US-Canada Tariff War: ट्रंप-कार्नी के बीच आखिर क्यों टूटी बातचीत? 50% टैरिफ के बाद अब क्या होगा?
US-Canada Tariff War में बातचीत क्यों टूटी? अमेरिका ने 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50% टैरिफ लगाया। अब कनाडा के जवाबी टैरिफ से क्या बढ़ेगा तनाव और क्या USMCA पर मंडराएगा संकट? दो पुराने दोस्तों के बीच छिड़ी जंग! क्या टूटने की कगार पर है सालों पुराना रिश्ता?
'दुश्मन माने जाएंगे आर्थिक जंग में अमेरिका का साथ देने वाले पड़ोसी', ईरान की मिडिल ईस्ट के देशों को सख्त चेतावनी
US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है. पिछले दिनों में अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनियाभर के देशों को ईरान के साथ किसी भी प्रकार के आर्थिक लेन-देन न करने की चेतावनी दी, जिसे लेकर अब ईरान ने भी अपने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने इस आर्थिक जंग में अमेरिका का साथ दिया तो उन्हें दुश्मन माना जाएगा. साथ ही उनके खिलाफ हमले की कार्रवाई की जाएगी.
ईरान की पड़ोसी देशों को सख्त चेतावनी
दरअसल, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई ने शनिवार (स्थानीय समय) को पड़ोसी देशों को चेतावनी दी कि वे तेहरान के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक अभियान में शामिल न हों. उन्होंने कहा कि अगर वे ऐसा करते हैं, तो ईरान उन्हें अपना दुश्मन मानेगा. IRIB को दिए एक इंटरव्यू में रेजाई ने कहा, "हम आस-पास के सभी देशों से कह रहे हैं कि वे अमेरिका के साथ आर्थिक युद्ध में शामिल न हों, वरना हम उन्हें दुश्मन मानेंगे."
हम जंग नहीं चाहते- मोहसिन रेजाई
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान तनाव नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन चेतावनी दी कि अगर पड़ोसी देशों ने वॉशिंगटन के आर्थिक दबाव वाले कदमों का समर्थन किया, तो तेहरान इसका जवाब देगा. रेजाई ने कहा, "हम युद्ध को बढ़ाना नहीं चाहते, लेकिन अगर ईरान के आस-पास के देश आर्थिक युद्ध में अमेरिकियों का साथ देते हैं, तो हम उनके हितों को नुकसान पहुंचाएंगे."
होर्मुज से तेल की एक बूंद भी नहीं जा पाएगी बाहर- रेजाई
उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर इलाके के देश अमेरिका के अभियान में शामिल होते हैं, तो ईरान फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के निर्यात को रोक सकता है. उन्होंने कहा, "अगर ईरान के आस-पास के देश आर्थिक युद्ध में अमेरिकियों का साथ देते हैं, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की एक बूंद भी बाहर नहीं जा पाएगी, और हम उन दूसरे रास्तों को भी निशाना बनाएंगे जिनसे फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात किया जाता है."
ट्रंप ने किया था ईरान के खिलाफ आर्थिक अभियान का एलान
बता दें कि रेजाई के ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ "इकोनॉमिक D-Day" अभियान की घोषणा के बाद आए हैं. ट्रंप ने इसे "किसी भी देश के खिलाफ अब तक का सबसे जबरदस्त आर्थिक ऑपरेशन" बताया है और अमेरिका के सहयोगियों से तेहरान को अलग-थलग करने में वाशिंगटन का साथ देने की अपील की है.
- ट्रंप ने कहा कि नए उपायों का मकसद ईरान की आर्थिक जीवन-रेखाओं को निशाना बनाना होगा, जिनमें तेल की तस्करी के नेटवर्क, पैसों का लेन-देन, एक्सचेंज हाउस, जहाजों की रजिस्ट्री और मुखौटा कंपनियां (फ्रंट कंपनियां) शामिल हैं. ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, "तेल की तस्करी, स्वैप लाइन, नकद लेन-देन, एक्सचेंज हाउस, जहाजों की रजिस्ट्री, मुखौटा कंपनियां- इन सबको अब बंद होना चाहिए."
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, "आप जानते हैं कि आप कौन हैं. यह एक 'इकोनॉमिक D-Day' (निर्णायक आर्थिक दिन) होगा, और ईरान के खतरे को अलग-थलग करने और उसे हराने के लिए हमें अपने सभी सहयोगियों की जरूरत है कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ खड़े हों."
ये भी पढ़े: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत आएंगे ईरानी राष्ट्रपति, PM मोदी से मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर?
- इस बीच, ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने पहले ही अमेरिका के आर्थिक दबाव अभियान की आलोचना करते हुए कहा था कि प्रतिबंधों से ईरानी लोगों के संकल्प में कोई बदलाव नहीं आएगा.
अरेफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर कहा, "सरकार अमेरिका के आर्थिक आतंकवाद को लोगों की आर्थिक स्थिरता और रोजी-रोटी को नुकसान नहीं पहुंचाने देगी. इस्लामिक क्रांति के अनुभव से पता चला है कि आर्थिक दबाव ईरानी राष्ट्र के इरादों को नहीं बदल सकता, बल्कि इसका उल्टा असर होता है."
ये भी पढ़े: ईरान पर होगी इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई? अमेरिका ने दी नई चेतावनी, धमकी के बाद बढ़े तेल के दाम
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Asianetnews
News Nation








