अर्पित किए जा सकते हैं।
पीली चीजों का करें दान
पुत्रदा एकादशी पर जरूरतमंद लोगों को केला, चना दाल, पीली मिठाई या अन्य पीले रंग की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। सामर्थ्य के अनुसार दान करने और जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा है।
23 अगस्त को ही रखा जाएगा व्रत
पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात 2 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 23 अगस्त को ही पुत्रदा एकादशी का व्रत रखना शुभ माना गया है।
ध्यान रखें कि ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। संतान प्राप्ति या स्वास्थ्य से जुड़ी किसी समस्या में चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।
Chandra Grahan 2026: रक्षाबंधन पर लाल होगा चांद! 28 अगस्त को दिखेगा ‘Blood Moon’, जानें भारत में आएगा नजर या नहीं
Chandra Grahan 2026: अगस्त का आखिरी सप्ताह खगोल प्रेमियों के लिए खास रहने वाला है। 28 अगस्त को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। खास बात यह है कि इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। इस दौरान चांद का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में आ जाएगा और ग्रहण के गहरे चरण में उसकी सतह लाल या तांबे जैसी दिखाई दे सकती है।
हालांकि इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहना सही नहीं होगा। वैज्ञानिक दृष्टि से यह गहरा आंशिक चंद्रग्रहण होगा। अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय समय के अनुसार ग्रहण 27 और 28 अगस्त के बीच दिखाई दे सकता है।
क्यों लाल दिखाई देगा चांद?
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। ग्रहण के दौरान सूर्य की सीधी रोशनी चांद तक नहीं पहुंच पाती।
लेकिन पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह रोकता नहीं है। वायुमंडल से छनकर और मुड़कर पहुंचने वाली लाल रोशनी चांद की सतह को हल्की लालिमा देती है। इसी वजह से चंद्रमा लाल, तांबे या जंग जैसे रंग में दिखाई दे सकता है। इसी तरह के लाल रंग वाले चंद्रमा को आम बोलचाल में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
चांद का कितना हिस्सा छाया में आएगा?
ग्रहण अपने चरम पर पहुंचने के दौरान चंद्रमा का करीब 93 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी Umbra में आ सकता है। इसलिए चांद का ज्यादातर हिस्सा ढका हुआ दिखाई देगा और उसका रंग सामान्य पूर्णिमा के चांद से काफी अलग नजर आ सकता है।
हालांकि, एक महत्वपूर्ण अंतर है। पूर्ण चंद्रग्रहण में पूरा चांद पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाता है, जबकि अगस्त 2026 का ग्रहण उस स्थिति तक नहीं पहुंचेगा। इसलिए इसे गहरा आंशिक चंद्रग्रहण कहा जा रहा है।
किन देशों में दिखेगा चंद्र ग्रहण?
28 अगस्त का यह चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और यूरोप-अफ्रीका के कुछ हिस्सों से देखा जा सकेगा। ग्रहण की खगोलीय घटनाएं एक ही समय पर होंगी, लेकिन अलग-अलग देशों में स्थानीय समय और तारीख के हिसाब से इसका समय अलग दिखाई देगा।
क्या भारत में दिखेगा ‘Blood Moon’?
यह सवाल भारतीय दर्शकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। अगस्त 2026 का यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान जैसे देशों में भी इस ग्रहण का नजारा देखने को नहीं मिलेगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को 28 अगस्त की रात लाल चांद देखने का मौका नहीं मिलेगा।
क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे जुड़े सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने या अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर ग्रहण संबंधी किसी विशेष बाधा की बात नहीं होगी।
हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण का क्या महत्व है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में चंद्र ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति, स्मरण शक्ति और मातृत्व से जोड़ा जाता है। वहीं ग्रहण की धार्मिक व्याख्या में राहु और केतु का भी उल्लेख मिलता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार राहु द्वारा सूर्य या चंद्रमा को ग्रसने की कथा ग्रहण से जुड़ी हुई है। इसी कारण कई लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और मंत्र जाप करते हैं। भगवान शिव, विष्णु, चंद्रमा या अपने इष्ट देवता के मंत्रों का जाप करने की परंपरा भी कुछ परिवारों में मानी जाती है। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां चंद्र ग्रहण से जुड़े सूतक आदि के नियम लागू नहीं माने जाएंगे।
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