दलीप ट्रॉफी आज से, वैभव सूर्यवंशी खेलते दिखेंगे:ईस्ट जोन ने उपकप्तान बनाया; 63वें सीजन में 6 टीमों के बीच मैच
भारत का 2026-27 डोमेस्टिक क्रिकेट सीजन 23 अगस्त से दलीप ट्रॉफी के साथ शुरू होगा। यह टूर्नामेंट का 63वां सीजन है। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा 15 साल के वैभव सूर्यवंशी की है। उन्हें ईस्ट जोन का उपकप्तान बनाया गया है। टी-20 में पहचान बना चुके वैभव को रेड बॉल क्रिकेट में अभी खुद को साबित करना है। दलीप ट्रॉफी में देश के अलग-अलग जोन की टीमें खेलती हैं। खिलाड़ी न्यूजीलैंड दौरे और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होम टेस्ट सीरीज के लिए दावेदारी पेश करेंगे। वैभव के लिए रेड बॉल का बड़ा टेस्ट वैभव ने पिछले एक साल में टी-20 क्रिकेट में शानदार परफॉर्मेंस किया है। उन्होंने IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन बनाए थे। इसके बाद उन्हें भारत की टी-20 टीम में जगह मिली। अब दलीप ट्रॉफी में उनकी नजर रेड बॉल क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन करने पर होगी। ईस्ट जोन की कप्तानी ईशान किशन करेंगे ईस्ट जोन ने वैभव को ईशान किशन का डिप्टी बनाया है। सिलेक्टर्स का कहना है कि इससे यह देखने में मदद मिलेगी कि वे अतिरिक्त जिम्मेदारी के प्रेश को कैसे संभालते हैं। ईस्ट जोन अपने अभियान की शुरुआत नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ करेगा। अगर टीम आगे बढ़ती है तो वैभव को अगले दो हफ्तों में कम से कम दो रेड बॉल मैच खेलने का मौका मिल सकता है। फाइनल तक पहुंचने पर यह संख्या तीन हो सकती है। प्लेयर ऑफ द सीरीज जीतने वाले यंगेस्ट प्लेयर बने थे वैभव हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 सीरीज में प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे थे। वे यह अवॉर्ड जीतने वाले दुनिया के यंगेस्ट प्लेयर बने थे। उन्होंने 3 मैचों में दो अर्धशतक की मदद से 151 रन बनाए थे। राजस्थान रॉयल्स के कैंप में तैयारी की जिम्बाब्वे से लौटने के बाद वैभव ने राजस्थान रॉयल्स के हाई परफॉर्मेंस सेंटर में दो हफ्ते रेड बॉल क्रिकेट की तैयारी की। यह कैंप विक्रम राठौर की निगरानी में हुआ। इसमें तकनीक, फिटनेस, वर्कलोड, रिकवरी और परफॉर्मेंस का एनालिसिस किया गया। उनके पुराने कोच मनीष ओझा ने भी तैयारी में मदद की। वैभव के लिए स्पिन खेलने और उछाल के खिलाफ बैकफुट पर खेलने की खास तैयारी कराई गई। अलग-अलग तरह की पिचों पर अभ्यास कराया गया। इन खिलाड़ियों पर भी नजर टेस्ट टीम के लिए रिजर्व ओपनर की रेस में अभिमन्यु ईश्वरन, आयुष पांडे, अमन मोकाड़े और वैभव सूर्यवंशी पर नजर रहेगी। पिछले रणजी सीजन में 950 रन बनाने वाले आर स्मरण भी अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहेंगे। तेज गेंदबाजों में अर्शदीप सिंह और अंशुल कंबोज के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। अनुभवी खिलाड़ियों में मोहम्मद शमी और करुण नायर भी शामिल हैं। शमी ने 2025-26 रणजी सीजन में 7 मैचों में 37 विकेट लिए थे। दलीप ट्रॉफी का इतिहास दलीप ट्रॉफी की शुरुआत 1961-62 में हुई थी। इसका नाम पूर्व भारतीय क्रिकेटर कुमार श्री दलीपसिंहजी के नाम पर रखा गया है। यह फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट है और लंबे समय तक जोनल फॉर्मेट में खेला जाता रहा है। बीच में इसका फॉर्मेट कई बार बदला। 2016 से 2019 तक BCCI ने इंडिया ब्लू, इंडिया ग्रीन और इंडिया रेड जैसी टीमों के साथ इसे कराया। 2022-23 में फिर जोनल फॉर्मेट लौट आया। 2024-25 में टूर्नामेंट चार टीमों के साथ खेला गया था। इंडिया-A, इंडिया-B, इंडिया-C और इंडिया-D ने हिस्सा लिया था। इसके बाद जोनल फॉर्मेट वापस आया। दलीप ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन वसीम जाफर ने बनाए दलीप ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड वसीम जाफर के नाम है। उन्होंने 2545 रन बनाए हैं। नरेंद्र हिरवानी ने सबसे ज्यादा 126 विकेट लिए हैं। सबसे बड़ी पारी का रिकॉर्ड रमन लांबा के नाम हैं, जिन्होंने 1987-88 में नॉर्थ जोन के लिए वेस्ट जोन के खिलाफ 320 रन बनाए थे। एक मैच में बेस्ट गेंदबाजी का रिकॉर्ड देबाशीष मोहंती के नाम है।
भारत की त्रिसा-गायत्री को बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मिला:15 साल बाद विमेंस डबल्स में मेडल आया, गोपीचंद बोले- 'मुझे दोनों पर गर्व'
भारत की त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल मिला है। यह जोड़ी शनिवार को विमेंस डबल्स का सेमीफाइनल हार गई। उन्हें वर्ल्ड नंबर-1 जोड़ी चीन की लियू शेंग शू और टैन निंग ने 18-21, 21-13, 21-8 से हराया। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में एक घंटे 11 मिनट तक चले इस मैच में भारतीय जोड़ी ने पहला गेम जीत लिया। लेकिन, बाकी को दो गेम गंवा बैठी। भारत को 15 साल बाद विमेंस डबल्स कैटेगरी में मेडल मिला है। इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने ब्रॉन्ज दिलाया था। त्रिसा-गायत्री वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेडल विनर क्लब में शामिल त्रिसा-गायत्री उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों के क्लब में शामिल हो गईं, जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप के पोडियम पर जगह बनाई है। गायत्री ने कहा, ‘उस क्लब में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। अभी लंबा सफर बाकी है। यह सिर्फ शुरुआत है। हमें इस सफलता को आत्मविश्वास के साथ आगे ले जाना है।’ भारत लगातार 11 एडिशन से मेडल जीत रहा भारत ने 2011 से लगातार 11 वर्ल्ड चैंपियनशिप एडीशन में कम से कम एक मेडल जीता है। भारत को पहला मेडल (ब्रॉन्ज) 1983 में प्रकाश पादुकोण ने दिलाया था। एकमात्र गोल्ड पीवी सिंधु ने जीता है। अब भारत के वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल की संख्या 16 हो गई है। इनमें एक गोल्ड, 4 सिल्वर और 11 ब्रॉन्ज शामिल हैं। किसने क्या कहा? गायत्री ने कहा- 'हम थोड़ा ज्यादा कॉन्फिडेंट थे' गायत्री ने मैच के बाद कहा, ‘पहले गेम में हम थोड़ा ज्यादा कॉन्फिडेंट थे। दूसरे गेम में चीनियों ने बहुत धैर्य के साथ खेला। वे काफी शांत थीं। हम जल्दबाजी कर रहे थे और सिर्फ अंक लेना चाहते थे। हम अपने खेल से खुश हैं। पूरा टूर्नामेंट हमारे लिए शानदार रहा।' त्रिसा जॉली बोली- ‘आज हमारा दिन नहीं था’ त्रिसा ने कहा, 'आज हमारा दिन नहीं था। पहले गेम में जीतने के बाद दूसरे गेम की शुरुआत में भी हमारा कंट्रोल था। फिर प्रतिद्वंद्वियों ने रिदम हासिल कर लिया और हम खो बैठे।' उन्होंने आगे कहा, 'वे अंक में बढ़त बना रही थीं और हम उनकी बराबरी नहीं कर पा रहे थे। वे रैलियों के दौरान धैर्य से खेल रही थीं, जिससे उन्हें फायदा मिला।' त्रिसा-गायत्री इस साल अब तक ज्यादा टूर्नामेंट नहीं खेल सकी थीं। त्रिसा को अप्रैल में टखने में चोट लगी थी, जिसके कारण दोनों का शेड्यूल सीमित रहा। कोच गोपीचंद ने कहा- 'दोनों ने हमें गर्व महसूस कराया' भारत के चीफ कोच पुलेला गोपीचंद से जब पूछा गया कि इस समय उन्हें पिता होने पर ज्यादा गर्व है या कोच होने पर, तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि दोनों। जब मैं कोर्ट पर होता हूं, तो मेरे अंदर का कोच सामने होता है, लेकिन बाहर पिता होता है।' पुलेला ने कहा, ‘त्रिसा और गायत्री दोनों ने हमें गर्व महसूस कराया। उन्होंने बहुत अच्छी लड़ाई लड़ी और मैं मेडल से खुश हूं। निश्चित तौर पर मैं उन्हें फाइनल में देखना चाहता था, लेकिन उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने टॉप खिलाड़ियों को हराया है, इसलिए यह शानदार प्रदर्शन रहा।’ भारतीय जोड़ी ने एक घंटे 11 मिनट संघर्ष किया पहला गेम में भारतीय जोड़ी एक समय 16-18 से पीछे थी, लेकिन इसके बाद लगातार 5 अंक जीतकर शानदार वापसी की। उसने गेम 21-18 से अपने नाम किया। दूसरे गेम में त्रिसा-गायत्री 8-10 से पीछे चल रही थीं। फिर इंडियन पेयर ने लगातार अंक लेकर ब्रेक तक 11-10 की बढ़त ली। ब्रेक के बाद चीनियों ने वापसी की और 21-13 से गेम जीता। तीसरे गेम में चीनी खिलाड़ियों ने भारतीय जोड़ी को ज्यादा मौके नहीं दिए। उन्होंने 21-8 से गेम जीतकर फाइनल में जगह बनाई। ----------------------------------------------- रैकेट स्पोर्टस से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… सिनर घुटने की चोट के कारण यूएस ओपन से हटे, कहा- ठीक होने में और समय चाहिए वर्ल्ड नंबर 1 टेनिस खिलाड़ी जैनिक सिनर ने दाएं घुटने की चोट के कारण इस महीने होने वाले यूएस ओपन से नाम वापस ले लिया है। वे सीजन के आखिरी ग्रैंड स्लैम में नहीं खेलेंगे। पढ़ें पूरी खबर
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